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| बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 को कुछ प्रतिष्ठानों में नियुक्त व्यक्तियों को लाभ या उत्पादकता के आधार पर और उससे संबंधित मामलों के लिए बोनस के भुगतान की व्यवस्था करने के लिए लागू किया गया था। यह अधिनियम निम्नलिखित के लिए लागू होता है:- (i) फैक्टरी अधिनियम, 1948; के तहत यथा परिभाषित प्रत्येक फैक्टरी और (ii) अन्य प्रत्येक प्रतिष्ठान, जिनमें लेखाकरण वर्ष के दौरान किसी भी दिन बीस या अधिक व्यक्ति नियुक्त हैं। तथापि, सरकार सरकारी राजपत्र में दो माह की अधिसूचना देने के बाद दूसरे अन्य फैक्टरी या प्रतिष्ठान जहां बीस से कम परन्तु दस से अधिक व्यक्ति नियुक्त हों इस अधिनियम को लागू कर सकती है।
अधिनियम का प्रवर्तन केन्द्रीय औद्योगिक मशीनरी (सीआईआरएम) के जरिए किया जाता है। सीआईआरएम श्रम मंत्रालय का सहबद्ध कार्यालय है और यह मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय) [सीएलसीसी] संगठन के रूप में भी जाना जाता है। इसका अध्यक्ष मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय) होता है।
अधिनियम के मुख्य प्रावधान हैं:-
- अधिनियम के अनुसार शब्द 'कर्मचारी' का अर्थ है ''कोई व्यक्ति जिसकी नियुक्ति पारिश्रमिक या मजदूरी पर जो तीन हजार पांच सौ प्रतिमाह से अधिक न हो किसी फैक्टरी में कौशल या अकुशल, मैनुअल, पर्यवेक्षण, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकी या लिपिकीय कार्य भाड़े पर या पुरस्कार के लिए चाहे नियुक्ति के निबंधन में स्पष्ट किया गया हो या इसमें निहित हो।''
- कर्मचारी अपने नियोक्ता द्वारा लेखाकरण वर्ष में बोनस के भुगतान के लिए हकदार होता है बशर्ते कि उसने उस वर्ष कम से कम 30 कार्य दिवसों में
कार्य किया हो।
- नियोक्ता न्यूनतम बोनस कर्मचारी द्वारा वर्ष में अर्जित पारिश्रमिक या मजदूरी के 8.33 प्रतिशत की दर से या एक सौ रुपए जो भी अधिक हो, भुगतान करेगा। यहां यह आवश्यक नहीं है कि नियोक्ता के पास लेखा कर्ज में कोई आबंटन योग्य अधिशेष हो। तथापि, जहां लेखा वर्ष के आरंभ में कर्मचारी 15 वर्ष की आयु प्राप्त नहीं किया है न्यूनतम भुगतान योग्य बोनस 8.33 प्रतिशत या साठ रुपए जो भी अधिक हो, होता है।
- किसी लेखा वर्ष में यदि आबंटन योग्य अधिशेष कर्मचारी को भुगतान योग्य न्यूनतम बोनस की राशि से अधिक होता है तो नियोक्ता ऐसे न्यूनतम बोनस के लिए कर्मचारियों द्वारा अर्जित पारिश्रमिक या मजदूरी के 20 प्रतिशत से कम राशि का (बोनस भुगतान) देनदार है।
- आबंटन योग्य अधिशेष के अभिकलन में निर्धारित या विहित राशि को ध्यान में रखा जाएगा। दूसरे शब्दों में:- (i) यदि किसी लेखा वर्ष में आबंटन योग्य अधिशेष प्रतिष्ठान में कर्मचारी को देय अधिकतम बोनस की राशि से अधिक होता है तब अधिक अधिशेष को अगले वर्ष के लिए अग्रेनीत किया जाता है यह चार लेखा वर्षों तक बोनस भुगतान के प्रयोजन से किया जाता है; (ii) यदि उस वर्ष के संबंध में कोई अधिशेष न हो या कम अधिशेष हो तब ऐसी कमी को अगले लेखा वर्ष में निर्धारण हेतु अग्रेनीत किया जाता है। यह चार लेखा वर्ष तक किया जाता है।
- जहां किसी लेखा वर्ष में किसी राशि को अग्रेनीत किया गया और निर्धारित किया गया या समाप्त किया है तब अगले लेखा वर्ष के लिए बोनस की गणना करने में निर्धारित राशि या विहित राशि जिसे पहले के लेखा वर्ष से अग्रेनीत किया गया है उस पर पहले विचार किया जाएगा।
- इस अधिनियम के तहत कर्मचारी को बोनस के रूप में भुगतान योग्य सभी राशि अपने नियोक्ता द्वारा नकद रूप में जिस दिन से या पुरस्कार प्रवर्तनीय होता है उस दिन से एक माह के भीतर या निपटान का कार्यरत होने, किसी विवाद के संबंध में जो बोनस भुगतान के संबंध में हो, भुगतान किया जाता है। परन्तु किसी अन्य मामले में इसका भुगतान लेखा वर्ष समाप्त होने से आठ माहों के भीतर किया जाएगा।
तथापि, नियोक्ता द्वारा आवेदन प्राप्त करने के बाद पर्याप्त कारण होने पर उक्त आठ माह की अवधि को और अधिक अवधि के लिए या उचित अवधि तक बढ़ाने का आदेश दे सकती है यह ऐसा हो को विस्तारित अवधि किसी भी हालत में दो वर्ष से अधिक न हो।
- कर्मचारी बोनस प्राप्त करने से अयोग्य ठहराया जा सकता है यदि उसे निम्नलिखित कारणों से सेवा से हटाया जाता है:- (i) धोखा धड़ी; या (ii) दंगाईया उग्र व्यापार जब वह प्रतिष्ठान के परिसर में हो; या (iii) चोरी, प्रतिष्ठान की किसी सम्पत्ति का दुर्विनियोजन या तोड़-फोड़।
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