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उपदान भुगतान अधिनियम, 1972
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उपदान से संबंधित अम्‍ब्रैला विधान उपदान का भुगतान अधिनियम, 1972 है। इस अधिनियम का अधिनियम फैक्‍टरियों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेलवे कम्‍पनियों, दुकानों अथवा ऐसे अन्‍य प्रतिष्‍ठानों जिसमें दस अथवा इससे अधिक व्‍यक्ति नियोजित हों, में कार्यरत कर्मचारियों को उपदान का भुगतान करने अथवा उससे संबंधित अथवा प्रासंगिक मामलों के लिए एक योजना की व्‍यवस्‍था करने हेतु किया गया है। उपयुक्त सरकार, अधिसूचना द्वारा और अधिसूचना में विनिर्दिष्‍ट शर्तों के अधीन, किसी भी प्रतिष्‍ठान को, जिस पर यह अधिनियम लागू होता है, अथवा उसमें नियोजित किसी कर्मचारी अथवा कर्मचारी वर्ग को गए अधिनियम के उपबंधों के परिचालन से छूट दे सकती हैं, यदि उपयुक्‍त सरकार की राय में उस प्रतिष्‍ठान के कर्मचारियों को प्राप्‍त होने वाला उपदान अथवा पेंशन संबंधी लाभ इस अधिनियम के तहत प्रदत्त लाभों से किसी प्रकार से कम न हों।

केन्‍द्र सरकार द्वारा यह अधिनियम निम्‍नलिखित में प्रशासित किया जाता है:- (i) इसके नियंत्रणाधीन प्रतिष्‍ठानों; (ii) ऐसे प्रतिष्‍ठानों, जिनकी एक से अधिक राज्‍यों में शाखाएं हो; और (iii) प्रमुख पत्तनों, खानों, तेल-क्षेत्रों और रेलवे। जबकि अन्‍य सभी मामलों में यह राज्‍य सरकारों और संघ राज्‍य क्षेत्र प्रशासनों द्वारा प्रशासित किया जाता है। उपयुक्‍त सरकार अधिसूचना द्वारा किसी भी अधिकारी को एक नियंत्रण प्राधिकारी नियुक्‍त कर सकती है, जो इस अधिनियम के प्रशासन के लिए जिम्‍मेदार होगा और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नियंत्रण अधिकारी भी नियुक्‍त किए जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्‍त, श्रम मंत्रालय में केन्‍द्रीय औद्योगिक संबंध मशीनरी (सीआईआरएम) है जो इस अधिनियम को लागू करने के लिए जिम्‍मेदार है। उसे मुख्‍य श्रम आयुक्‍त (केन्‍द्रीय) [सीएलसी (सी)] संगठन के नाम से भी जाना जाता है। इसके प्रमुख मुख्‍य क्षेत्र आयुक्‍त (केन्‍द्रीय) है।

अधिनियम के मुख्‍य उपबंध निम्‍नलिखित हैं :-

  • किसी कर्मचारी को उपदान लगातार पांच वर्ष सेवा में बने रहने के बाद उसकी नौकरी इस कारण से समाप्‍त होने पर देय होगा :- (i) उसकी अधिवर्षिता पर; और (ii) उसकी सेवानिवृत्ति अथवा त्‍याग पत्र देने पर; अथवा (iii) किसी दुर्घटना अथवा बीमारी के कारण उसकी मृत्‍यु होने अथवा उसके विकलांग हो जाने पर बशर्ते कि उस मामले में जहां किसी कर्मचारी की सेवा मृत्‍यु अथवा विकलांगता के कारण समाप्‍त होती है, लगातार पांच वर्ष की सेवा पूरी करना जरूरी नहीं होगा।


  • नियोजित किसी कर्मचारी को उस कर्मचारी द्वारा पूरी की गई सेवा के प्रत्‍येक वर्ष अथवा उसके किसी भाग के लिए जो छह माह से अधिक हो, आहरित अन्तिम वेतन दर के आधार पर पन्‍द्रह दिनों के वेतन की दर पर उपदान का भुगतान करेगा।

माह वार वेतन प्राप्‍त करने वाले कर्मचारी के मामले में पन्‍द्रह दिनों के वेतन का हिसाब उसके द्वारा आहरित अन्तिम वेतन की मासिक दर के छब्‍बीस (26) से भाग देकर और भागफल को पन्‍द्रह से गुणा करके लगाया जाएगा। जबकि, कार्यानुसार दर पर वेतन प्राप्‍त करने वाले कर्मचारी (उजरत कर्मचारी) के मामले में दैनिक वेतन का हिसाब उसे कर्मचारी की नौकरी समाप्‍त होने के ठीक तीन महीने पहले की अवधि के लिए उसके द्वारा प्राप्‍त किए गए कुल वेतन के औसत पर लगाया जाएगा और इस प्रयोजनार्थ उन्‍हें अदा किए गए किसी समयोपरि वेतन को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।

  • किसी कर्मचारी को देय उपदान की राशि तीन लाख और पचास हजार रु. से अधिक नहीं होगी।


  • किसी ऐसे कर्मचारी को जिसे उसके विकलांग होने के बाद कम वेतन पर नियुक्‍त किया गया है, देय उपदान का हिसाब लगाने के प्रयोजन से उसके विकलांग होने से पहले की अवधि के वेतन को उसके द्वारा उस अवधि के दौरान प्राप्‍त किए गए वेतन के रूप में शामिल किया जाएगा और उसकी विकलांगता के बाद की अवधि के लिए उसके वेतन को कम वेतन के रूप में शामिल लिया जाएगा।


  • किसी ऐसे कर्मचारी के उपदान की राशि को जिसके किसी कृत्‍य, जानबूझ कर की गई गलती अथवा लापरवाही की वजह से नियोजक की सम्‍पत्ति को कोई क्षति अथवा नुकसान पहुंचा है अथवा नुकसान की मात्रा में जब्‍त कर लिया जाएगा। किसी कर्मचारी को देश उपदान को पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से जब्‍त कर लिया जाएगा :- (i) यदि उस कर्मचारी की सेवाएं उसके उपद्रवों अथवा अव्‍यवस्थित आवरण अथवा उसकी ओर से दुवर्यवहार के आचरण के कारण समाप्‍त की गई हैं; और (ii) उस कर्मचारी की सेवाएं किसी ऐसे आचरण के कारण जिसे नैतिक भ्रष्‍टता का अपराध माना जाता है, समाप्‍त की गई है बशर्तें कि उसने यह अपराध अपनी नौकरी के दौरान किया है।


  • यदि नियोजक द्वारा, इस अधिनियम के तहत देय उपदान की राशि या उसके पात्र व्‍यक्ति को निर्धारित समय के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है तो नियंत्रण प्राधिकारी व्‍यक्ति दु:खी व्‍यक्ति द्वारा इस संबंध में उन्‍हें किए गए आवेदन पर उस राशि के लिए कलेक्‍टर को एक प्रमाण पत्र जारी करेगा जो उस राशि को निर्धारित अवधि की समाप्ति की तारीख से केन्‍द्र सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, यथा विनिर्दिष्‍ट दर पर उस राशि पर चक्रवृद्धि ब्‍याज सहित भू-राजस्‍व की बकाया राशि के तौर पर वसूल करके उसे उसके पात्र व्‍यक्ति को दे देगा।


  • जो कोई व्‍यक्ति इस अधिनियम के तहत उसके द्वारा किए जाने वाले भुगतान से बचने के अथवा अन्‍य भुगतान से बचने के अथवा अन्‍य किसी व्‍यक्ति का इस तरह का भुगतान करने से बचाने में मदद करने के प्रयोजन से जान बूझकर झूठा बयान देता है अथवा झूठा अभ्‍यावेदन करता है अथवा ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है तो उसे कारावास का दण्‍ड दिया जाएगा अथवा उस पर जुर्माना लगाया जाएगा अथवा दोनों प्रकार के दण्डित किया जाएगा। यदि नियोजक भी इस अधिनियम के किसी उपबंध अथवा उसके तहत बनाए गए किसी नियम अ‍थवा आदेश का उल्‍लंघन करता है अथवा उसका अनुपालन करने में चूक करता है तो उसे कारावास का दण्‍ड दिया जाएगा अथवा उस पर जुर्माना लगाया जाएगा अथवा दोनों प्रकार के दण्डित किया जाएगा।

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