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लाभवंचित और साधनहीन वर्गों से संबंधित कानून :
बंधुआ श्रम व्‍यवस्‍था (उन्‍मूलन) अधिनियम, 1976
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बंधुआ मज़दूरी प्रथा (उन्‍मूलन) अधिनियम, 1976 बंधुआ मज़दूरी की प्रथा उन्‍मूलन हेतु अधिनियमित किया गया था ताकि जनसंख्‍या के कमज़ोर वर्गों के आर्थिक और वास्‍तविक शोषण को रोका जा सके और उनसे जुड़े एवं अनुषंगी मामलों के संबंध में कार्रवाई की जा सके। इसने सभी बंधुआ मज़दूरों को एकपक्षीय रूप से बंधन से मुक्‍त कर दिया और साथ ही उनके कर्जो को भी परिसमप्‍त कर दिया। इसने बंधुआ प्रथा को कानून द्वारा दण्‍डनीय संज्ञेय अपराध माना।

यह कानून श्रम मंत्रालय और संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा प्रशासित और कार्यान्वित किया जा रहा है। राज्‍य सरकारों के प्रयासों की अनुपूर्ति करने के लिए मंत्रालय द्वारा बंधुआ मज़दूरों के पुनर्वास की एक केन्‍द्रीय प्रायोजित योजना स्‍कीम शुरू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत, राज्‍य सरकारों को बंधुआ मज़दूरों के पुनर्वास के लिए समतुल्‍य अनुदानों (50:50) के आधार पर केन्‍द्रीय सहायता मुहैया कराई जाती है।

अधिनियम के मुख्‍य प्रावधान इस प्रकार हैं:-

  • बंधुआ मजदूर प्रणाली को समाप्‍त किया जाए और प्रत्‍येक बंधुआ मजदूर को मुक्‍त किया जाए तथा बंधुआ मजदूरीकी किसी बाध्‍यता से मुक्‍त किया जाए।


  • ऐसी कोई भी रीति-रिवाज़ करार या कोई अन्‍य लिखत जिसके कारण किसी व्‍यक्ति को बंधुआ मज़दूरी जैसी कोई सेवा प्रदान करनी होती थी, अब निरस्‍त कर दिया गया है।


  • इस अधिनियम के लागू होने से एकदम पहले कोई बंधुआ ऋण या ऐसे बंधुआ ऋण के किसी हिस्‍से का भुगतान करने की बंधुआ मज़दूर की हरेक देनदारी समाप्‍त हो गई मान ली जाएगी।


  • किसी भी बंधुआ मज़दूर की समस्‍त सम्‍पत्ति जो इस अधिनियम के लागू होने से एकदम पूर्व किसी गिरवी प्रभार, ग्रहणाधिकार या बंधुआ ऋण के संबंध में किसी अन्‍य रूप में भारग्रस्‍त हो, जहां तक बंधुआ ऋण से सम्‍बद्ध है, मुक्‍त मानी जाएगी और ऐसी गिरवी, प्रभार, प्रभार, ग्रहणाधिकार या अन्‍य बोझ से मुक्‍त हो जाएगी।


  • इस अधिनियम के अंतर्गत कोई बंधुआ मज़दूरी करने की मज़बूरी से स्‍वतंत्र और मुक्‍त किए गए किसी भी व्‍यक्ति को उसके घर या अन्‍य आवासीय परिसर जिसमें वह रह रहा/रही हो, बेदखल नहीं किया जाएगा।


  • कोई भी उधारदाता किसी बंधुआ ऋण के प्रति कोई अदायगी स्‍वीकृत नहीं करेगा जो इस अधिनियम के प्रावधानों के कारण समाप्‍त हो गया हो या समाप्‍त मान लिया गया हो या पूर्ण शोधन मान लिया गया हो।


  • राज्‍य सरकार जिला मजिस्‍ट्रेट को ऐसी शक्तियां प्रदान कर सकती है और ऐसे कर्तव्‍य अधिरोपित कर सकती है जो यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हो कि इस अधिनियम के प्रावधानों का उचित अनुपालन हो।


  • इस प्रकार प्राधिकृत जिला मजिस्‍ट्रेट और उसके द्वारा विनिर्दिष्‍ट अधिकारी ऐसे बंधुआ मज़दूरों के आर्थिक हितों की सुरक्षा और संरक्षण करके मुक्‍त हुए बंधुआ मज़दूरों के कल्‍याण का संवर्धन करेंगे।


  • प्रत्‍येक राज्‍य सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना के ज़रिए प्रत्‍येक जिले और प्रत्‍येक उपमण्‍डल में इतनी सतर्कता समितियां, जिनहें वह उपयुक्‍त समझे, गठित करेगी।
  • प्रत्‍येक सतर्कता समिति के कार्य इस प्रकार है :-

    • इस अधिनियम के प्रावधानों और उनके तहत बनाए गए किसी नियम को उपयुक्‍त ढंग से कार्यान्वित करना सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों और कार्रवाई के संबंध में जिला मजिस्‍ट्रेट या उसके द्वारा विनिर्दिष्‍ट अधिकारी को सलाह देना;


    • मुक्‍त हुए बंधुआ मज़दूरों के आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास की व्‍यवस्‍था करना;


    • मुक्‍त हुए बंधुआ मज़दूरों को पर्याप्‍त ऋण सुविधा उपलब्‍ध कराने की दृष्टि से ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के कार्य को समन्वित करना;


    • उन अपराधों की संख्‍या पर नज़र रखना जिसका संज्ञान इस अधिनियम के तहत किया गया है;


    • एक सर्वेक्षण करना ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्‍या इस अधिनियम के तहत कोई अपराध किया गया है;


    • किसी बंधुआ ऋण की पूरी या आंशिक राशि अथवा कोई अन्‍य ऋण, जिसके बारे में ऐसे व्‍यक्ति द्वारा बंधुआ ऋण होने का दावा किया गया हो, की वसूली के लिए मुक्‍त हुए बंधुआ मज़दूर या उसके परिवार के किसी सदस्‍य या उस पर आश्रित किसी अन्‍य व्‍यक्ति पर किए गए मुकदमे में प्रतिवाद करना।

  • इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के बाद, कोई व्‍यक्ति यदि किसी को बंधुआ मज़दूरी करने के लिए विवरण करता है तो उसे कारावास और जुर्माने का दण्‍ड भुगतान होगा। इसी प्रकार, यदि कोई बंधुआ ऋण अग्रिम में देता है, वह भी दण्‍ड का भागी होगा।


  • अधिनियम के तहत प्रत्‍येक अपराध संज्ञेय और ज़मानती है और ऐसे अपराधों पर अदालती कार्रवाई के लिए कार्रवाई मजिस्‍ट्रेट को न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट की शक्तियां दिया जाना ज़रूरी होगा।

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