| कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (ईएसआई अधिनियम) में बीमारी, प्रसव और रोजगार के दौरान लगी चोट के मामले में स्वास्थ्य देख रेख तथा नकद लाभ के भुगतान का प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम ऐसे सभी गैर मौसमी फैक्टरियों पर, जो विद्युत से चलाई जाती है और जहां 10 या अधिक व्यक्तियों को काम में लगाया जाता है तथा ऐसी फैक्टरियों पर लागू होता है जो बिना बिजली के चलाई जाती हैं और जहां 20 या अधिक व्यक्ति काम करते हैं। उपयुक्त सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करके इस अधिनियम के प्रावधान किसी अन्य स्थापना या स्थापना की श्रेणी, औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि या किसी अन्य श्रेणी पर भी लागू कर सकती है।
अधिनियम के अंतर्गत, नकद लाभ कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के जरिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रशासित किए जाते है; जबकि राज्य सरकारें और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन चिकित्सीय देख रेख का प्रशासन देखती हैं।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) देश की अग्रणी सामाजिक सुरक्षा संगठन हैं। यह ईएसआई अधिनियम के तहत सबसे बड़ा नीति-निर्माता और निर्णय लेने वाला प्राधिकरण है और इस अधिनियम के तहत ईएसआई योजना के कार्यकरण को देखता है। निगम में केन्द्र और राज्य सरकारों, नियोक्ताओं, कर्मचारियों, संसद और चिकित्सीय व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य शामिल हैं। केन्द्रीय श्रम मंत्री निगम के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। निगम के सदस्यों में से ही बनाई गई एक स्थायी समिति योजना के प्रशासन के लिए कार्यकारी निकाय के रूप में कार्य करती है।
अधिनियम के मूल प्रावधान इस प्रकार है :-
- प्रत्येक फैक्टरी या स्थापना जिस पर यह अधिनियम लागू होता है, पंजीकरण इस संबंध में बनाए गए विनियमों में विनिर्दिष्ट समय में और तरीके के अनुसार किया जाना चाहिए।
- इसमें समेकित आवश्यकता आधारित सामाजिक बीमा योजना की व्यवस्था की गई जो बीमारी, प्रसव, अस्थायी या स्थायी शारीरिक अपगंता, रोजगार के दौरान लगी चोट के कारण मृत्यु जिससे मजदूरी या अर्जन क्षमता खत्म हो जाए, जैली स्थितियों में कामगारों के हितों की रक्षा हो सके।
- इसमें छह सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए गए हैं :-
- चिकित्सीय लाभ
- बीमारी लाभ (एस बी)
- मातृत्व लाभ (एम बी)
- अपंगता लाभ
- आश्रित का लाभ (डी बी)
- अंत्येष्टि व्यय
- केन्द्र सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करके इस अधिनियम के प्रवधानों के अनुसार कर्मचारी राज्य बीमा योजना के प्रशासन के लिए '' कर्मचारी राज्य बीमा निगम'' नामक निगम स्थापित कर सकती है।
- इस अधिनियम में निर्दिष्ट लाभों के अतिरिक्त, निगम बीमित व्यक्तियों के स्वास्थ्य सुधार और कल्याण हेतु तथा ऐसे बीमित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं पुन:रोजगार के उपायों को बढ़ावा दे सकता है, जो अपंग या घायल हो गए हों और इन उपायों के संबंध में निगम की निधियों से ऐसी सीमाओं में व्यय कर सकती है जैसी कि केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाए।
- इस अधिनियम के तहत कर्मचारी के संबंध में अंशदान में नियोक्ता द्वारा देय अंशदान और कर्मचारी द्वारा देय अंशदान शामिल होगा और निगम को देय होगा। अंशदान ऐसी दरों पर अदा किए जाएंगे जो केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
- इस अधिनियम के तहत किए गए समस्त अंशदान और निगम की ओर से प्राप्त अन्य सभी धनराशियां कर्मचारी राज्य बीमा निधि नामक निधि में जमा की जाएगी जिसे इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ निगम द्वारा धारित और प्रशासित किया जाएगा।
- ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम के तहत भुगतान या लाभ में वृद्धि करवाने के प्रयोजन से, या इस अधिनियम के तहत जहां कोई भुगतान या लाभ प्राधिकृत नहीं है, वहां कोई भुगतान या लाभ प्राप्त करने के प्रयोजन से, या इस अधिनियम के तहत स्वयं उसके द्वारा किए जाने वाले भुगतान से बचने या किसी और व्यक्ति को भुगतान से बचाने के प्रयोजन से जानबूझ कर गलत बयान या गलत आवेदन करता है, उस कारावास या जुर्माने या दोनों की सज़ा दी जा सकती है।
- यदि इस अधिनियम के तहत अपराध करने वाली कोई कम्पनी हैं, तो ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के समय कम्पनी का प्रभारी था और कम्पनी के कारोबार संचालन के लिए जिम्मेदार था, वह और कम्पनी भी अपराध की श्रेणी होगी और उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है और तदनुसार दण्डित की जा सकती है।
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