| पौध किस्मों और कृषक अधिकार अधिनियम, 2001 का अधिनियम पौध किस्मों और कृषक और पौध उगाने वालों के अधिकार के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रणाली की स्थापना करने और पौधों की नई किस्मों का विकास प्रोत्साहित करने की व्यवस्था करने के लिए किया गया है। अधिनियम के अनुसार शब्द 'किस्म' का अर्थ है सूक्ष्म अवयव को छोड़कर एक ही वनस्पति वर्ग के निचली कोटि का पौध समूह, जिसको :- (i) दिए गए प्रकार की जाति के पौध समूह के परिणाम स्वरूप व्यक्त विशेषता के रूप में परिभाषित किया जाता है; (ii) जो कम से कम किसी एक उक्त विशेषता की अभिव्यक्ति द्वारा किसी अन्य पौध समूह से अलग पहचाना जाता है; और (iii) प्रजनन के लिए इसकी उपयुक्तता के संबंध में एक यूनिक (एकक) माना जाता है। जो इस प्रकार के प्रजनन के पश्चात अपरिवर्तित रहता है; और इस प्रकार की किस्म, वर्तमान किस्म, परिवर्तित जाति की किस्म, कृषक किस्म और अनिवार्य रूप से व्युत्पन्न किस्म शामिल होती हैं।
केन्द्रीय सरकार ने कृषि मंत्रालय में 'पौधों की किस्मों और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण' की स्थापना अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को प्रवृत्त करने के लिए और पौधों की नई किस्मों के विकास को संवर्धित करने उपाय एवं कृषकों और पौध उगाने वालों के अधिकारों संरक्षण करने के लिए की है। केन्द्रीय सरकार ने पौध किस्मों की रजिस्ट्री भी स्थापित की है जो प्राधिकरण के मुख्यालय में स्थित होगी। प्राधिकरण को पौध किस्म महापंजीयक और पौध किस्मों के पंजीकरण के प्रयोजन के अन्य पंजीयकों की नियुक्ति करने की शक्ति दी गई है।
अधिनियम के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं :-
- केन्द्रीय सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक प्राधिकरण की स्थापना करेगी जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ''पौध किस्मों और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण'' के रूप में जाना जाएगा। और ऐसी जगहों पर जहां प्राधिकारी उचित समझता है वहां किस्मों का पंजीकरण सुकर बनाने के लिए ''पौध किस्मों की रजिस्ट्री'' भी है।
- इस अधिनियम के प्रयाजनों के लिए एक रजिस्टर जिसे पौध किस्मों का राष्ट्रीय रजिस्टर कहा जाता है, रजिस्ट्री के मुख्यालय में रखा जाएगा जिसमें उनके संबंधित उगाने वालों के नाम और पते के साथ सभी पौधों की किस्मों का पंजीकरण किया जाएगा, पंजीकृत किस्मों के संबंध में ऐसे उगाने वालों के अधिकार, प्रत्येक पंजीकृत किस्म के वर्ग का विवरण, इसके बीज और अन्य प्रजननात्मक सामग्री इसकी मुख्य विशेषताओं का विनिर्देशन के साथ और यथा निर्धारित ऐसे विषयों की प्रविष्टि की जाएगी।
- किसी किस्म के पंजीकरण के लिए पंजीयक के पास आवेदन निम्नलिखित के द्वारा किया जाता है:-
- कोई व्यक्ति जो किस्म का उगाने वाला समझा जाता है; या
- किस्म उगाने वाले का दावा करने वाले का कोई उत्तराधिकारी; या
- कोई व्यक्ति जो किस्म उगाने वाले का ऐसे आवेदन करने के अधिकार के संबंध में आबंटित है; या
- कोई किसान या किसानों का समूह या किसानों का समुदाय जो किस्म उगाने वाले का दावा करता है; या
- कोई व्यक्ति जो निर्धारित तरीके से उपर्युक्त व्यक्ति द्वारा उसकी और से आवेदन करने के लिए प्राधिकृत हो; या
- कोई विश्वविद्यालय या सार्वजनिक रूप से निधियन की जाने वाली संस्था जो किस्म उपजाने वाला होने का दावा करती है।
- नई किस्म का पंजीकरण इस अधिनियम के तहत होगा यदि यह नवीनता, विशिष्टता, एक रूपता और स्थिरता के मापदंडों के अनुरूप है। जबकि वर्तमान किस्म पंजीकरण इस अधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर होगा यदि यह विशिष्टता, एक रूपता और स्थिरता के ऐसे मानदंडों के अनुरूप होगी जैसा की विनियम के तहत विनिर्दिष्ट होगा।
- नई किस्म तब मानी जाएगी -
- नया, यदि संरक्षण के लिए आवेदन दर्ज करने की तारीख को ऐसी किस्म का प्रजनन या कटाई सामग्री, उसके प्रजनक के द्वारा या उसकी स्वीकृति से या ऐसे किस्म के दोहन के प्रयोजनों से उसके उत्तराधिकारी की स्वीकृति से न बेची गई हो या अन्यथा दे दी गई हों - (i) भारत में एक वर्ष से पहले; या (ii) भारत के बाहर पेड़ या वाईन के मामले में छ: वर्ष से पहले या किसी अन्य मामले में चार वर्ष से पहले हो।
- भिन्न, यदि यह कम से कम एक अनिवार्य विशेषता द्वारा स्पष्ट रूप से अन्य किसी किस्म से भिन्न है जिसका अस्तित्व किसी देश में आवेदन देने के समय जन सामान्य को ज्ञात विषय है।
- एकरूपता, यदि अंतर होने के अधीन जो इसके प्रजनन की विशेष विशेषता से आशयित है यह अपनी अनिवार्य विशेषता में पर्याप्त रूप से एकसमान हो।
- स्थिरता, यदि इसकी अनिवार्य विशेषता बारंबार प्रजनन के बाद भी अपरिवर्तित रहती है या किसी विशेष प्रजनन चक्र के मामले में ऐसे प्रत्येक चक्र के अंत में अपरिवर्तित रहती है।
- नई किस्म का इस अधिनियम के तहत पंजीकरण नहीं होगा यदि ऐसी किस्म को दिया गया वर्ग :-
- ऐसी किस्म को अभिचिन्हांकित करने में सक्षम नहीं है; या
- केवल इसमें आंकड़े ही हैं; या
- ऐसी किस्म के उत्पादक की पहचान की ऐसी किस्म के लिए विशेषता, मूल्य पहचान के संबंध में गुमराह करने या दुविधा उत्पन्न करने वाला हो; या
- या ऐसे प्रत्येक वर्ग से भिन्न नहीं है जो इसी वनस्पति गत जाति की किस्म विनिर्दिष्ट करती है, या इस अधिनियम के तहत पंजीकृत प्रजातियों से बहुत अधित मिलती-जुलती हो; याा
- यह संभावत: जनता को धोखा दे सकता है ऐसी किस्म की पहचान के संबंध में जनता को दुविधा में डाल सकता है; या
- जो भारत के किसी वर्ग या तबके के नागरिकों की धार्मिक भावना को आहत पहुंचाने वाला हो; या
- जो प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग निवारण) अधिनियम, 1950 में उल्लिखित किसी प्रयोजन के लिए नाम या प्रतीक के रूप में उपयोग के लिए प्रतिसिद्ध हो; या
- जो पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से भौगोलिक नाम मात्र हो।
- विनियमन के अनुसार प्रत्येक आवेदक किस्म का एक ही और भिन्न वर्ग विनिर्दिष्ट करेगा जिसके लिए वह इस अधिनियम के तहत पंजीकरण कराना चाहता है। प्राधिकरण किसी अंतरराष्ट्रीय समझौता या सन्धि के प्रावधानों का सम्मान करते हुए, जिसका भारतीय एक पक्ष बन गया है किस्म का वर्ग विनिर्दिष्ट करने को शासित करने के लिए विनियम बनाएगा।
- पंजीकरण के प्रत्येक आवेदन :-
- किस्म के संबंध में होगा;
- आवेदक द्वारा ऐसी किस्म के लिए विनिर्दिष्ट वर्ग का उल्लेख करेगा;
- इसके साथ आवेदक द्वारा शपथ पत्र होगा, कि ऐसी किस्म में किसी जीन या जीन क्रम अंतर्ग्रस्त नहीं है जिसमें सीमाबद्ध करने वाली प्रौद्योगिकी शामिल हो;
- विनियमन द्वारा विनिर्दिष्ट स्वरूप में होगा;
- जहां से अनुवांशिक सामग्री ली गई है भारत में उसकी भौगोलिक स्थान के साथ पूर्ण जनकीय लाइन का पासपोर्ट डाटा जहां से किस्म व्युत्पन्न की गई है और ऐसी सभी सूचनाएं जो योगदान से संबंधित है, यदि कोई हो, किसी कृषक, ग्राम समुदाय, संस्था या संगठन का उत्पादन में, किस्म विकसित करने या उत्पन्न करने में किसी प्रकार का योगदान का डाटा;
- इसकी नवीनता की विशेषता, भिन्नता, एकरूपता और स्थायित्व को परिलक्षित करने वाला किस्म की संक्षिप्त व्याख्या के विवरण के साथ होगा जैसाकि पंजीकरण के लिए अपेक्षित है;
- इसके साथ निर्धारित शुल्क भेजा जाएगा;
- ऐसी घोषणा सन्निहित होगा कि किस्म उगाने या उत्पन्न करने या किस्म विकसित करने के लिए प्राप्त अनुवांशिक सामग्री या जनकीय सामग्री कानूनी रूप से प्राप्त की गई है; और
- यथा निर्धारित विवरण इसके साथ लगा होगा।
- प्रत्येक आवेदक, इस अधिनियम के तहत पंजीकरण के लिए दिया गया आवेदन के साथ पंजीयक को जिसके लिए पंजीकरण का आवेदन किया जाता है उस किस्म को उस प्रमात्रा में उपलब्ध कराएगा, जिससे कि जनकीय सामग्री के साथ ऐसी किस्म के बीज का मूल्यांकन करने के लिए परीक्षण किया जा सके ताकि यह जाना जाए कि विनियम द्वारा यथा विनिर्दिष्ट मानकों के यह समनुरूम है। प्रत्येक उल्लिखित परीक्षण करने हेतु यथा निर्धारित शुल्क जमा करेगा।
- कोई भी व्यक्ति पंजीकरण शुल्क का भुगतान करके पंजीकरण के लिए आवेदन के विज्ञापन की तारीख से तीन माह के भीतर पंजीकरण के अपने विरोध के लिए पंजीयक को निर्धारित तरीके से लिखित रूप में सूचना दे सकता है। निम्नलिखित में से किसी कारण से विरोध किया जा सकता है :-
- कि वह व्यक्ति जो आवेदन का विरोध करता है वह आवेदक के विरूद्ध उत्पादक के अधिकार का हकदार है; या
- कि इस अधिनियम के तहत यह किस्म पंजीकरण योग्य नहीं है; या
- कि पंजीकरण का प्रमाणपत्र प्रदान करना जन हित में नहीं हो; या
- कि किस्म का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है।
- पंजीयक पंजीकरण के लिए आवदेक को विरोध की एक प्रति भेजेगा और विरोध की सूचना की ऐसी प्राप्ति को आवेदक द्वारा प्राप्त करने से दो माह के भीतर, आवेदक पंजीयक को निर्धारित तरीके से प्रत्युत्तर में विवरण भेजेगा जिसमें कारण होंगे जिस पर उसे अपने आवेदन पर भरोसा है और यदि वह ऐसा नहीं करता तो ऐसा माना जाएगा कि उसने अपने आवेदन का परित्याग कर दिया है।
- अधिनियम के तहत जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र पेड़ों और वाईन के मामले में नौ वर्षों के लिए वैध होगा और अन्य फसलों के मामले में छ: वर्षों के लिए मान्य होगा और इसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करने पर शेष अवधि के लिए इसकी समीक्षा और नवीकरण किया जाएगा शर्त यह है कि कुल मान्य अवधि निम्नलिखित से अधिक नहीं होगी :-
- पेड़ों और अंगूर की लता के मामले में किस्म के पंजीकरण की तारीख से अठारह वर्ष;
- वर्तमान किस्म के मामले में, बीज अधिनियम, 1966 के तहत केन्द्र सरकार द्वारा उस किस्म की अधिसूचना की तारीख से पन्द्रह वर्ष; और
- अन्य मामलों में किस्म के पंजीकरण की तारीख से पन्द्रह वर्ष।
- इस अधिनियम के तहत किस्म का कोई पंजीकरण नहीं कियो जाएगा यदि सार्वजनिक व्यवस्था या सार्वजनिक नैतिकता या मानव पशु और पौधों के जीवन स्वास्थ्य की रक्षा करने या वातावरण के प्रति गम्भीर पूर्वाग्रह से बचने के लिए ऐसी किस्म का वाणिज्यिक दोहन का निषेध अनिवार्य हो।
- अधिनियम के तहत कृषकों के अधिकार निम्नलिखित हैं :-
- किसान जिसने नई किस्म उगाया या विकसित किया है वह पंजीकरण और किस्म के उत्पादक के तौर पर उसी तरह संरक्षण का हकदार होगा;
- किसान की किस्म पंजीकरण के लिए हकदार होगी;
- किसान जो चयन और संरक्षण के माध्यम से भूमिप्रजाति वन्य को आर्थिक पौधों के सापेक्ष हैं के वांशिक संसाधनों के संरक्षण और उनके सुधार में लगा हुआ है, वह जीन निधि से निर्धारित तरीके से मान्यता और पुरस्कार का हकदार होगा।
- किसान अपना फार्म उत्पाद जिसमें इस अधिनियम के तहत संरक्षित किस्म के बीज शामिल है की बचत, उपयोग, बुआई, पुनर्बुआई, विनिमय, हिस्सा या बिक्री करने के लिए उसी तरह हकदार होगा जैसा कि वह इस अधिनियम के लागू होने के पहले हकदार था।
- किसी भी समय किस्म के पंजीकरण का प्रमाणपत्र जारी करने की तारीख से तीन वर्ष समाप्त होने के बाद कोई भी इच्छुक व्यक्ति यह दोष लगाते हुए कि किस्म की जनता के लिए बीज की आवश्यकता या अन्रू प्रजनक सामग्री की आवश्यकता पूरी नहीं हुई है या बीज या किस्म की अन्य सामग्री उचित मूल्य पर जनता के लिए उपलब्ध नहीं है और बीज की अन्य प्रजनक सामग्री का उत्पादन वितरण और बिक्री करने के लिए अनिवार्य लाइसेंस प्रदान करने के लिए अनुरोध कर सकता है। अनिवार्य लाइसेंस की अवधि अलग-अलग मामले में अलग-अलग होती है इसमें सगर्भता अवधि और अन्य संगत कारकों को ध्यान में रखा जाता है परन्तु किसी भी मामले में उस किस्म की संरक्षण की शेष अवधि से अधिक नहीं होगी।
- इस अधिनियम के तहत स्थापित अधिकार का एक व्यक्ति द्वारा उल्लंघन किया जाता है :-
- जो इस अधिनियम के तहत पंजीकृत किस्म का उत्पादक न हो या पंजीकृत एजेंट या उस किस्म का पंजीकृत लाइसेंस धारक न हो और वह इसके उत्पादक की अनुमति के बिना या पंजीकृत लाइसेंस के क्षेत्र के भीतर या रजिस्टर एजेंसी की अनुमति के वगैर किस्म की बिक्री, निर्यात, आयात या उत्पादन पंजीकृत लाइसेंस धारक या पंजीकृत एजेंट के बिना करता है जैसा भी मामला हो;
- ऐसी किस्म का वर्ग देकर जो किसी अन्य किस्म का उपयोग, बिक्री, निर्यात, आयात या उत्पादन करता है जो उस वर्ग की किस्म जो इस अधिनियम के तहत इस तरह से पंजीकृत है कि सामान्य जनता के मन में ऐसी पंजीकृत किस्म को पहचानने में दुविधा उत्पन्न करता है के समान हो या धोखे से एक समान लगता हो।
- कोई व्यक्ति जो किसी झूठा वर्ग किस्म के लिए देता है और देश का झूठा नाम या जगह का या इस अधिनियम के तहत पंजीकृत किस्म के उत्पादक का झूठा नाम व पता ऐसी किस्म का व्यापार करने के दौरान विनिर्दिष्ट करता है उसका कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
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