मानव जाति द्वारा दैनिक आधार पर अनेक गतिविधियां की जाती है, जिनसे पर्यावरण को कुल मिलाकर तथा विशेष रूप से देश के भूमि संसाधन आधार को गंभीर क्षतियां होती है। इन गतिविधियों में आवासीय तथा कार्यालय भवनों का निर्माण, सड़कों, राजमार्गों, कुल आदि का निर्माण, सामाजिक मूल संरचनाओं का सृजन जैसे कि विद्यालय, अस्पताल आदि शामिल है। जबकि इन सभी गतिविधियों का हमारी अर्थव्यवस्था की सशक्त वृद्धि में अत्यंत महत्व है, ये सभी जगह के लिए पेड़ों को काटने, जल निकायों के नाश आदि की अनिवार्यत: उत्पन्न करते हैं, जिससे मिट्टी का क्षरण और भूमि का विघटन होता है। इस प्रकार यह कहना सही है कि वैश्वीकरण और शहरी करण को देखते हुए लोग इनकी पूरी तरह से उपयोगिता न करते हुए उपलब्ध भूमि संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं और इसके परिणाम स्वरूप उत्पादक भूमि की कमी होती है।
दूसरा कारण है भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिनियमों तथा नियमों के उचित कार्यान्वयन की कमी और साथ ही सही समय पर संबंधित विभाग / मंत्रालय / संगठन से संपर्क करने में कठिनाई, क्योंकि अर्जित भूमि का अधिग्रहण कठिन हो जाता है। पुन:, दिए गए आबादी के घनत्व और देश में भूमि उपयोग के प्रकार को देखते हुए भारत में भूमि अधिग्रहण की अधिक समस्या है। इस प्रकार केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारों के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि भूमिहीन ग्रामीण निर्धनों तथा विदेशी निवेशकों / अनिवासी भारतीयों सहित बड़े स्तर पर लोगों को भूमि की अधिक पहुंच कैसे प्रदान की जाए।
विशाल औद्योगिक परियोजनाओं, बांधों, कारखानों, रिफाइनरी आदि की स्थापना के लिए अधिक से अधिक भूमि का उपयोग किया जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप लोगों / यहां रहने वाले समुदाय को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वे अपने आवासीय स्थान छोड़ कर अन्य स्थानों पर जाने के लिए मजबूर हैं। पहले, लोगों को रहने के लिए उचित स्थान की खोज में समस्या है। दूसरा, औद्योगिक तथा संबंधित परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में पर्याप्त मुआवज़े के मुद्दे पर प्रकाश डाला जाता है, जिसे जीवन स्तर की सुरक्षा में विस्थापित लोगों की देने की आवश्यकता है। यह भूमि अधिग्रहण और पुन: स्थापना की एक सामान्य समस्या है।
पुन: उपलब्ध भूमि की खो चुकी उत्पादकता के पुनर्वास की आवश्यकता है, ताकि उन्हें कृषि, औद्योगिक, आवासीय, कार्यालय भवन आदि जैसे विभिन्न प्रयोजनों के लिए प्रभावी रूप से उपयोग में लाया जा सके, क्योंकि भूमि एक अल्प संसाधन है। सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए विभिन्न नीतियां और योजनाएं भी चलाई जाती हैं। साथ ही भूमि पर उर्वरक क्षमता को वापस लाने के प्रयास किए जाते हैं और विस्थापित व्यक्तियों को आवास भी प्रदान किया जाता है साथ ही ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती है ताकि भूमि संसाधनों पर फोकस किया जा सके, जिनका अब तक दोहन और उपयोग नहीं किया गया है।
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