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जनशक्ति:
मजदूरी संबंधी कानून
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Business मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936
Business न्‍यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948
Business बोनस भुगतान अधिनियम, 1965
कम्‍पनी को व्‍यवसाय की स्‍थापना करने के समग्र लक्ष्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए एकीकृत तरीके से अपनी मजदूरी और वेतन नीति तैयार करना है। यह इसलिए कि परिलब्धि वाली मजदूरी संरचना संगठन को स्‍वास्‍थ, सक्षम और समर्पित कार्य बल प्राप्‍त करने और अपने पास रखने में सहायता करता है जो बदले में इसकी उत्‍पादकता और लाभदायकता को प्रभावित करते हैं। ऐसी मजूदरी नीति अधिनियम उद्यम में अपना अधिकतम मूल्‍य का योगदान करने में कर्मचारियों को अभिप्रेरित करने की प्रबल ताकत हैं।

मजदूरी का अभिप्राय सभी परिलब्धि से है (चाहे वेतन, भत्ते या अन्‍यथा द्वारा) जिसे रुपए के अर्थ में लिया व्‍यक्‍त किया जाता है जो (यदि रोजगार के निबंधन, व्‍यक्‍त या आशयित, पूरे किए जाते हैं) व्‍यक्ति को भुगतान योग्‍य होता है जो अपने रोजगार के संबंध में या ऐसे रोजगार में किए गए कार्य के संबंध में नियुक्‍त किया जाता है। इसमें निम्‍नलिखित शामिल हैं :- (i) किसी प्रकार की उप‍लब्धि, जो पक्षों के बीच दिए जाने वाले बंदोबस्‍ती या अदालत के आदेश के अधीन भुगतान योग्‍य होती है; (ii) किसी प्रकार की परिलब्धि, जिसके लिए नियुक्‍त व्‍यक्ति समयोपरि कार्य का अवकाश दिवस या किसी अवकाश अवधि में हकदार होता है; (iii) कोई राशि, जो नियुक्‍त व्‍यक्ति की सेवा समाप्ति के कारण किसी कानून या संविदा या लिखत जो उस राशि के भुगतान के लिए व्‍यवस्‍था करता है, के तहत भुगतान योग्‍य होता है, चाहे इसमें कटौती की जाती है अथवा अन्‍यथा, परन्‍तु समय की व्‍यवस्‍था नहीं करता जिसके भीतर भुगतान किया जाना हैं; (iv) कोई राशि, जिसके नियुक्‍त व्‍यक्ति किसी निर्मित योजना के तहत किसी कानून के अधीन जो उस समय लागू होता है, के अधीन हकदार होता है।

मजदूरी को शासित करने वाले तीन मुख्‍य विधान हैं।

मजदूरी के भुगतान में अतिरिक्‍त एकमुश्‍त आय भी शामिल हैं जो सामान्‍यत: वार्षिक आधार पर अपने कर्मचारियों को संगठन द्वारा प्रदान की जाती है। ऐसी आय बोनस के रूप में जानी जाती है और यह कर्मचारियों को विशेष अवसरों पर प्रदान किया जाता है जैसे त्‍योहार, नया साल और दूसरे महत्‍वपूर्ण उत्‍सवों पर। यह कर्मचारियों को अपने जीवन शैली में सुधार करने के लिए वस्‍तुएं खरीदने में समर्थ बनाता है। कुछ कम्‍पनियां अपने कर्मचारियों की कम्‍पनी के उच्‍च निष्‍पादन में सहयोग करने के लिए संकेत के रूप में बोनस का वितरण करती हैं। कंपनी द्वारा इस प्रकार के सभी संकेत, कर्मचारियों को उनके प्रयासों तथा संगठन में विश्‍वास बढ़ाने में मदद करते हैं।

''उचित मजदूरी'' संबधी समिति के अनुसार मजदूरी के तीन विशिष्‍ट स्‍तर हैं :- (i) जीवन स्‍तर मजूदरी जीवन के स्‍तर का द्योतक होता है जो केवल भौतिक जीविका की व्‍यवस्‍था नहीं करता परन्‍तु स्‍वास्‍थ्‍य एवं स्‍वच्‍छता कायम रखने की व्‍यवस्‍था करता है, इसमें मितव्‍ययी आराम के उपाय, जिसमें से बच्‍चों की शिक्षा, खराब स्‍वास्‍थ बचाव, अनिवार्य सामाजिक आवश्‍यकताओं की अपेक्षाएं और महत्‍वपूर्ण दुर्घटनाओं के लिए कुछ बीमे शामिल हैं; (ii) न्‍यूनतम मजदूरी न केवल जीवन रक्षण सुनिश्चित करती है परन्‍तु शिक्षा, चिकित्‍सीय अपेक्षाओं और सुख साधनों की व्‍यवस्‍था करने द्वारा कर्मचारियों की क्षमता संरक्षित करती है। इस प्रकार से न्‍यूनतम मजदूरी निम्‍नतम सीमा निर्धारित करती है जबकि उपरि सीमा उद्योग की भुगतान क्षमता द्वारा निर्धारित की जाती है; (iii) उचित मजदूरी वह मजदूरी है जो न्‍यूनतम मजदूरी से अधिक परन्‍तु यापन मजदूरी से कम होती है।

मजदूरी और बोनस संबंधी कानून और मामले श्रम और रोजगार मंत्रालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हैं। मंत्रालय के भीतर, केन्‍द्रीय औद्योगिक संबंध मशीनरी (सी आई आर एम) सभी श्रम कानूनों और उनके अधीन बनाए गए नियमों को प्रवर्तित करता है। सी आई आर एम मंत्रालय का अधीनस्‍थ कार्यालय है और यह मुख्‍य श्रम आयुक्‍त (केन्‍द्रीय) [सी एल सी(सी)] संगठन रूप से जाना जाता है। सीआईआर का अध्‍यक्ष मुख्‍य श्रम आयुक्‍त (केन्‍द्र) होता है और इस प्रयोजन के लिए मजदूरी कक्ष और मजदूरी बोर्ड की भी स्‍थापना की गई है।

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