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मुख्‍य विनियम:
व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा (ओ एच एण्‍ड एस)
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कंपनी को सुचारू रूप से और सफलतापूर्वक चलाने के लिए कर्मचारियों का स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा एक महत्‍वपूर्ण पहलू है। यह संगठन की प्रभावशीलता में एक निर्णायक कारक है। यह एक दुर्घटना मुक्‍त औद्योगिक परिवेश सुनिश्चित करता है। कंपनियों को उच्‍च व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा निष्‍पादन प्राप्‍त करने को भी उतना ही महत्‍व देना चाहिए, जितना कि वे अपने व्‍यापार की अन्‍य गतिविधियों को देते हैं। इसका कारण है कि कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्‍याण पर उचित ध्‍यान देने से कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि, अनुपस्थिति में कमी और उत्‍पादकता में वृद्धि से अच्‍छे परिणाम मिल सकते हैं, कार्य संबंधी चोटें और बीमारी की संभावना घट जाती है और निर्मित उत्‍पादों और/या दी गई सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।

भारतीय संविधान में तीन अनुच्‍छेदों के रूप में कर्मचारियों के व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं अर्थात 24, 39 (ई और एफ) तथा 42 खानों और तेल क्षेत्रों में श्रम और सुरक्षा का विनियमन संघ सूची के अधीन होता है। जबकि कार्य की परिस्थिति, भविष्‍य निधि, नियोक्‍ता की अवैधता और वृद्धावस्‍था पेंशन और मातृत्‍व लाभ सहित श्रम कल्याण समवर्ती सूची में शामिल हैं।

श्रम मंत्रालय, भारत सरकार और राज्‍यों तथा संघ राज्‍य क्षेत्रों के श्रम विभाग कामगारों की सुरक्षा की स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जिम्‍मेदार हैं। खान सुरक्षा महानिदेशालय (डी जी एम एस) और फैक्‍टरी सलाह सेवा और श्रम संस्‍थानों के महानिदेशक (डी जी एफ ए एस एल आई) खानों और फैक्‍टरी तथा पत्तन क्षेत्रों के व्‍यावसायिक सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के तकनीकी पक्षों पर मंत्रालय को सहायता देता है।

डी जी एम एस खनन उद्योग पर निवारणात्‍मक तथा शैक्षिक प्रभाव का उपयोग करता है। इसका अभियान व्‍यावसायिक रोगों के जोखिम और खानों में नियुक्‍त व्‍यक्तियों के साथ दुर्घटना में कमी लाने के लिए उपयुक्‍त विधान का मसौदा बनाकर तथा मानकों की स्‍थापना द्वारा और अनेक प्रवर्तन पहलों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्‍यम से करता है। यह खानों का निरीक्षण, सभी खतरनाक दुर्घटनाओं की छानबीन, विभिन्‍न खनन प्रचालनों के संदर्भ में वैधानिक अनुमति प्रदान करना रियायत और छूट देना, खान सुरक्षा उपकरण का अनुमोदन, उपकरण और सामग्री, वैधानिक सक्षमता प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए परीक्षाएं आयोजित करना, राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों और राष्‍ट्रीय सुरक्षा सम्‍मेलन के आयोजन सहित सुरक्षा को प्रवर्तित करने वाले प्रोत्‍साहन आदि।

डी जी एफ ए एस एल आई श्रम मंत्रालय के साथ संलग्‍न एक कार्यालय है और यह फैक्‍टरियों तथा पत्तन/डॉक से संबंधित है। यह फैक्‍टरी अधिनियम के प्रशासन और प्रबलन के विषय में राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को तकनीकी सलाह देता है। यह व्‍यावसायिक सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित मामलों में शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्‍यम से अनुसंधान सुविधाओं को समर्थन देता है और प्रवर्तन कार्यकलाप करता है।

दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान डीजीएफएएसएलआई द्वारा की गई पमुख पहलें :-

कानून

व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा (ओएच एण्‍ड एस) से संबंधित विधानों को मोटे तौर पर इन तीन श्रेणियों में बांटा गया है :-

  • सुरक्षित कार्यस्‍थलों के लिए विधान
  • सुरक्षित सामग्री के लिए विधान
  • गतिविधियों की सुरक्षा के लिए विधान

वर्तमान में व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा (ओ एच एण्‍ड एस) के विनियमन हेतु व्‍यक्तियों के कार्यस्‍थल पर सुरक्षित और स्‍वास्‍थ्‍य विधान चार क्षेत्रों में हैं :-

  • खानें
  • फैक्‍टरियां
  • पत्तन
  • निर्माण

प्रमुख कानून इस प्रकार हैं :-

फैक्‍टरी अधिनियम, 1948

  • यह फैक्‍टरियों में स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा, कल्‍याण और कार्य करने की अन्‍य परिस्थितियों का विनियमन करता है।
  • इसे फैक्‍टरी निरीक्षणालयों के माध्‍यम से राज्‍य सरकार द्वारा प्रभावी बनाया जाता है। महानिदेशक, फैक्‍टरी सलाह सेवा और श्रम संस्‍थान (डी जी एफ ए एस एल आई) द्वारा राज्‍य सरकारों के साथ फैक्‍टरियों में कामगारों की सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कल्‍याण संबंधी मामलों का समन्‍वय किया जाता है।
  • डी जी एफ ए एस एल आई द्वारा मुम्‍बई में केन्‍द्रीय श्रम संस्‍थान तथा कोलकाता, चेन्‍नै तथा कानपुर में स्थित तीन अन्‍य क्षेत्रीय श्रम संस्‍थानों के माध्‍यम से कामगारों की सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित विभिन्‍न पक्षों पर प्रशिक्षण, अध्‍ययनों और सर्वेक्षणों का आयोजन किया जाता है।

    (इस अधिनियम का विवरण जानने के लिए उप अनुभाग ''कार्य घंटों, सेवा और रोजगार की शर्तों से संबंधित कानून'' देखें)

खान अधिनियम, 1952

  • इसमें कोयला, धातु और तेल खानों में कार्यरत कामगारों की सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कल्‍याण से संबंधित उपायों के प्रावधान निहित हैं।
  • खान अधिनियम, 1952, में मालिक (प्रोपराइटर, लीसी या एजेंट के रूप में परिभाषित) द्वारा खानों में प्रबंधन और खानों के खनन प्रचालन तथा स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा से संबंधित कर्त्तव्‍यों को बताया गया है। इसमें खानों में कार्य घंटों की संख्‍या, न्‍यूनतम पारिश्रमिक दरें तथा अन्‍य संबंधित मामले भी बताए गए हैं।
  • खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा खानों में विभिन्‍न पदों पर नियुक्ति के प्रयोजन से निरीक्षण और जांच, मुद्दा सक्षम परीक्षण कराए जाते हैं, यह कामगारों की सुरक्षा के विभिन्‍न पहलुओं पर गोष्ठियों/सम्‍मेलनों का आयोजन भी करता है।
  • जांच के न्‍यायालयों की स्‍थापना केन्‍द्रीय सरकार द्वारा दुर्घटना की छानबीन के लिए कराई जाती है, जिसके फलस्‍वरूप खानों में 10 या इससे अधिक खान श्रमिकों की मृत्‍यु हो गई हो। इस अधिनियम के तहत बाध्‍यताओं ओर कर्त्तव्‍यों के उल्‍लंघन पर दंडात्‍मक और धन संबंधी सजा दी जा सकती है।

    (इस अधिनियम का विवरण जानने के लिए उप अनुभाग ''कार्य घंटों, सेवा और रोजगार की शर्तों से संबंधित कानून'' देखें)

डॉक कामगार (सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कल्‍याण) अधिनियम, 1986 ct, 1986

  • इसमें पत्तनों और/डॉक में कार्य करने वाले कामगारों की स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा और कल्‍याण के लिए प्रावधान अंतर्निहित है।
  • इसका प्रशासन फैक्‍टरी परामर्श सेवा महानिदेशक एवं श्रम संस्‍थान द्वारा किया जाता है, एफ ए एस एल आई महानिदेशालय मुख्‍य निरीक्षक द्वारा किया गया है, भारत में 10 मुख्‍य पत्तनों में डॉक सुरक्षा निरीक्षणालय हैं अर्थात कोलकाता, मुम्बई, चेन्‍नै, विशालापट्टनम, पारादीप, कान्‍डाला मोरमुगांव, तूतीकोरीन, कोचीन और नया मैंगलोर में।
  • निरीक्षणालय के कार्यकलापों का समग्र बल पत्तनों में दुर्घटना दरों और दुर्घटनाओं की संख्‍या को नियंत्रित करना है।

इसके तहत बनाए गए अन्‍य विधान और नियम :-

भारतीय राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससीआई)

भारतीय राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससीआई) की स्‍थापना कामगारों के बीच सुरक्षा संबंधी जागरूकता बढ़ाने, दुर्घटनाओं को रोकने, खतरा कम करने और मानव पीड़ा कम करने, कार्यक्रमों की व्‍यवस्‍था करने, सुरक्षा संबंधी व्‍याख्‍यान और सम्‍मेलन आयोजित करने, नियोक्‍ताओं और कामगारों के बीच जागरूकता उत्‍पन्‍न करने के लिए शैक्षिक अभियान चलाने और शैक्षिक एवं सूचना संबंधी डाटा संग्रहण करने के लिए की गई है। इसने तीन क्षेत्रों में नई पहलें शुरू की है :-

  • सड़क परिवहन सुरक्षा
  • निर्माण के क्षेत्र स्‍वास्‍थ्‍य की रक्षा
  • लघु और मध्‍यम उद्यमों (एस एम ई) में सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरण।

अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भारतीय राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (आई एल ओ) के साथ निकट सहयोग विकसित किया है; संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यू एन ई पी); विश्‍व बैंक; एशियाई आपदा तैयार केन्‍द्र (ए डी पी सी), बैंकाक, विश्‍व पर्यावरण केन्‍द्र (डब्‍ल्‍यू ई सी), न्‍यूयार्क और एशिया प्रशांत व्‍यावसायिक सुरक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (ए पी ओ एस एच ओ) जिसका एन एस सी आई संस्‍थापक सदस्य है।

राष्‍ट्रीय ए पी ई एल एल (स्‍थानीय स्‍तर पर आपातकाल के लिए जागरूकता और तैयारी) केन्‍द्र (एन ए सी) की स्‍थापना यूएनईपी पेरिस के प्रौद्योगिकी, उद्योग और आर्थिक प्रभाग के साथ समझौता ज्ञापन के तहत एन एस सी आई मुख्‍यालय में अप्रैल 2002 से की गई है। यह विश्‍व का पहला एपीई केन्‍द्र है। इसको यू एन ई पी और अन्‍य अंतरराष्‍ट्रीय स्रोतों एवं पर्यावरण और वन मंत्रालय भारत सरकार और जोखिम धारकों से तकनीकी सहायता और सूचना सहायता मिलती हैं। यह मुख्‍य रूप से भारत में अंतरराष्‍ट्रीय रूप से स्‍वीकार्य ए पी ई एल एल प्रक्रिया के उपयोग के जरिए रासायनिक आपात तैयारी और प्रतिक्रिया को सुदृढ़ बनाना है।

नीति

कार्यस्‍थल पर राष्‍ट्रीय सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरण संबंधी नीति की घोषणा भी सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कार्यस्‍थल निष्‍पादन में पर्यावरण में सुधार के लिए कदम है।

नीति के उद्देश्‍य थे :-

  • कार्य संबंधित चोटों, रोगों, आपदा और राष्‍ट्रीय परिसम्‍पत्ति की हानि की घटना को सतत रूप से कम करना।
  • कार्यस्‍थल पर चोटों और रोगों की सतत कमी
  • कार्य संबंधित चोटों, अपमृत्यु और बीमारियों के अधिक व्‍यापक डाटाबेस के लिए बेहतर निष्‍पादन और निगरानी के साधन के रूप में कवरेज विस्‍तारित करना।
  • कार्यस्‍थल संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरण के संबंध में सामुदायिक जागरूकता की सतत वृद्धि।

पुरस्‍कार

व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा प्रोत्‍साहित करने के लिए सरकार द्वारा कुछ पुरस्‍कारों की स्‍थापना की गई है :-

  • औद्योगिक उपक्रमों की ओर से माल सुरक्षा निष्‍पादन को सम्‍मान देने और दुर्घटना रोकथाम कार्यक्रमों में प्रबंधन और कामगारों दोनों के हितों को अभिप्रेरित करने एवं अनुरक्षण करने के लिए 1965 में फै‍क्‍टरियों और डॉकों के लिए राष्‍ट्रीय सुरक्षा पुरस्‍कार की स्‍थापना की गई है।
  • राष्‍ट्रीय स्‍तर के विशिष्‍ट खान सुरक्षा निष्‍पादन को सम्‍मानित करने के लिए 1983 में खानों के लिए राष्‍ट्रीय सुरक्षा पुरस्‍कारों की स्‍थापना की गई है, जो खान अधिनियम, 1952 के दायरे में आता है।
  • श्रम वीर पुरस्‍कार, जिसे अब विश्‍वकर्मा राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार के रूप में जाना जाता है की स्‍थापना 1965 में की गई थी। ये फैक्‍टरियों, खानों, बागानों और डॉकों के कामगारों के लिए हैं और ये उनके सराहनीय निष्‍पादनों के लिए उन्‍हें दिया जाता है जिसके कारण अधिक उत्‍पादकता या मितव्‍ययी या उच्‍च क्षमता बढ़ती है।

व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली संबंधी भारतीय मानक

व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा आपदाओं की पहचान के लिए संरचनागत तरीके का अंगीकरण उनका मूल्‍यांकन और संगठन में जोखिमों के नियंत्रण की मांग करते हैं इसलिएभारतीय मानक ब्‍यूरो ने व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली संबंधी भारतीय मानक बनाया है। यह आईएस 18001:2000 व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली कहलाता है। यह मानक संगठन को नीति बनाने में समर्थ बनाने के लिए कानूनी अपेक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली की अपेक्षाएं निर्धारित करता है। यह महत्‍वपूर्ण आपदाओं और जोखिमों के बारे में सूचना भी मुहैया कराता है, जिसका नियंत्रण संगठन अपने कर्मचारियों और दूसरों की रक्षा करने के लिए कर सकता है, जिनका स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा संगठन के क्रियाकलापों से प्रभावि हो सकता है।

व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा के लिए लाइसेंस चाहने वाले संगठनों को आईएस 18001 के अनुसार यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इस मानक के अनुसार प्रणाली का संचालन कर रहे हों। संगठन को निर्धारित प्रोफार्मा में आवेदन करना चाहिए ( प्रपत्र IV ) जो निकटतम क्षेत्रीय कार्यालय में प्रश्‍नावली के साथ ( प्रपत्र X ) और निर्धारित आवेदन शुल्‍क के साथ आवेदन करना चाहिए। आवेदन पर संगठन के कर्ताधर्ता या मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) या संगठन की ओर से हस्‍ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत किसी अन्‍य व्‍यक्ति द्वारा हस्‍ताक्षरित होना चाहिए। आवेदन पर हस्‍ताक्षर करने वाला व्‍यक्ति का नाम और पदनाम आवेदन प्रपत्र पर इस प्रयोजन के लिए निर्धारित जगह पर सुपाठ्य रूप से रिकार्ड किया जाए। प्रत्‍येक आवेदन के साथ प्रलेखित व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली प्रलेखन (जैसा कि व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य मैनुअल आदि) लगा हो।

भारत और अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (आई एल ओ)

भारत अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन का एक संस्‍थापक सदस्‍य है। आई एल ओ का कार्य का मुख्‍य साधन, समझौते और सिफारिशों के रूप में अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठनों की स्‍थापना करना है। समझौते अंतरराष्‍ट्रीय संधियां हैं और ऐसे साधन हैं जो अनुसमर्थन करने वाले देशों पर कानूनी बाध्‍यताएं सृजित करते हैं। सिफारिशें गैर बाध्‍यता वाले दिशा निर्देश होती हैं जो राष्‍ट्रीय नीतियों और कार्यों को अभिमुख करती हैं। अब तक आई एल ओ ने 182 समझौतों और 190 सिफारिशों को अपनाया है इनमें कामगारों के मौलिक अधिकार, कामगारों का संरक्षण, सामाजिक सुरक्षा, श्रम कल्‍याण, व्‍यावसायिक सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य, महिला और बाल श्रमिक, प्रवासी मजदूर, देशी और जन‍जाति जनसंख्‍या आदि शामिल हैं।

अंतरराष्‍ट्रीय श्रम मानक के संबंध में भारत का रवैया हमेशा सकारात्‍मक रहा है। भारत में तदनुसार भारत में श्रमिकों के हितों की रक्षा एवं विकास के लिए वैधानिक और प्रशासनिक उपाय विकसित किया है। अभी तक भारत द्वारा अपनाई गई प्रथा यह रही है कि समझौतों का अनुसमर्थन तब किया जाता है यदि राष्‍ट्रीय कानून और प्रथाएं प्रश्‍नाधीन समझौतों के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं। भारत ने अब तक 41 आई एल ओ समझौतों का अनुसमर्थन किया है। आई एल ओ के गैर अनुसमर्थित समझौतों की हमारे राष्‍ट्रीय कानूनों और प्रथाओं के संबंध में उपयुक्‍त अंतराल में समीक्षा भी की जाती है।

भारत द्वारा अनुसमर्थित आई एल ओ समझौतों की सूची


क्रम. सं.

समझौते की संख्‍या और नाम

अनुसमर्थन की तारीख

1.

सं.1 कार्य के घंटे (उद्योग) समझौता, 1919

14.07.1921

2.*

सं. 2 बेरोजगारी समझौता, 1919

14.07.1921

3.

सं. 4 रात्रि कार्य (महिला) समझौता, 1919

14.07.1921

4.

सं. 5 न्‍यूनतम आयु (उद्योग) समझौता, 1919

09.09.1955

5.

सं. 6 अल्‍पवयस्‍क व्‍यक्तियों का रात्रि कार्य (उद्योग) समझौता, 1919

14.07.1921

6.

सं. 11 संघ के अधिकार (कृषि) समझौता, 1921, 1921

11.05.1923

7.

सं.14 साप्‍ताहिक (उद्योग) समझौता, 1921

11.05.1923

8.

सं.15 न्‍यूनतम आयु (ट्रिमर्स और स्‍टॉकर्स) समझौता, 1921

20.11.1922

9.

सं.16 अल्‍पवयस्‍क व्‍यक्तियों की चिकित्‍सा जांच (समुद्र) समझौता, 1921

20.11.1922

10.

सं.18 कामगारों की क्षतिपूर्ति (व्‍यावसायिक रोग) समझौता, 1925

30.09.1927

11.

सं.19 समानता का व्‍यवहार (दुर्घटना क्षतिपूर्ति) समझौता, 1925

30.09.1927

12.

सं.21 प्रवासियों का निरीक्षण समझौता, 1926

14.01.1928

13.

सं.22 करार का समुद्री लेख समझौता, 1926

31.10.1932

14.

सं.26 न्‍यूनतम आयु-निर्धारण मशीनरी, समझौता, 1928

10.01.1955

15.

सं.27 वजन चिन्‍हांकन (पोतों द्वारा परिवहन पैकेज) समझौता, 1929

07.09.1931

16.

सं. 29 बंधुआ मजदूर समझौता, 1930

30.11.1954

17.

सं.32 दुर्घटना से रक्षा (डॉकर्स) समझौता, 1932

10.02.1947

18.@

सं.41 रात्रि कार्य (महिला) समझौता (संशोधित), 1934

22.11.1935

19.

सं.42 कामगारों की क्षतिपूर्ति (व्‍यावसायिक रोग) समझौता (संशोधित), 1934

13.01.1964

20

सं.45 भूमिगत कार्य (महिलाएं) समझौता, 1935

25.03.1938

21.

सं.80 अंतिम लेख पुनरीक्षण समझौता, 1946

17.11.1947

22. **

सं.81 श्रम निरीक्षण समझौता, 1947

07.04.1949

23.

सं.88 रोजगार सेवा समझौता, 1948

24.06.1959

24.

सं.89 रात्रि कार्य (महिलाएं) समझौता (पुनरीक्षित), 1948

27.02.1950

25.

सं.90 अल्‍पवयस्‍क व्‍यक्तियों का रात्रि कार्य (उद्योग) (पुनरीक्षित), 1948

27.02.1950

26.

सं.100 समान परिलब्धि समझौता, 1951

25.09.1958

27.

सं.107 देशी और जनजातीय जनसंख्‍या समझौता, 1957

29.09.1958

28.

सं.111 भेदभाव (रोजगार और व्‍यवसाय) समझौता, 1958

03.06.1960

29.

सं.116 अंतिम लेख पुनरीक्षण समझौता, 1961

21.06.1962

30.#

सं.118 व्‍यवहार की समानता (सामाजिक सुरक्षा) समझौता, 1962

19.08.1964

31.@@

सं.123 न्‍यूनतम आयु (भूमिगत कार्य) समझौता, 1965

20.03.1975

32.

सं.115 विकिरण रक्षा समझौता, 1960

17.11.1975

33.

सं.141 ग्रामीण कामगार संगठन समझौता, 1975

18.08.1977

34.

सं.144 त्रिपक्षीय परामर्श (अंतरराष्‍ट्रीय श्रम मानक) समझौता, 1976

27.02.1978

35.

सं.136 बेंजीन समझौता, 1971

11.06.1991

36.##

सं.160 श्रम सांखियकीय समझौता, 1985

01.04.1992

37.

सं.147 मर्चेन्‍ट नौवहन (न्‍यूनतम मानक), 1976

26.09.1996

38.

सं.122 रोजगार नीति समझौता, 1964

17.11.1998

39.

सं.105 बंधुआ मजदूर उन्‍मूलन, 1957

18.05.2000

40.

P89 रात्रि कार्य (महिलाओं) के लिए 1990 का प्रोटोकॉल समझौता (पुनरीक्षित), 1948

 
41.

सं.108 समुद्री भाड़ेदारों की पहचान दस्‍तावेज समझौता, 1958

 

* बाद में समाप्‍त कर दिया गया, समझौता के लिए प्रत्‍येक तीन माहों में रोजगार संबंधी सांख्यिकी प्रस्‍तुत करना अपेक्षित है जो व्‍यवहारिक नहीं
समझा जाता हैं।

@ समझौता 89 के परिणाम के रूप में समझौता समाप्‍त कर दिया गया।

** भाग II को छोड़कर.

#शाखाएं (ग) और (छ) और शाखाएं (क) से (ग) और (i)।

@@ आरंभ में विनिर्दिष्‍ट न्‍यूनतम आयु 16 वर्ष थी परन्‍तु इसे 1989 में बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया गया।

## भाग– II का अनुच्‍छेद 8

^ ऊपर

 
 
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