| पेटेंट से संबंधित मुख्य विधान पेटेंट अधिनियम, 1970 है। पेटेंट शब्द को एकाधिकार के रूप में पारिभाषित किया जाता है जो उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने नया और उपयोगी चीज का अविष्कार किया है या मौजूदा वस्तु में सुधार किया या वस्तु की नई प्रक्रिया का अविष्कार किया है। इसमें नई खोजी गई वस्तु को विनिर्मित करने का विशिष्ट अधिकार या सीमित अवधि के लिए अविष्कारी प्रक्रिया के अनुसार वस्तु का विनिर्माण करने का अधिकार। अविष्कारों में उत्पाद या नई मिश्र धातु उत्पाद अविष्कार कहलाता है और इसके लिए पेटेंट को उत्पाद पेटेंट कहा जाता है जबकि अविष्कार जिसमें प्रक्रिया या ज्ञात अथवा नई मिश्र धातु बनाने की प्रक्रियाओं को प्रक्रिया अविष्कार कहा जाता है और इसके लिए पेटेंट प्रक्रिया पेटेंट कहलाता है। यह अधिनियम केवल प्रक्रिया पेटेंट की व्यवस्था करता है और खाद्य, भेषज और रसायन जैसे उत्पादों के लिए अविष्कार को केवल ईएमआर (विशिष्ट विपणन अधिकार) प्रदान किया जाता है।
भारत में पेटेंट प्रणाली का प्रशासन पेटेंट, डिजाइन, ट्रेड मार्क्स और भौगोलिक संकेत महानियंत्रक के अधीक्षण में होता है। महानियंत्रक का कार्यालय औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। महानियंत्रक पेटेंट कार्यालय और पेटेंट सूचना प्रणाली (पीआईएस) का निदेशन और पर्यवेक्षण करता है। पेटेंट कार्यालय नया पेटेंट अधिनियम के तहत नए अविष्कारों के लिए पेटेंट प्रदान करने संबंधी सांविधिक कर्त्तव्यों का निष्पादन करता है। पेटेंट का मुख्यालय कोलकाता में है जिसकी शाखाएं मुम्बई, चेन्नै और दिल्ली में हैं। शाखाएं अपने भूखण्ड के क्षेत्राधिकार के भीतर आने वाले पेटेंट के आवेदनों के संबंध में कार्य करते हैं। नागपुर में पेटेंट सूचना प्रणाली (पीआईएस) प्रयोक्ताओं के लिए पेटेंट सूचना केन्द्र के रूप में कार्य करते आ रहा है। पेटेंट सूचना प्रणाली, पेटेंट विशिष्टीकरण और पेटेंट संबंधी साहित्य का विश्व व्यापी आधार पर संग्रहण का रखरखाव करता और प्रौद्योगिकीय सूचना प्रदान करता है जो पेटेंट या पेटेंट संबधी साहित्य में निहित होती है। यह सर्च सेवाओं और पेटेंट प्रति आपूर्ति
सेवाओं के माध्यम से अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठानों के विभिन्न प्रयोक्ताओं, सरकारी कार्यालयों, निजी उद्योगों, व्यापार अविष्कारकों और भारत के भीतर अन्य प्रयोक्ताओं को प्रदान z है।
अधिनियम के मुख्य प्रावधान हैं :-
- पेटेंट, डिजाइन और ट्रेड मार्क के महानियंत्रक की नियुक्ति व्यापार और पण्य चिन्ह अधिनियम, 1958 के तहत की जाती है, वह अधिनियम के प्रयोजनों के लिए पेटेंट नियंत्रक होगा। पेटेंटों के पंजीकरण को सुकर बनाने के प्रयोजन से केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट जगहों पर एक पेटेंट कार्यालय होगा।
- पेटेंट कार्यालय में एक रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें निम्नलिखित की प्रविष्टि की जाएगी :-
- पेटेंट की गारंटियों के नाम और पता;
- पेटेंट का आबंटन, विस्तार और प्रतिसंहरण की अधिसूचनाएं; और
- यथा निर्धारित वैधता या पेटेंटों के स्वामित्व को प्रभावित करने वाले ऐसे अन्य विषयों के विवरण।
- अविष्कार के लिए पेटेंट का आवेदन इनमें से किसी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है :-
- कोई भी व्यक्ति जो अविष्कार का वास्तविक और प्रथम अविष्कारक होने का दावा करता है;
- कोई भी व्यक्ति जो उस व्यक्ति का आबंटित होता है जो इस प्रकार के आवेदन के अधिकार के संबंध में वास्तविक और प्रथम अविष्कार होने का दावा करता है;
- किसी दिवंगत व्यक्ति का कानूनी प्रतिनिधि जो अपनी मृत्यु के तुरन्त पहले ऐसा आवेदन करने का हकदार होता है।
- इस अधिनियम के अभिप्राय से निम्नलिखित अविष्कार नहीं हैं :-
- ऐसा अविष्कार जो तुच्छ है या जो ऐसा दावा करता है जो सुस्थापित प्राकृतिक नियमों के विपरीत है;
- अविष्कार जिसका प्राथमिक या लक्षित उपयोग नियम के प्रतिकूल हो या नैतिकता के प्रतिकूल या जन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है;
- वैज्ञानिक सिद्धांतों की खोज मात्र या अव्यवहारिक सिद्धांतों का प्रतिपादन;
- ज्ञात तत्व के लिए नए उपयोग की नई विशेषता की खोज मात्र या ज्ञात प्रक्रिया मशीन या उपकरण का उपयोग मात्र जब तक कि ऐसी ज्ञात प्रक्रिया से नए उत्पाद न हो या कम से कम एक नए प्रतिक्रिया कारक को शामिल नहीं करता है;
- मिश्रण मात्र से प्राप्त तत्व जो उसके संघटकों की विशेषताओं का वर्धन करता या ऐसे तत्व के उत्पादन के लिए प्रक्रिया बढ़ाता है;
- ज्ञात उपकरणों की व्यवस्था मात्र या पुनर्व्यवस्था जो ज्ञात तरीके से प्रत्येक स्वतंत्र रूप से कार्य करता है;
- मशीन, उपकरण या अन्य उपकरणों को अधिक सक्षम बनाने हेतु अथवा मौजूदा मशीन, उपकरण या अन्य उपकरणों के सुधार या पुनरुद्धार या विनिर्माण में सुधार या नियंत्रण के लिए प्रक्रिया के दौरान प्रयोज्य परीक्षण की विधि या प्रक्रिया;
- कृषि या बागवानी की विधि;
- मानव जाति के लिए किसी औषधीय, शल्य चिकित्सीय, उपचारात्मक, रोगनिरोधी के लिए कोई या अन्य उपचार के लिए कोई प्रक्रिया अथवा पशुओं के इस प्रकार के उपचार के लिए या पौधों को रोगों से मुक्त रखने के लिए या उनकी और उनके उत्पादों का आर्थिक मूल्य बढ़ाने के लिए कोई प्रक्रिया।
- पेटेंट का प्रत्येक आवेदन केवल एक अविष्कार के लिए होगा और यह निर्धारित प्रपत्र में किया जाएगा और पेटेंट कार्यालय में दर्ज किया जाएगा। प्रत्येक आवदेन में यह उल्लेख होगा कि आवेदक के पास अविष्कार है और यह वास्तव में प्रथम अविष्कारक होने का दावा करने वाले स्वामी को नामित करेगा; और ऐसा दावा करने वाला व्यक्ति आवेदक नहीं है या आवेदकों में से एक नहीं है, आवेदन में यह घोषणा की जाएगी कि आवेदक को इस प्रकार से नामित व्यक्ति पर विश्वास है कि वह वास्तव में प्रथम अविष्कारक है। ऐसा प्रत्येक आवेदन के साथ अनंतिम या पूर्ण विशिष्टीकरण होगा।
- जहां पेटेंट के लिए आवेदन (जो समझौता आवेदन न हो) के साथ अनंतिम विशिष्टीकरण लगा हो, एक पूर्ण विशिष्टीकरण आवेदन करने की तिथि से बारह माहों के भीतर दर्ज किया जाएगा, और यदि पूर्ण विशिष्टीकरण दर्ज नहीं किया जाता है तो आवेदन परित्यक्त समझा जाएगा। प्रत्येक पूर्ण विशिष्टीकरण निम्न प्रकार से होगा :-
- अविष्कार का पूर्ण विवरण का उल्लेख और इसके कार्य या उपयोग और विधि का उल्लेख होगा जिसके द्वारा इसको निष्पादित किया जाता है।;
- अविष्कार के निष्पादन की सर्वोत्तम विधि का प्रकटीकरण जो आवेदक को ज्ञात है और जिसके लिए संरक्षा का दावा करने के लिए वह हकदार हैं; और
- दावे के साथ समाप्त हो या अविष्कार की संभावना का दावा जिसके लिए संरक्षण का दावा किया जाता है।
- किसी भी समय इस अधिनियम के तहत पूर्ण विशिष्टीकरण को स्वीकार करने संबंधी विज्ञापन की तारीख से चार माहों के अंदर (या ऐसी अवधि के अंदर जो कुल एक माह की अवधि से अधिक न हो, जैसाकि उपर्युक्त चार माह की समाप्ति के पहले निर्धारित तरीके से नियंत्रक उसको दिए गए आवेदन पर अनुमत करता है) कोई भी इच्छुक व्यक्ति निम्नलिखित में से किसी आधार पर किसी व्यक्ति को पेटेंट प्रदान करने का विरोध करने के लिए नियंत्रक को सूचना दे सकता है, अर्थात : -
- कि पेटेंट के लिए आवेदक या व्यक्ति जिसके तहत या जिसके माध्यम से वह दावा करता है, उसने गलत तरीके से अविष्कार प्राप्त किया या उससे उसका कोई भाग या व्यक्ति जिसके अधीन या माध्यम से वह दावा करता है, गलत तरीके से प्राप्त किया गया है;
- कि अब तक दावाकृत पूर्ण विशिष्टीकरण में कोई दावा की प्राथमिकता तिथि के पहले प्रकाशित हुआ है :- (i) 1 जनवरी, 1912 को या इसके बाद भारत में पेटेंट के लिए किया गया आवेदन के अनुसरण में दर्ज किसी विशिष्टि में; या (ii) भारत में या कहीं पर किसी अन्य दस्तावेज में।
- कि अब तक पूर्ण विनिर्देशन के किसी दाव में दावा किए गए अविष्कार पर आवेदक के दावे की प्राथमिकता तिथि को या उसके बाद प्रकाशित पूर्ण विनिर्देशन के दवे में दावा किया गया है और भारत में पेटेंट हेतु आवेदन के अनुसरण में दर्ज किया गया है जो ऐसा दावा है जिसकी प्राथमिकता तिथि आवेदक के दावे की तिथि से पहले है;
- कि अब तक पूर्ण विनिर्देशन के दावे में दावा किया गया आविष्कार सार्वजनिक रूप से ज्ञात था या उस दावे की प्राथमिकता की तारीख के पहले
सार्वजनिक रूप से प्रयुक्त हुआ है।
- कि अब तक पूर्ण विनिर्देशन के दावे में दावा किया गया आविष्कार में प्रत्यक्ष और स्पष्ट रूप से कोई आविष्कारक के कदम शामिल नहीं हैं;
- कि पूर्ण विनिर्देशन के किसी दावे का विषय इस अधिनियम के अर्थ के अधीन आविष्कार नहीं है या इस अधिनियम के तहत पेटेंट करने योग्य नहीं है;
- कि पूर्ण विनिर्देशन अविष्कार का पर्याप्त एवं स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं करता या जिस विधि से इसका निष्पादन किया जाना है, का उल्लेख नहीं करता;
- कि समझौता आवेदन के मामले में आवेदक द्वारा या जिस व्यक्ति से वह हक प्राप्त करता है उसके द्वारा समझौता देश में किए गए आविष्कार के लिए संरक्षण हेतु प्रथम आवेदन की तारीख से बारह माह के भीतर आवेदन नहीं किया गया।
जहां विधिवत रूप से विरोध के लिए ऐसी कोई सूचना दी जाती है तो नियंत्रक आवेदक को सूचित करेगा और आवेदक और विरोधी को मामले पर निर्णय लेने के पहले सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा।
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जहां पेटेंट के लिए आवेदन के अनुसरण में पूर्ण विनिर्देशन स्वीकार कर लिया गया है और या तो :- (i) आवेदन का विरोध नहीं किया गया है और विरोध दर्ज करने का समय समाप्त हो गया है; या (ii) आवेदन का विरोध किया गया है और आवेदन पर आवेदक के पक्ष में अंतत: निर्णय लिया गया है; या (iii) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति के कारण आवेदन नियंत्रक द्वारा अस्वीकृत नहीं किया गया है, तो निर्धारित प्रपत्र में आवेदक द्वारा अनुरोध करने पर आवेदक को पेटेंट प्रदान किया जाएगा या संयुक्त आवेदन के मामले में संयुक्त रूप से आवेदकों को प्रदान किया जाएगा और नियंत्रक पेटेंट कार्यालय की मुहर से पेटेंट को मुहरबंद करेगा और जिस तारीख को पेटेंट मुहरबंद किया जाता है उसकी प्रविष्टि रजिस्टर में की जाएगी।
प्रत्येक दिया गया पेटेंट का निबंधन और जिसका समय समाप्त नहीं हुआ है प्रत्येक पेटेंट का निबंधन और और जो इस अधिनियम के तहत प्रभावी है वह पेटेंट के लिए आवेदन दर्ज करने की तारीख से बीस वर्ष की होगी।
- जहां पूर्ण विनिर्देशन में उल्लिखित या प्रकटन किसी अविष्कार के किसी सुधार या परिवर्तन के संबंध में पेटेंट के लिए आवेदन किया जाता है और आवेदक भी उस अविष्कार के पेटेंट के लिए आवेदन करता या आवेदन किया है या उसके संबंधी में पेटेंट धारक है तो नियंत्रक आवेदक के अनुरोध करने पर अतिरिक्त पेटेंट के रूप में सुधार या परिवर्तन के लिए पेटेंट प्रदान कर सकता है। अतिरिक्त पेटेंट मुख्य अविष्कार के पेटेंट की अवधि के बराबर अवधि के लिए दिया जाएगा।
- किसी भी समय पेटेंट को मुहरबंद करने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद इच्छुक कोई भी व्यक्ति यह दोष लगाते हुए नियंत्रक को आवेदन कर सकता है कि पेटेंट दिया गया अविष्कार के संबंध में जनता की समुचित अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं या पेटेंट किया हुआ अविष्कार उचित कीमत पर जनता के लिए उपलब्ध नहीं है और वह पेटेंट किए हुए अविष्कार के अनिवार्य रूप से कार्य करने के लिए लाइसेंस प्रदान करने का अनुरोध करता है।
- यदि कोई व्यक्ति अधिनियम के तहत दिए गए किसी दिशानिर्देश का पालन नहीं करता है या अधिनियम के उल्लंघन में पेटेंट प्रदान करने के लिए आवेदन करने का कारण बनाता है तो उसको कारावास की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
इस अधिनियम का संशोधन पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 2002 द्वारा और पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा ट्रिप्स के करार के तहत भारत के दायित्वों की देख रेख करने के लिए किया गया है। संशोधन के बाद, उत्पाद पेटेंट (प्रक्रिया पेटेंट की बजाए) खाद्य, भेषज, और रसायन उत्पादों के लिए दिया जा रहा है। पेटेंट के पश्च प्रदाय विरोध के साथ-साथ प्रदाय पूर्व विरोध भी अनुमत है। |