भारत समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत वाला देश है और विश्व में सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। यह क्षेत्रों की सांस्कृतिक और भूगोलीय विविधता पर आधारित 28 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित है। भारत के प्रत्येक राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की एक अद्वितीय जनविद्या, इतिहास, कला और शिल्प, वेशभूषा, उत्सव, भाषा इत्यादि हैं जो विश्व भर से निवेशकों को अनेक अवसर प्रदान करता है। वे खूबसूरत भू-दृश्यों, वन्यजीव और वन, पहाड़िया, पठार, घाटियां, स्मारक, किले, महल, मंदिर आदि जैसे पर्यटकों की रुचि के बहुत से स्थानों से सज्जित है। प्रत्येक राज्य में विशेष निहित विशेषता है (जिसमें खनिज संसाधनों की पर्याप्त पूर्ति और काफी वन संसाधनों से लेकर अच्छी उपजाऊ भूमि की उपलब्धता शामिल है जो कृषि और उद्यान फसलों की किस्मों उगाने के लिए उपयुक्त है।
इन राज्यों में बहुत सी विश्व विख्यात कंपनियां/उद्योग मौजूद हैं जो देश में बड़े निवेशों को प्रोत्साहित करती हैं। वे मुख्यत: लोहा और इस्पात, सीमेंट, वस्त्र, कृषि प्रसंस्करण, खनिज आधारित उद्योग, दवा और औषधि, रसायनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल आदि तक ही सीमित है। विभिनन राज्य सरकारों ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग को अर्थव्यवस्था के एक अभिन्न अंग के रूप में भी चुना है। जिससे बाजार में नई कंपनियों को आकर्षित किया जा सके। सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति अच्छा शासन प्रदान करने के लिए संकल्पित है जो पारदर्शिता, लेन देन की लागत में कमी, सार्वजनिक सेवाओं में कुशलता और नागरिक मूलक सुपुर्दगी को सुनिश्चित करे। अत: सरकार ऐसे उद्योग की वृद्धि को सुकर बनाने और अर्थव्यवस्था के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रयास कर रही है।
सबसे महत्वपूर्ण बात राजय सरकार ने बहुत से नीतिगत उपाय और पहलें की हैं ताकि व्यापार के विपुल अवसर प्रदान किए जा सकें। इस नीतियों में राज्यों में अत्यावश्यक निवेश मूलक पर्यावरण उत्पन्न करने, प्रमुख विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) क्षेत्रों पर जोर देने की अपेक्षा की गई है, इस प्रकार राज्य की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। उदाहरण के लिए राज्य में औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की दृष्टि से औद्योगिक नीति बनाई गई है। जबकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निजी निवेश को लाने और ई-शासन के लिए रूपरेखा का विकास करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नीति बनाई गई है। ऐसी विकासात्मक नीतियों का उद्देश्य राज्यों के निवासियों को रोजगार के अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए समर्थ बनाने की कार्य नीति अपनाना भी है।
तथापि राज्य के लोगों के जीवन स्तर में सुधार के साथ साथ तेजी से औद्योगिकीकरण और संतुलित विकास, मूल संरचना की सुविधाओं को बढ़ावा देने की अत्यधिक आवश्यकता है। मूल संरचना के स्तर को राज्यों में वृद्धि के लिए आवश्यक निर्धारक के रूप में जाना जाता है। कृषि की वृद्धि ग्रामीण मूल संरचना जैसे सिंचाई का फैलाव और स्तर, भूमि विकास, ग्रामीण विद्युतीकरण की सीमा और ग्रामीण सड़कों के फैलाव पर निर्भर है। जबकि गैर कृषि वृद्धि विद्युत ऊर्जा, सड़क और रेल परिवहन, पत्तनों और विमानपत्तनों के साथ साथ दूरसंचार जैसे क्षेत्रों पर निर्भर है। ये सभी सेवाएं उत्पादन द्वारा मौजूदा संसाधनों को बढ़ाती हैं और अधिक निवेश को आकर्षित करने में मदद करती हैं। इसके अलावा यह राज्य सरकारों का दायित्व है कि वे राज्य के औद्योगिक और वाणिज्यिक विकास के लिए अपेक्षित ऐसी महत्वपूर्ण मूल संरचना सुविधाओं को प्रदान करें, उदाहरण के लिए उचित मूल्य पर विद्युत उपलब्ध कराना और इसके स्तर को बढ़ाना।
इस प्रकार देश की आर्थिक वृद्धि और विकास प्रशासनिक ढांचे, कृषि और औद्योगिक आधार, मानव संसाधनों के साथ-साथ सभी राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों की मूल संरचना के नेटवर्क पर अत्यधिक निर्भर है। तदनुसार उनको समय-समय पर बहुत से अवसर और प्रोत्साहन दिए गए हैं ताकि निवेशकों को उसमें निवेश हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। भारत के कुछ प्रमुख राज्य/ संघ शासित प्रदेश जो बड़े निवेश को आकर्षित करते हैं, नीचे दिए गए हैं।