भारतीय महाद्वीप के पूर्वी हिमाचल कोने पर बसा सिक्किम एक खूबसूरत राज्य है। यह 27 डिग्री 00' 46" से 28 डिग्री 07' 48" उत्तरी अक्षांश और 88 डिग्री 00' 58" से पूर्वी 88 डिग्री 55' 25" पूर्वी अक्षांश के बीच स्थित है। प्रदेश में 7,096 वर्ग किलोमीटर भू-भाग है जो देश का 0.22 प्रतिशत क्षेत्र है। उत्तर से दक्षिण तक राज्य 112 किलोमीटर में फैला है जब कि पूर्व से पश्चिम तक 64 किलोमीटर में फैला है। इसके उत्तर में तिब्बत का विशाल पठारी भू-भाग है, तिब्बत का चुंबी घाटी और भूटान पूर्व में, जब कि नेपाल इसके पश्चिम में है और दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) दक्षिण में स्थित है।
माउंट कंचनजंगा जो कि विश्व का तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है, अपने सौंदर्य एवं गौरव के साथ इस छोटे से हिमालयी राज्य में विराजमान है। जैव विविधता वाले 18 प्रमुख स्थानों में राज्य एक है। देश में पाए जाने वाली आवृत बीजी प्रजातियों में लगभग एक तिहाई प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। फूल वाले पौधों की 4,000 प्रजातियां यहां मिलती हैं जब कि कटीले जंगलों (पौधों) की 300 प्रजातियां, स्तनधारियों की 144 प्रजातियां, पक्षियों की 500 से 600 प्रजातियां और कई किस्में यहां पाई जाती हैं। दुर्लभ प्रजाति का नीला भेड़, मैस्टिफ, याक के साथ-साथ यहां लाल रंग के पांडा भी पाए जाते हैं। आदर्श जलवायु के साथ-साथ इस तरह की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटन उद्योग के लिए राज्य को अनुकूल बनाता है। राज्य की हरियाली ने इसे निवेश का आकर्षक स्थान बना दिया है।
नीतिगत रूप से सिक्किम में तीन प्रमुख लोगों के समूह मिलते हैं वे हैं नेपाली, भूटिया व लेपचा। वे विविधि आर्थिक गतिविधियों में लगे हुए हैं। इनमें पर्यटन बागवानी, खेती आदि प्रमुख गतिविधियां हैं:-
- सहयोगात्मक और लचीला प्रशासन;
- कुशल और शिक्षित श्रमिक;
- कुशल परिवहन व्यवस्था और संचार तंत्र;
- पानी और बिजली की समुचित आपूर्ति ;
- निवेशकों के अनुकूल;
- कई प्रकार की वनस्पतियों व जीव-जंतुओं की भरमार साथ ही बागवानी वाले कई उत्पाद;
- राज्य में उपलब्ध कई औषधियों वाले पौधे
इन संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई उपाय भी किए है। इसके लिए सरकार ने राज्य में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया है साथ ही राज्य में कई प्रोत्साहन व योजनाएं भी उपलब्ध है।
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