भूमि सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जिस पर सभी मानवीय गतिविधियां आधारित हैं। संपत्ति का अधिग्रहण और मांग भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची द्वारा समवर्ती सूची में सूचीबद्ध विषय है। ऐसे अनेक स्थानीय और विशिष्ट कानून है, जो भूमि के अधिग्रहण के लिए हैं, किन्तु मुख्य कानून जो भूमि के अधिग्रहण से संबंध रखता है वह भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 है। ग्रामीण विकास मंत्रालय केन्द्रीय सरकार का नोडल मंत्रालय है, जो भूमि अधिग्रहण पर केन्द्रीय विधान का प्रशासन करता है।
शहरी विकास मंत्रालय नोडल मंत्रालय है जो शहरी भूमि (उच्चतम सीमा और विनियमन) अधिनियम, 1976 तथा शहरी भूमि (उच्चतम सीमा और विनियमन) निरसन अधिनियम, 1999 का प्रशासन करता है। राज्यों में शहरी संपदाओं के समग्र विकास के लिए अनेक शहरी विकास प्राधिकरण होते हैं। साथ ही ऐसे विभिन्न विभाग है जो भूमि अधिग्रहण, आवास, मूल संरचना, शहर की योजना आदि के लिए मामले निपटाते हैं, जैसे कि ग्रामीण विकास विभाग, योजना विभाग, भूमि विभाग आदि।
भारत सरकार द्वारा अधिकतम संभव सीमा तक बड़े स्तर के विस्थापनों को न्यूनतम करने की और जहां विस्थापन अनिवार्य है, वहां परियोजना से प्रभावित परिवारों की पुन: स्थापना और पुनर्वास के मुद्दों को अत्यंत सावधानी तथा दूरदर्शता से निपटाने की आवश्यकता को पहचाना गया है। तदनुसार भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए पुन: स्थापना तथा पुनर्वास की राष्ट्रीय नीति, 2003 निर्धारित की है, जिसके स्थान पर अब राष्ट्रीय पुनर्वास तथा पुन: स्थापना नीति, 2007 कार्यरत हैं।
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