भविष्य निधि से संबंधित महत्वपूर्ण विधान है कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (ईपीएफ एण्ड एमपी एक्ट)। अधिनियम को अधिनियमित करने का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक कर्मगारों के लिए उनकी सेवानिवृत्ति के बाद और मृत्यु होने की दशा में उनके आश्रितों के लिए भविष्य के लिए व्यवस्था करना था। यह वृद्धावस्था, सेवानिवृत्ति, बरर्खास्तगी, छटाई या कर्मगार की मृत्यु हो जाने पर यह कर्मगारों और उनके आश्रितों को बीमा प्रदान करता है। यह प्रत्येक प्रतिष्ठान के लिए प्रयोज्य है जो इस अधिनियम की अनुसूची I में विनिर्दिष्ट एक या अधिक उद्योगों में लगा हुआ है या कोई कार्यकलाप जो केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया गया है और जिसमें 20 या अधिक व्यक्तियों को लगाया गया है।
तथापि, अधिनियम ऐसे किसी प्रतिष्ठान के लिए प्रयोज्य नहीं होगा :-
- जो सहकारिता समिति अधिनियम 1912 के तहत या सहकारी समितियों से संबंधित किसी राज्य में कुछ समय के लिए लागू किसी अन्य कानून के तहत जिसमें 50 से कम व्यक्तियों को लगाया गया है और बिना विद्युत सहायता के कार्य करता है; या
- जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार का है या नियंत्रणाधीन है और जिसके कर्मचारी अंशदायी भविष्य निधि के हकदार हैं या वृद्धा व्यक्ति किसी योजना के अनुसार या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम ऐसे लाभों को शासित करते हैं; या
- जिसकी स्थापना किसी केन्द्रीय प्रादेशिक या राज्य अधिनियम के अधीन की गइ है जिसके कर्मचारी अंशदायी भविष्य निधि के हकदार है, या किसी योजनुसार या नियम जो अधिनियम के तहत बनाए गए हैं, ऐसे लाभों को शासित करते हैं; या
- नया स्थापित जब तक कि ऐसे प्रतिष्ठान की स्थापना किए जाने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त न हो जाए।
अधिनियम भारत सरकार द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के माध्यम से प्रशासित होता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सदस्यों की तर्ज पर और जिस प्रमात्रा में यह लेनदेन करता है उसकी तर्ज पर विश्व में सबसे बड़ी निधि संस्था है। यह श्रम मंत्रालय के नियंत्रणाधीन स्वायत्तशासी त्रिपक्षीय निकाय और जिसका मुख्यालय दिल्ली में है। इसका लक्ष्य अपने सतत प्रयासों और अनुपालन की बढ़ती मानक और अपने सदस्यों को लाभ प्रदाय प्रणाली के माध्यम से समृद्ध और गुणवत्तायुक्त सार्वजनिक रूप से प्रबंधित वृद्धावस्था आय सुरक्षा प्रदान करना है। इस तरह से यह देश की आर्थिक और सामाजिक खुशहाली में योगदान देना चाहती है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन केन्द्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा तैयार की गई नीतियों की देखरेख में कार्य करता है जिसका अध्यक्ष केन्द्रीय श्रम मंत्री होता है। बोर्ड के मुख्य कार्य हैं :-
- बोर्ड में सृजित और प्रदत्त निधियों को प्रवृत्त करना और उसके प्रासंगिक कार्य करना।
- निर्धारित प्रपत्र और तरीके से आय और व्यय का लेखा रखना।
- योजनाओं के प्रशासन के लिए प्राधिकरण देना।
- संगठन के निष्पादन संबंधी सरकार का लेखापरीक्षित लेखा टिप्पणियों सहित और वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करना।
अधिनियम के मुख्य प्रावधान हैं :-
- अधिनियम का लक्ष्य फैक्टरियों और अन्य प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिए भविष्य निधियों, परिवार पेंशन निधि और जमा सहबद्ध बीमा निधियों की स्थापना करने की व्यवस्था करता है। तदनुसार अधिनियम के अधीन तीन योजनाएं कार्य कर रही हैं। ये योजनाएं मिलकर कर्मचारियों को वृद्धावस्था और उत्तरजीविता लाभ, एक दीर्घावधिक संरक्षण और कर्मचारी को तथा उसकी मृत्यु होने के बाद उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा और समय पर अग्रिम प्रदान करती हैं इनमें बीमारी के दौरान अग्रिम, सदस्यता की अवधि के दौरान रिहायशी आवास की खरीद। निर्माण के लिए अग्रिम शामिल हैं। ये तीन योजनाएं निम्नानुसार हैं :-
- केन्द्रीय सरकारी, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा जिन भू-भागों के लिए यह अधिनियम विस्तारित किया जाता है उनके लिए केन्द्रीय न्यासी बोर्ड का गठन कर सकती है। बोर्ड के अपने कार्यों के निष्पादन में सहायता करने के लिए सरकार कार्यकारी समिति का गठन भी कर सकती है।
- अंशदान जो नियोक्ता द्वारा निधि को भुगतान किया जाएगा वह मूल मजदूरी, महंगाई भत्तों और प्रतिधारण भत्ता (यदि कोई हो) जो उस समय प्रत्येक कर्मचारी को भुगतान योग्य हैं का आठ और एक तिहाई प्रतिशत होगा। जबकि कर्मचारियों को अंशदान उसके संबंध में नियोक्ता द्वारा भुगतान योग अंशदान के बराबर होगा और यदि कोई कर्मचारी चाहता है एवं इसके लिए योजना में प्रावधान किया जाता है वह राशि उसकी मूल मजदूरी, महंगाई भत्तों एवं प्रतिधारण भत्ता (यदि कोई हो) का आठ और एक तिहाई प्रतिशत से अधिक हो सकता है, बशर्तें कि नियोक्ता अधिनियम के तहत भुगतान योग्य अपने अंशदान से अधिक अंशदान का भुगतान करने के लिए बाध्य न हो।
- केन्द्र सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा इस अधिनियम द्वारा ऐसे न्यायाधिकरण को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और कार्य निष्पादन करने के लिए एक या अधिक कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करती है और ऐसा प्रत्येक न्यायाधिकरण का न्यायाधिकरण का गठन करने वाली अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट ऐसे क्षेत्रों में स्थित प्रतिष्ठानों के संबंध में न्यायाधिकार होगा।
- प्रतिष्ठान के संबंध में कोई नियोक्ता जिसके लिए कोई योजना लागू होती है केवल निधि को किसी अंशदान का भुगतान करने के अपने दायित्व के कारण या इस अधिनियम या योजना के तहत किसी प्रभार के कारण किसी कर्मचारी की मजदूरी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम करेगा जिसके लिए यह योजना लागू होती है या लाभ की कुल मात्रा वृद्धावस्था पेंशन उपदान भविष्य निधि की प्रकृति में या जीवन बीमा जिसके लिए कर्मचारी हकदार है।
- कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के तहत उसके द्वारा किया जाने वाला किसी भुगतान से बचने के लिए या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा भुगतान करने के बचने में समर्थ बनाने के लिए जानबूझकर किसी झूठा विवरण प्रस्तुत करना या ऐसा करने के लिए उकसाता है या गलत प्रस्तुतीकरण देता है, उसको कारावास की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
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