खान अधिनियम, 1952 में कोयला, अलौह धातु और तेल खानों में स्वास्थ्य, सुरक्षा और कामगारों के कल्याण से संबंधित उपायों के लिए प्रावधान निहित हैं। अधिनियम के अनुसार शब्द ''खान'' का अर्थ है कोई भी खुदाई जहां खनिज की खोज या प्राप्त करने का कोई कार्य किया गया है या किया जा रहा है और इसमें सभी बोरिंग, बोर होल्स, तेल के कुएं और उप साधन कच्चा अनुकूलन संयंत्र, शाफ्ट, खुली खदान का कार्य, कन्वेयर्स या हवाई रोपवे, यानों, मशीनरी कार्य, रेलवे, ट्रामवे, स्लाइडिंग, कार्यशाला, विद्युत केन्द्र इत्यादि या कोई परिसर, जो खनन कार्य से संबंधित हो एवं निकट में हो या खनन क्षेत्र में हो, शामिल हैं।
अधिनियम मालिक के लिए खान और खनन कार्य का प्रबंधन करने और खान में स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यवस्था करने के कर्त्तव्यों को निर्धारित करता है। यह खानों में कार्य के घंटों की संख्या, न्यूनतम मजदूरी दरों और अन्य संबंधित विषयों का भी निर्धारण करता है।
अधिनियम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा खान सुरक्षा महानिदेशालय (डी जी एम एस) के माध्यम से प्रशासित होता है। डी जी एम एस खानों और तेल क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए भारत सरकार की विनियामक एजेंसी है। यह निरीक्षण और जांच करता है, खानों में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के प्रयोजन से क्षमता परीक्षण जारी करता है, कामगारों की सुरक्षा की विभिन्न पहलुओं पर गोष्ठियों/ सम्मेलनों का आयोजन करता है। डी जी एम एस का मिशन खानों में नियुक्त व्यक्तियों को व्यावसायिक रोगों एवं चोटों के जोखिम को कम करना और खनन उद्योग में सुरक्षा एवं स्वास्थ्य स्तरों, प्रचालनों और निष्पादन में सुधार लाना है। अपने मिशन को पूरा करने के लिए डी जी एम एस निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करता है :-
- सुरक्षा की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए समय-समय पर निरीक्षण।
- दुर्घटनाओं, खतरनाक घटनाओं और शिकायतों की जांच।
- विशिष्ट खनन कार्य के लिए सांविधिक अनुमति प्रदान करना और कार्य करते समय सावधानी के उपाय निर्धारित करना।
- सुरक्षा के विधान और मानकों को विकसित करना।
- सुरक्षा अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सुरक्षा प्रबंधन में कामगारों की सहभागिता के माध्यम से सुरक्षा संवर्धनात्मक पहलें करना।
केन्द्रीय सरकार ऐसी दुर्घटनाओं की जांच करने के लिए जिसमें 10 या इससे अधिक खनन कर्ताओं की मृत्यु हो जाती है, की जांच करने के लिए जांच अदालत की स्थापना की है। |