भूमि अधिग्रहण, पुन: स्थापना और पुनर्वास में शामिल विभिन्न मुद्दों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय और राज्य / संघ राज्य क्षेत्र सरकारों द्वारा समय समय पर अनेक कदम उठाए जाते हैं, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र विकास को प्रोत्साहन दिया जा सके।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन '
भूमि संसाधन विकास' नामक एक पृथक विभाग गठित किया गया है ताकि बंजर भूमि और विखंडित भूखण्डों केविकास की गति को तेज किया जा सके। देश में बंजर भूमि को दोबारा उपयोग में लाने की गतिविधियों के उचित कार्यान्वयन के लिए '
बंजर भूमि एटलस' तैयार किया गया है, जिससे गांव तथा सूक्ष्म जलागम स्तर तक बंजर भूमि के मानचित्रण / पहचान और उनके स्थान पर पता लगाया जा सकता है। भूमि के आगे विखंडन की रोकथाम के लिए अनेक अध्ययन, कार्यक्रम और योजनाएं भी चलाई जाती हैं।
क्षमता निर्माण को बेहतर भूमि संसाधन प्रबंधन प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया है। यह एक निरंतर प्रक्रिया है जो पदाधिकारियों को उनके ज्ञान, कौशल एवं मनोवृत्तियों को उन्नत बनाने में सहायता देती है, ताकि वे अपनी भूमिका और दायित्व के निष्पादन में अधिक प्रभावी बन सके। इसके साथ केन्द्र और राज्य में ग्राम पंचायत, माध्यमिक पंचायत और जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थानों का दायित्व ऐसे प्रभावी कदम उठाने का है ताकि देश में भूमि / संपत्तियों की सुरक्षा की जा सके और उनके स्तर पर नियमों, अधिनियमों तथा नीतियों का उचित कार्यान्वयन किया जा सके। गैर सरकार संगठनों की भूमिका को क्षमता निर्माण तथा कार्यान्वयन के लिए कम नहीं आंका जाना चाहिए।
भूमि संसाधन विभाग में 'भूमि सुधार प्रभाग' परियोजना से प्रभावित व्यक्तियों या परिवारों के 'पुन: स्थापना और पुनर्वास' पर नीति / विधान को निर्धारित करने के लिए नोडल अभिकरण के रूप में कार्य करता है। यहां उनके विस्थापन से पहले पुनर्वास के सिद्धांतों को विकसित करने के कदम उठाए जाते हैं और यदि संभव हुआ तो मुआवज़े के रूप में भूमि के स्थान पर भूमि दी जाती है। यहां सभी प्रभावित परिवारों के साथ भूमि हीन परिवारों को भी आवास के लाभ एवं पुन: स्थापना क्षेत्रों में अनिवार्य मूल संरचना सुविधाएं प्रदान करने का प्रावधान भी शामिल हैं।
पुन: शहरी विकास मंत्रालय द्वारा उचित आवास और मूल संरचना सुविधाओं को तैयार करने के पर्याप्त प्रयास भी किए जाते हैं ताकि भूमि अधिग्रहण और पुन: स्थापना की समस्या को सुलझाया जा सके। सार्वजनिक क्षेत्र के साथ यह निजी क्षेत्र की जिम्मेदारी भी है कि वे भूमि के मामलों पर विचार करें। यदि किसी उद्योग द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तब सरकार को एक नोडल अभिकरण के रूप में कार्य करना चाहिए और इस प्रयोजन के लिए स्थूल मार्गदर्शीय सिद्धांत तय करने चाहिए। भूमि / संपत्ति के मामलों में सार्वजनिक - निजी भागीदारी को प्रोत्साहन देने का यह एक अच्छा मामला हो सकता है।