कुल 88,752 वर्ग कि.मी. के भौगोलिक क्षेत्रफल वाला पश्चिम बंगाल भारत के पूर्वी भाग के मध्य में अवस्थित है। इसकी सीमाएं पश्चिम में बिहार व झारखण्ड के साथ, दक्षिण में ओडिशा के साथ और उत्तर में सिक्किम के साथ लगती हैं। यह सामरिक रूप से अवस्थित है व इसकी तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं जैसे कि पूर्व में बंगालदेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर पूर्व में भूटान। पश्चिमी बंगाल की भूमि सीमा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी से उत्तर में शक्तिशाली हिमालय तक 700 कि. मी. लम्बी है।
पश्चिमी बंगाल सांस्कृतिक और जातीय आधार पर भारत का सबसे अधिक भिन्नताओं वाला प्रदेश है। इस राज्य में प्रतिभाशाली और कुशल मानव संसाधनों सहित प्रगतिशील दृष्टिकोण वाले शैक्षिक व प्रौद्योगिकी अभिगम्यता केंद्रों का बड़ा भण्डार है। पश्चिमी बंगाल एक कृषिक प्रदेश होने के कारण, अपनी उपजाऊ भूमि, श्रेष्ठ जलवायु आधारित कृषि क्षेत्र व उत्साही भूमि सुधार कार्यक्रमों के आधार पर कृषि व्यवसाय के लिए अपार संभावनाएं उपलब्ध कराता है। कृषि क्षेत्र में हुआ महत्वपूर्ण विकास राज्य में तेज़ी से औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक आधार उपलब्ध कराता है इनके अलावा, स्थिर राजनैतिक स्थिति, निवेशकों का निष्ठापूर्ण सहयोग, विश्व स्तरीय वित्तीय संस्थापनों की स्थापना और सौहार्द पूर्ण श्रमिक संबंध जैसी अनुकूल परिस्थितियां राज्य के औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए आवश्यक वातावरण शक्ति और विश्वास उपलब्ध कराते हैं।
भारत में अधिकतम विकास करने वालों में चौथे स्थान वाला पश्चिमी बंगाल, देश में दूसरा अधिकतम निवेश प्राप्त करने वाला प्रदेश है। यहां आयरन और स्टील, रसायन, प्लास्टिक, सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनेक निवेश प्राप्त हो रहे हैं। इनमें से सूचना प्रौद्योगिकी और पर्यटन क्षेत्रों में जिनमें रोजगार और निर्यात की बहुत अधिक संभावनाएं हैं, में निवेश की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। इनके अलावा राज्य ने शहरी मूल संरचनाओं, जैसे जल आपूर्ति, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, संपर्कों का पुनर्व्यवस्थापन, अचल संपत्ति इत्यादि के संदर्भ में राज्य ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए हैं। यहां पर व्यवस्थित परिवहन प्रणाली है, प्रतियोगी दरों पर दक्ष व उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा (पावर) और सृदृढ़ दूरसंचार संजाल है।
अत: पश्चिमी बंगाल विशेषकर हावड़ा व कोलकाता में बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश होने के कारण भारत में निवेश के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरा है। हल्दिया दूसरे शैल रसायन (पेट्रो केमिकल) केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। दुर्गापुर का इस्पात नगर और आसनसोल के क्षेत्र फेरो मिश्र धातु केंद्रों के रूप में प्रसिद्ध प्राप्त कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में सामाजिक और आर्थिक समग्र विकास के लिए कई नीतिगत निर्णय लिए गए हैं व प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
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