| कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 में कामगारों और उनके आश्रितों को रोज़गार के दौरान और उसी के कारण लगी चोट और दुर्घटना (कुछ व्यावसायिक बीमारियों सहित) तथा जिसकी परिणति विकलांगता या मृत्यु में हुई हो, में क्षतिपूर्ति की अदायगी का प्रावधान है। यह अधिनियम रेल कर्मचारियों और अधिनियम की अनुसूची में यथानिर्दिष्ट ऐसे कार्यों में लगे लोगों पर लागू होता है। अनुसूची में कारखानों, खानों, बागानों, मशीन चालित वाहनों, निर्माण कार्यों और कुछ अन्य खतरनाक व्यवसायों में लगे लोग शामिल हैं।
अदा की जाने वाली क्षतिपूर्ति की राशि चोट के स्वरूप और कामगार की औसत मासिक मजदूरी और आयु पर निर्भर करती है। मृत्यु (ऐसे मामले में यह कामगार के आश्रितों को अदा किया जाता है) और विकलांगता के लिए क्षतिपूर्ति की न्यूनतम और अधिकतम दरें नियत की गई हैं और समय-समय पर संशोधन के अध्यधीन होती है।
श्रम और रोज़गार मंत्रालय के अधीन एक सामाजिक सुरक्षा प्रभाग स्थापित किया गया है जो कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा नीति बनाने और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के कार्यान्वयन के काम से जुड़ा है। यह इस अधिनियम के प्रवर्तन के लिए भी जिम्मेदार है। यह अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा कामगार क्षतिपूर्ति आयुक्तों के ज़रिए प्रशासित किया जाता है।
इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस प्रकार है:-
- नियोक्ता को क्षतिपूर्ति अदा करनी होगी:- (i) यदि कामगार को रोज़गार के कारण और उसके दौरान हुई दुर्घटना से व्यक्तिगत चोट लगी हो; (ii) यदि किसी रोज़गार में लगे कामगार के अधिनियम में निर्दिष्ट उसी रोज़गार के लिए विशेष व्यावसायिक बीमारी के रूप में कोई बीमारी हो गई हो।
- तथापि, नियोक्ता को निम्नलिखित मामलों में क्षतिपूर्ति की अदायगी नहीं करना होगी:-
- यदि चोट के परिणामस्वरूप कामगार को हुई सम्पूर्ण या आंशिक विकलांगता तीन दिन से अधिक की अवधि के लिए नहीं होती।
- यदि चोट जिसके कारण मृत्यु या स्थायी सम्पूर्ण विकलांगता नहीं होती, का कारण ऐसी दुर्घटना हो जो इस वजह से हुई हो :- (i) कामगार पर दुर्घटना के समय शराब या नशीले पदार्थों का असर था; अथवा (ii) कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ स्पष्ट रूप से दिए गए आदेश या स्पष्ट रूप से बनाए गए नियम का जानबूझ कर उल्लंघन; अथवा (iii) कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ मुहैया कराए गए किसी सुरक्षा कवच या उपकरण को कामगार द्वारा जानबूझकर हटा दिया जाना या अनदेखी करना।
- राज्य सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करके, अधिसूचना में यथानिर्दिष्ट ऐसे क्षेत्र के लिए कामगार क्षतिपूर्ति आयुक्त के रूप में किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है। कोई भी, आयुक्त इस अधिनियम के तहत उसे सौंपे गए किसी मामले पर निर्णय के प्रयोजनार्थ एक या अधिक व्यक्तियों का चयन कर सकता है जिन्हें जांच प्रक्रिया में उसकी मदद करने के लिए जांचा धीन मामलों से संबंधित किसी मामले की विशेष जानकारी हो।
- क्षतिपूर्ति की अदायगी निर्धारित समय पर की जाएगी। ऐसे मामलों में जहां नियोक्ता दावा की गई सीमा तक प्रतिपूर्ति की देनदारी स्वीकार नहीं करता, वहां वह देनदारी की उस सीमा जो स्वीकारता है, पर आधारित अनन्तिम भुगतान करने के लिए बाध्य होगा और ऐसी अदायगी आयुक्त के पास जमा की जाएगी या कामगार को अदा की जाएगी, जैसा मामला हो,
- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत किन्हीं कार्यवाहियों के दौरान क्षतिपूर्ति की अदायगी करने के लिए किसी व्यक्ति की देनदारी के बारे में (इस प्रश्न सहित कि क्या चोट ग्रस्त व्यक्ति कामगार है या नहीं) अथवा क्षतिपूर्ति की राशि या अवधि के बारे में (विकलांगता के स्वरूप और सीमा के प्रश्न सहित) ऐसा प्रश्न उठता है तो ऐसे प्रश्न को किसी सहमति के अभाव, आयुक्त द्वारा तय किया जाएगा। ऐसे किसी प्रश्न को तय करने, निर्णय करने या उस पर कार्रवाई करने का न्यायाधिकार अथवा इस अधिनियम के तहत उपगत किसी देनदारी को प्रवर्तित करने के लिए किसी सिविल न्यायालय के पास नहीं है जिसके बारे में आयुक्त को ही तय करना, निर्णय या उस पर कार्रवाई की जानी होगी।
- राज्य सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करके यह निदेश दे सकती है कि कामगारों को काम में लगाने वाला प्रत्येक व्यक्ति अथवा ऐसे व्यक्तियों को कोई विनिर्दिष्ट श्रेणी, अधिसूचना में निर्दिष्ट किए गए समय पर और ऐसे रूप में तथा ऐसे प्राधिकरण को एक वास्तविक विवरण प्रस्तुत करे जिसमें उन चोटों की संख्या का उल्लेख हो जिनके संबंध में गत वर्ष नियोक्ता द्वारा क्षतिपूर्ति की अदायगी की गई हो था ऐसी क्षतिपूर्ति की राशि के उल्लेख के साथ क्षतिपूर्ति संबंधी अन्य ब्यौरा भी हो जैसा कि राज्य सरकार निदेश करे।
- यदि कोई, यथापेक्षित नोटिसबुक नहीं बनाकर रखता; अथवा आयुक्त को यथापेक्षित रिपोर्ट नहीं भेजा; अथवा यथापेक्षित विवरणी प्रस्तुत नहीं करता, उस व्यक्ति पर जुर्माना लगया जा सकता है।
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