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केन्द्र में भूमि अधिग्रहण, पुन: स्थापना और पुनर्वास से संबंधित सभी मामले शहरी तथा शहरी क्षेत्रों के लिए समान महत्व के माने जाते हैं। तदनुसार दो अलग अलग मंत्रालय, नामत:, ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय, का गठन किया गया है। वे उपलब्ध भूमि संसाधनों की पूरी संभाव्यता के दोहन तथा उनके पुन: विखंडन की रोकथाम के सभी प्रयास करते हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत में भूमि अधिग्रहण के विभिन्न पक्षों के साथ, ग्रामीण भारत पर विशेष फोकस सहित पुनर्वास और पुन:स्थापना नीति के विषय में कार्य करने वाला मुख्य प्राधिकरण है। इसका लक्ष्य है :- (i) तीव्र और समयबद्ध विकास सुनिश्चित करने के द्वारा ग्रामीण और शहरी अंतराल को कम करना तथा साथ ही विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु बजटीय सहायता प्रदान करना; (ii) बेहतर आर्थिक अवसरों पर वृद्धि के लिए ग्रामीण मूल संरचना का सृजन; (iii) आजीविका के बेहतर अवसरों के लिए भूमि की समाप्त हो चुकी या खो चुकी उत्पादकता को वापस लाना, जो कार्य समेकित जलागम विकास कार्यक्रमों के माध्यम से भूमिहीन निर्धन व्यक्तियों को भूमि प्रदान करने के लिए प्रभावी भूमि सुधार उपायों की पहल करना; (iv) भूमि अधिग्रहण पर केन्द्रीय विधान लागू करना अर्थात, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (v) संपत्ति / भूमि के अधिग्रहण / मांग के विषय में लागू किसी विषय को शामिल करते हुए राज्य संबंधी सभी वैधानिक प्रस्तावों की जांच करना; आदि।
इस मंत्रालय के तीन विभाग हैं, नामत:-
- ग्रामीण विकास विभाग स्वरोजगार उत्पादन और पारिश्रमिक रोजगार को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदान करने, ग्रामीण निर्धनों को आवास तथा लघु सिंचाई की परिसंपत्तियां प्रदान करना, ग्रामीण संयोजकता आदि से संबंधित मामलों पर कार्य करता है। यह सेवाओं को समर्थन और गुणवत्ता निवेश जैसे कि डीआरडीए प्रशासन, पंचायती राज संस्थानों को सुदृढ़ बनाने के लिए सहायता जैसे अन्य गुणात्मक निवेश, प्रशिक्षण और अनुसंधान, मानव संसाधन, विकास, स्वैच्छिक गतिविधि का विकास आदि इसकी योजनाओं और कार्यक्रमों के उचित कार्यान्वयन के लिए अनिवार्य है। विभाग के प्रमुख कार्यक्रम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), ग्रामीण आवास (इंदिरा आवास योजना), संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई) और स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई) हैं।
- भूमि संसाधन विभाग भूमि संसाधन प्रबंधन के लिए भारत में एक नोडल अभिकरण के रूप में कार्य करना। इन सभी भूमि आधारित विकास कार्यक्रमों की निगरानी और देश में व्यर्थ पड़ी भूमि को विकसित करने के द्वारा बायोमास उत्पादन में वृद्धि करना है। यह सहायक सेवाएं और अन्य गुणवत्तापूर्व विशेषताएं प्रदान करता है जैसे कि भूमि सुधार, राजस्व प्रणाली को बेहतर बनाना और भूमि का अभिलेख रखना। यह रेगिस्तानी इलाकों के अलावा देश के सूखे के प्रति संवेदनशील प्रयोजनाओं में भी विकास कार्य करता है। यह मुख्यत: भूमि के अधिग्रहण से संबंधित भूमि अधिग्रहण अधिनियम और भूमि के अधिग्रहण से संबंधित मामलों का प्रशासन करता है। विभाग के प्रमुख कार्यक्रम जैसे कि सूखा संवेदनशील कार्यक्रम (डीपीएपी), रेगिस्तान विकास कार्यक्रम (डीडीपी), समेकित अपशिष्ट जल विकास कार्यक्रम (आईडब्ल्यूडीपी), भूमि सुधार (एलआर), जैव ईंधन पर राष्ट्रीय मिशन आदि हैं। विभाग में ''भूमि सुधार'' प्रभाग है जो मुख्यत: भूमि के सुधार से संबंधित निगरानी कार्यक्रमों के लिए उत्तरदायी है और यह भूमि / संपत्तियों के अधिग्रहण तथा मांग के साथ संबंधित है।
- पेयजल आपूर्ति विभाग यह पेय जल आपूर्ति के प्रावधान और ग्रामीण निर्धनों को सीवेज, निकासी और स्वच्छता के विस्तार कार्यक्रम देना चाहता है। इसके प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है स्व जल धारा, त्वरित ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम (एआरडब्ल्यूएसपी), संपूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी) आदि।
इसके अलावा लोक कार्यक्रम और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास परिषद (कपार्ट), की स्थापना 1986 में मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त शासी संगठन के रूप में की गई थी, ताकि यह ग्रामीण समृद्धि को बढ़ाने के लिए परियोजनाओं के कार्यान्वयन के प्रति स्वैच्छिक गतिविधि को प्रोत्साहन दे सके और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सके।
जबकि शहरी विकास मंत्रालय शहरी क्षेत्रों में भूमि से संबंधित मामलों के लिए एक अन्य मुख्य प्राधिकरण है। यह शहरी भूमि (उच्चतम सीमा और विनियमन),अधिनियम, 1976 तथा शहरी भूमि (उच्चतम सीमा और विनियमन) निरसन अधिनियम, 1999. का प्रशासन करता है। इसे शहरी विकास, शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता के क्षेत्रों में व्यापक नीति निर्धारण तथा कार्यक्रमों की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है। इसके संलग्न कार्यालय हैं:-
- केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) - केन्द्र सरकार के सभी भवनों और परियोजनाओं के निर्माण एवं रखखाव के लिए भारत सरकार का प्रधान अभिकरण है, जिसमें रेलवे, रक्षा, संचार, परमाणु ऊर्जा, हवाई अड्डे और ऑल इंडिया रेडियो शामिल नहीं है। यह आवास और कार्यालय स्थल तथा संकुलों, अस्पतालों, कार्यशालाओं तथा कारखाना, छात्रावासों तथा होटलों, अनाज भण्डारण की संरचनाओं, सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों, सेतु तथा उपरि सेतु, हवाई अड्डों, कम्प्यूटर केन्द्रों, पर्यावरण संबंधी एवं अन्य जनोपयोगिता सेवाओं के लिए कार्य करता है।
- मुद्रण निदेशालय - यह भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों / विभागों के सभी मुद्रण कार्यों का निष्पादन करता है।
- संपदा निदेशालय - भारत सरकार के विभिन्न संगठनों तथा दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई तथा शिमला, चंडीगढ़, गाजियाबाद, फरीदाबाद और नागपुर जैसे अन्य पांच शहरों में सरकारी कर्मचारियों की आवासीय सुविधा के लिए भवनों तथा कार्यालय भवनों के प्रशासन और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी हैं।
- भूमि और विकास कार्यालय - यह भारत सरकार के लिए भूमि संपदाओं के प्रशासन के साथ पट्टा, बिक्री, बंधक, प्रतिस्थापन, उत्परिवर्तन आदि के लिए उत्तरदायी है। इसकी प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं;(i) इसके प्रभार के तहत सभी संपत्तियों और भूमि खण्डों के अभिलेखों का रखरखाव (ii) विभिन्न सरकार / अर्ध सरकारी विभागों और विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक, सहायतार्थ, शैक्षिक तथा धार्मिक संस्थानों को सरकार के निर्देशानुसार भूमि का आबंटन; (iii) इसके प्रभार में स्थित रिक्त और निर्मित संपत्तियों की नीलामी; (iv) उक्त संपत्ति पर पट्टा प्रभार, भूमि किराया, क्षति आदि की वसूली; (v) पट्टाधारित भूमि को पूर्ण स्वामित्व की आवासीय संपत्तियों में रूपांतरित करना; आदि।
इसके अलावा शहर की योजना, क्षेत्रीय योजना और शहरी विकास के साथ महानगर योजना, मानवीय स्थापना नीतियों आदि के मामले में शहरी विकास मंत्रालय की तकनीकी शाखा शहर तथा देश योजना संगठन (टीसीपीओ) है। यह राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों को इन मामलों में सहायता तथा परामर्श देता है।
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