व्यापार संघ कामगारों का एक स्वैच्छिक संघ है जो किसी व्यापार विशेष का या कम्पनी का होता है और इसका गठन सामूहिक कार्य के जरिए उनके हितों और कल्याण का संवर्धन और संरक्षण करने के लिए किया जाता है। नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच संबंध को संतुलित करने और सुधारने के लिए वे अति उपयुक्त संगठन होते हैं। उनका गठन न केवल कामगारों की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है अपितु उनमें अनुशासन और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए भी किया जाता है। उनका लक्ष्य है :-
- कामगारों के लिए उचित मजदूरी हासिल करना और पदोन्नति एवं प्रशिक्षण के लिए उनके अवसरों का संवर्धन करना।
- सेवाकाल की सुरक्षा संरक्षित करना और कार्यपरिस्थिति में सुधार लाना
- कामगारों के कार्य और जीवन स्तर में सुधार लाना
- उन्हें शैक्षिक, सांस्कृतिक और मनोरंजक सुविधाएं मुहैया कराना
- कामगारों की समझदारी बढ़ाने द्वारा प्रौद्योगिकीय विकास सुसाध्य बनाना
- उन्हें उत्पादन, उत्पादकता, अनुशासन और उच्च स्तरीय जीवन में सुधारने के लिए सहायता करना
- व्यक्तिगत और सामूहिक कल्याण संवर्धित करना इस प्रकार से कामगारों के हितों को उद्योग के हितों से परस्पर जोड़ना।
भारत में पहला संगठित ट्रेड यूनियन का गठन 1918 में किया गया था और तब से उनका विस्तार देश के लगभग सभी औद्योगिक केन्द्रों में हो गया है। इन ट्रेड यूनियनों को विनियमित करने वाला विधान भारतीय ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 है। यह अधिनियम ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण, उनके अधिकार उनका दायित्व और उत्तरदायित्व के संबंधित कार्य करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि उनकी निधियों का उचित उपयोग हो। यह पंजीकृत ट्रेड यूनियनों को कानूनी एवं कॉर्पोरेट का दर्जा प्रदान करता है। उन्हें सिविल और आपराधिक अभियोगों से भी संरक्षण प्रदान करता है ताकि वे कार्मिक वर्ग के लाभों के लिए अपने वैधिक कार्यकलाप जारी रख सकें। यह अधिनियम न केवल कामगारों के यूनियन के लिए प्रयोज्य है अपितु नियोक्ता संघ के लिए भी प्रयोज्य है। इसका विस्तार पूरे भारत में है। और कुछ अधिनियम अर्थात सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 सरकारी समिति पंजीकरण अधिनियम, 1912 और कम्पनी अधिनियम, 1956 किसी पंजीकृत ट्रेड यूनियन के लिए प्रयोज्य नहीं होंगे और इस प्रकार के किसी अधिनियम के अधीन ऐसे किसी ट्रेड यूनियन का पंजीकरण अमान्य हो जाएगा।
अधिनियम श्रम मंत्रालय द्वारा इसके औद्योगिक संबंध प्रभाग के माध्यम से प्रशासित होता है। प्रभाग का कार्य विवाद निपटान के लिए संस्थागत ढांचा का सुधार और औद्योगिक संबंध से सबद्ध श्रम कानूनों में संशोधन करना है। यह केन्द्रीय औद्योगिक संबंध मशीन री (सीआईआरएम) के निकट समन्वय में यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है कि देश को स्थिर मर्यादित और सक्षम कार्य बल प्राप्त हो, जो शोषण मुक्त हो और उच्च प्रतिफल उत्पन्न करने में सक्षम हो। सीआईआरएम जो श्रम मंत्रालय का अधीनस्य कार्यालय है, मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय) [सीएलसीसी] संगठन के रूप में भी जाना जाता है। सीआईआर का अध्यक्ष मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय) होता है। इसे औद्योगिक संबंध बनाए रखने, श्रम कानूनों का प्रवर्तन और केन्द्रीय परिधि में ट्रेड यूनियन सदस्यता के सत्यापन का कार्य सौंपा गया है। यह निम्नलिखित के माध्यम से सद्भावपूर्ण औद्योगिक संबंध सुनिश्चित करता है:-
- केन्द्रीय परिधि में औद्योगिक संबंध पर निगरानी रखने;
- विवादों का निपटान करने के लिए औद्योगिक विवादों में हस्तक्षेप, मध्यस्थता और समझौता करने;
- हड़ताल की धमकी और लॉक आउट की स्थिति में हड़ताल और लॉक आउट को रोकने के लिए हस्तक्षेप
- समझौता और निर्णयों का क्रियान्वयन।
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 के अनुसार, 'ट्रेड यूनियन' का अर्थ है चाहे अस्थाई रूप से या स्थाई रूप से कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच संबंध को या कामगारों और कामगारों के बीच या नियोक्ताओं और नियोक्ताओं के बीच संबंध को विनियमित करने या किसी व्यापार या कारोबार के आचरण को प्रतिबंधित करने, और दो या अधिक ट्रेड यूनियनों को शामिल करने के लिए गठित किया जाता है। अधिनियम के मूल प्रावधान निम्नलिखित हैं:-
- अधिनियम में ट्रेड यूनियन पंजीयक के साथ ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण की व्यवस्था है जिसकी स्थापना विभिन्न राज्यों में की गई है, जैसाकि पंजीयक का कार्यालय (ट्रेड यूनियन) जिसकी स्थापना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली द्वारा की गई है। ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण के लिए सात या इससे अधिक यूनियन के सदस्य निर्धारित प्रपत्र में ट्रेड यूनियन पंजीयक के पास अपना आवेदन भेज सकते हैं। आवेदन के साथ ट्रेड यूनियन के नियमों की प्रति भेजी जाएगी और एक विवरण जिसमें निम्नलिखित बातों का उल्लेख होगा:- (i) आवेदन करने वाले सदस्यों का नाम, व्यवसाय और पता; (ii) ट्रेड यूनियन का नाम और इसके मुख्यालय का पता; (iii) ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 में दिए गए प्रारूप के अनुसार शीर्षक ट्रेड यूनियन की कार्यकारिणी सदस्यों के नाम, उनकी आयु पता और व्यवसाय। संतुष्ट हो जाने पर कि यूनियन ने अधिनियम को सभी अपेक्षाओं का पालन किया है, पंजीयक ट्रेड यूनियन का पंजीकरण करेगा। उसके बाद उस ट्रेड यूनियन के पंजीकरण के निष्कर्ष प्रमाणपत्र के रूप में पंजीयक निर्धारित प्रपत्र में पंजीकरण जारी करेगा।
- पंजीकृत ट्रेड यूनियनों (कामगारों और नियोक्ताओं) को अपनी सदस्यता, सामान्य निधियों, आय के स्रोतों और व्यय के मदों और अपनी परिसम्पत्तियों और देयताओं के संबंध में वार्षिक सांविधिक विवरणियां प्रस्तुत करना आवश्यक है, जो बदले में अपने राज्य का समेकित विवरणी निर्धारित प्रोफार्मा में श्रम ब्यूरो, श्रम और रोजगार मंत्रालय को प्रस्तुत करता है। श्रम ब्यूरो विभिन्न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से वार्षिक विवरणियां प्राप्त करने के बाद अखिल भारत सांख्यिकी का समेकन
करता अपने प्रकाशन जिसका शीर्षक 'भारत में ट्रेड यूनियन' है के माध्यम से और अपने अन्य नियत प्रकाशनों के माध्यम से वितरित करता है।
- पंजीकृत ट्रेड यूनियन की सामान्य निधि को अधिनियम में विनिर्दिष्ट के अलावा किसी अन्य वस्तुओं पर खर्च नहीं किया जाएगा। पंजीकृत ट्रेड यूनियन अलग से उस फंड के लिए लगाए गए या भुगतान किए गए अंशदान से अपने सदस्यों के सामाजिक और राजनैतिक हितों के संवर्धन के लिए अलग निधि का गठन भी कर सकता है। ऐसी निधि में अंशदान करने के लिए किसी सदस्य को बाध्य नहीं किया जा सकता है और जो सदस्य उपर्युक्त निधि में अंशदान नहीं करता है उसे ट्रेड यूनियन के किसी भी लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा या उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी संबंध में किसी अक्षमता में नहीं रखा जाएगा या किसी प्रकार की अलाभकर स्थिति में उक्त निधि में अंशदान को लेकर नहीं रखा जाएगा।
- किसी पद धारक सदस्य या पंजीकृत ट्रेड यूनियन का सदस्य अधिनियम में यथा विनिर्दिष्ट ट्रेड यूनियन के सदस्यों के बीच किए गए करार के संबंध में ऐसे किसी उद्देश्यों को बढ़ाने के लिए भारतीय दण्ड संहिता के अधीन सजा नहीं दी जाएगी जब तक करार अपराध के लिए किया गया करार न हो।
- किसी पंजीकृत ट्रेड यूनियन या किसी पदधारक या इसके सदस्य के विरुद्ध व्यापार संबंधी किए गए किसी चिन्तन या बढ़ावा के कार्य के संबंध में जिसका ट्रेड यूनियन का सदस्य एक पक्ष है केवल इस आधार पर कि ऐसा कार्य कुछ अन्य व्यक्ति को रोजगार के संविदा को तोड़ने के लिए प्रेरित करता है या यह व्यापार अन्य व्यक्ति के कारोबार या रोजगार में हस्तक्षेप या किसी अन्य व्यक्ति के अपने श्रम की पूंजी को अपनी इच्छानुसार बेचने में हस्तक्षेप करता है, सिविल अदालत में कोई अभियोग या अन्य प्रक्रिया नहीं की जाएगी।
- पंजीकृत ट्रेड यूनियन की खाता बही और उसके सदस्यों की सूची का निरीक्षण पद धारक या वैसे समय में ट्रेड यूनियन के सदस्य जैसा कि ट्रेड यूनियन के नियमों में व्यवस्था की जाती है, द्वारा किया जा सकता है।
- कोई व्यक्ति पद धारक के रूप में सदस्य या कार्यकारी या पंजीकृत केन्द्र यूनियन का अन्य पदधारक चुने जाने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि- (i) उसकी आयु 18 वर्ष की नहीं हुई है,; (ii) उसे नैतिक अपराध संलिप्त होने के किसी अपराध में भारत के किसी अदालत द्वारा सजा हुई हो जब तक कि उसके रिहा होने के बाद पांच वर्ष न बीत जाए।
- प्रत्येक पदधारक या अन्य व्यक्ति जो ट्रेड यूनियन के नियमों से बंधा है, उसको जुर्माना होगा यदि :-
- अधिनियम या इसके किसी प्रावधान द्वारा अपेक्षित किसी सूचना को देने कोई विवरण भेजने या अन्य दस्तावेज देने में किसी पंजीकृत ट्रेड यूनियन की ओर से गलती की जाती है; या
- कोई व्यक्ति जानबूझकर सामान्य विवरण में या किसी नियमों की प्रति में या से या पंजीयक के पास भेजे गए नियमों में फेर बदल करने में झूठी प्रविष्टि करता या कुछ तत्व छोड़ या ऐसा करने के लिए उकसाता है।
- कोई व्यक्ति धोखा देने के मकसद से पंजीकृत ट्रेड यूनियन के किसी सदस्य को या किसी व्यक्ति को जो ऐसे ट्रेड यूनियन का सदस्य बनना चाहता है या आवेदन करता हैं उसे ट्रेड यूनियन के नियमों की प्रति होने का दावा करते हुए देता है या उसकी जानकारी में कोई फेर बदल, या विश्वास का कारण होता है कि वह ऐसे नियमों या लागू फेर बदल की सही प्रति नहीं है या कोई व्यक्ति इसी प्रकार के मकसद से अपंजीकृत ट्रेड यूनियन के किसी नियम की प्रति किसी व्यक्ति को यह बताकर कि ऐसे नियम पंजीकृत ट्रेड यूनियन के नियम हैं।
- कोई पंजीकृत ट्रेड यूनियन अपने सदस्यों की कुल संख्या की कम से कम एक तिहाई की सहमति से और अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए इसका नाम बदल सकता है। पंजीकृत ट्रेड यूनियन के नाम में परिवर्तन इसके किसी अधिकार या दायित्व को प्रभावित नहीं करेगा या यूनियन द्वारा या इसके विरुद्ध किसी प्रक्रिया को दोषयुक्त नहीं करेगा और कोई कानूनी प्रक्रिया, जिसे जारी रहना चाहिए था या इसके पहले के नाम द्वारा या विरुद्ध शुरू किया जाना था, वह इसके नया नाम द्वारा जारी रहेगा।
- कोई दो या अधिक पंजीकृत ट्रेड यनियन को एक ट्रेड यूनियन के रूप में समामेलित किया जा सकता है इसमें ऐसे ट्रेड यूनियनों या उनमें से एक की निधियों को बिना समाप्त किए या विभाजित किए ही किया सकता है बशर्ते कि प्रत्येक या हरेक ट्रेड यूनियन के कम से कम आधा सदस्य जो वोट देने के हकदार हैं, अपना मत देते हैं और दिए गए मत में से काम से कम साठ प्रतिशत प्रस्ताव के पक्ष में होते हैं। ऐसा समामेलन ऐसे किसी यूनियन के किसी अधिकार या ऋणदाता के किसी अधिकार या उनमें से किसी एक या पूर्वाग्रह नहीं रखेगा।
- जब एक पंजीकृत ट्रेड यूनियन को भंग किया जाता है सात सदस्यों द्वारा और ट्रेड यूनियन सचिव द्वारा हस्ताक्षरित भंग करने की सूचना, भंग करने के चौदह दिनों के भीतर पंजीयक को भेजी जाएगी और यदि वह इस बात से संतुष्ट होता है कि ट्रेड यूनियन के नियमों के अनुसार भंग किया गया है, उसका पंजीकरण उसके द्वारा किया जाएगा और उस पंजीकरण की तारीख से भंग माना जाएगा।
तथापि, ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 में समय-समय पर संशोधन किया गया है और अति महत्वपूर्ण ट्रेड यूनियन (संशोधन) अधिनियम, 2001 है। इस अधिनियम को अधिक पारदर्शिता लाने और भारत में व्यापार संघवाद को अधिक समर्थन प्रदान करने के लिए किया गया है। ट्रेड यूनियन (संशोधन) अधिनियम, 2001 की कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:-
- कामगारों के किसी ट्रेड यूनियन का पंजीकरण तब तक नहीं होगा, जब तक कम से कम 10 प्रतिशत या 100 प्रतिशत, जो भी कम हो, शर्त यह है कि कम से कम 7 कामगार प्रतिष्ठान या उद्योग में कार्यरत हों या नियुक्त हों जिसके साथ यह संबंधित है, वे ऐसे ट्रेड यूनियन के सदस्य हों, जिस तारीख को पंजीकरण का आवेदन किया जाता है।
- कामगारों के पंजीकृत ट्रेड यूनियन में हमेशा 10 प्रतिशत या 100 प्रतिशत कामगारों का होना जारी रहेगा, इसमें में जो भी कम हो, बशर्ते कि सदस्यों के रूप में जिसके साथ यह संबंधित हो कम से सात व्यक्ति प्रतिष्ठान या उद्योग में कार्यरत या नियुक्त है।
- अपंजीकरण या पंजीकरण के पुनरुद्धार के लिए औद्योगिक न्यायाधिकरण औद्योगिक न्यायाधिकरण/श्रम अदालत के समक्ष अपील दायर करने की व्यवस्था की गई है।
- पंजीकृत ट्रेड यूनियन के सभी पदधारक, पदधारकों की कुल संख्या के एक-पांच से कम या पांच, जो भी कम हो वे ऐसे व्यक्ति होंगे जो वास्तव में प्रतिष्ठान या उद्योग में कार्यरत या नियुक्त होंगे जिसके साथ ट्रेड यूनियन संबंधित है।
- ट्रेड यूनियन के सदस्यों द्वारा न्यूनतम अंशदान ग्रामीण कामगारों के लिए कम से कम एक रुपए प्रति वर्ष , अन्य असंगठित क्षेत्रों में कामगारों के लिए तीन रुपए प्रति वर्ष और अन्य सभी मामलों में बारह रुपए प्रति वर्ष तय किया गया है।
- ऐसे कर्मचारी जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं जिसकी छंटनी हो गई है उन्हें संबंधित ट्रेड यूनियन में पदधारण करने के प्रयोजन से बाध्य व्यक्ति नहीं समझा जाएगा।
- अपने सदस्यों के सामाजिक और राजनैतिक हितों के संवर्धन के लिए यूनियनों को अलग राजनैतिक निधि स्थापित करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।
इसलिए ट्रेड यूनियन विधान उनका व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करता है उनकी गुणात्मकता कम करता एवं औद्योगिक संगठन और अर्थव्यवस्था में आंतरिक प्रजातंत्र संवर्धित करता है। इस प्रकार से ट्रेड यूनियनों ने इस प्रकार देश के आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक ढांचे में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। |