किसी राष्ट्र के समग्र वहनीय विकास के लिए सड़क परिवहन की कुशल प्रणाली एक पूर्व आवश्यकता है। यह एक मुख्य मूल संरचना इकाई है जो देश भर में मानव और सामग्री के संचलन को सुकर बनाकर व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देता है। यह पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों को अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा से जोड़कर संपूर्ण राष्ट्र को एकता प्रदान करता है। एक अच्छा योजित सड़क नेटवर्क रेलवे, हवाई, पत्तन, अंतरदेशीय जल परिवहन जैसे अन्य साधनों से संपर्क की व्यवस्था करता है और इस प्रकार एक सुदृढ़ परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता को पूरा करने के प्रयासों को पूरा करता है।
भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था के लिए ऐसे सड़क नेटवर्क का तीव्र विस्तार और इसकी सुदृढ़ता समग्र उन्नति के लिए विशेष तौर पर आवश्यक है। भारत का सड़क नेटवर्क विश्व में सबसे बड़े सड़क नेटवर्कों में से एक है (3.32 मिलियन कि. मी.) जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग/एक्सप्रैस मार्ग (6600 कि. मी.); राज्य राजमार्ग (128000 कि. मी.); मुख्य और अन्य जिला सड़कें (470000 कि. मी.); और ग्रामीण सड़कें (2650000 कि. मी.)। सड़कों द्वारा लगभग 65 प्रतिशत ढुलाई और 86.7 प्रतिशत यात्री के लाए जाते हैं। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क नेटवर्क का लगभग केवल 2 हिस्सा हैं जबकि यह कुल सड़क परिवहन का 40 प्रतिशत है।
भारत में पोत परिवहन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, के अंतर्गत सड़क परिवहन और राजमार्ग विभाग सड़क परिवहन और राजमार्ग विभाग सड़क परिवहन के विकास के लिए एक नोडल एजेंसी है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग (एन एच) का निर्माण और रखरखाव एवं मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली के प्रशासन का कार्य सौंपा गया है। यह पड़ोसी देशों के साथ वाहन परिवहन के संचलन के लिए व्यवस्था करने सहित सड़क परिवहन, पर्यावरणीय मामलों, ऑटोमोटिव मानदण्डों आदि से संबंधित व्यापक नीतियां बनाता है। इसने सड़क क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत से कदम भी उठाए हैं।
परम्परागत तौर पर सड़क परियोजनाएं सरकार द्वारा पूर्णतया वित्त पोषित एवं नियंत्रित होती थी। लेकिन परिवहन के बढ़ते हुए दबाव में परिणामस्वरूप सड़क के मूल संरचना की बढ़ती हुई मांग ने सड़क क्षेत्र में निजी निवेशों को आकर्षित करना आवश्यक बना दिया। अत: राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनिम (एन एच अधिनियम), 1956 को जून, 1995 में संशोधित किया गया था और निजी व्यक्तियों को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में निवेश करने; उपयोगकर्ताओं से फीस के उद्ग्रहण, संग्रहण और प्राप्त करने आदि की अनुमति दी गई थी। 'राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एचएचडीपी)' के रूप में जानी जाने वाली भारत की सबसे बड़ी सड़क परियोजना आरंभ करने के साथ ही सड़क परिवहन में महत्वपूर्ण निजी भागीदारी का आरंभ हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार और विकास के लिए ली जाने वाली एक व्यापक परियोजना है और 'भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई)' द्वारा चरणबद्ध ढंग से कार्यान्वित की जा रही है।
इन पहलों के अलावा विभाग ने 'राष्ट्रीय सड़क परिवहन नीति', की भी घोषणा की है जिसका उद्देश्य अच्छे जीवन सुधार के लिए एक सक्षम और सुरक्षित सड़क परिवहन प्रणाली की सुविधा प्रदान करना है। इस प्रकार देश में सड़क नेटवर्क प्रवाह और सुकर बनाने के लिए सरकार द्वारा ऐसे सभी प्रयासों ने उक्त क्षेत्र में निवेश हुए बहुत से अवसर प्रदान किए हैं।
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