विज्ञापन संवर्धन का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसमें फर्म द्वारा उत्पादित उत्पाद या सेवा के बारे में लोगों को जागरूक बनाने तथा उसकी ओर उनका अनुकूल झुकाव अभिप्रेरित करने के प्रयोजनार्थ लिखित या मौखिक संदेश तैयार करना तथा प्रदत्त मीडिया के माध्यम से उनका प्रसार करना शामिल है। यह संभावी ग्राहकों को ''बड़े पैमाने'' पर सूचना का त्वरित एवं मितव्ययी प्रसार करने का प्रभावी माध्यम है। विज्ञान की प्रमुख विशिष्टताएं निम्नलिखित हैं :-
- यह प्रस्तुतीकरण का अवैयक्तिक स्वरूप है क्योंकि इसमें ग्राहकों के साथ आमने-सामने कोई प्रत्यक्ष सम्पर्क नहीं होता है।
- यह संसूचना का प्रदत्त स्वरूप है क्योंकि विज्ञापनदाता को विज्ञापन के लिए उसके द्वारा किराए पर लिए गए स्थान या समय के लिए भुगतान करना पड़ता है।
- यह कोई अभिज्ञात प्रयोजकों द्वारा किया जाता है अर्थात जनता को उस उत्पादक या फर्म की जानकारी दी जानी है, जो अपने उत्पाद का विज्ञापन कर रही है।
फर्म द्वारा विज्ञापन का निष्पादन निम्नलिखित मूलभूत उद्देश्यों से किया जाता है:-
- संभावी क्रेताओं को बाजार में किसी नए उत्पाद या सेवा की उपलब्धता के बारे में सूचित करना।
- लोगों को उत्पाद खरीदने के लिए अभिप्रेरित करना तथा इस प्रकार, उसके लिए मांग का सृजन तथा बाजार का विस्तार करना।
- अत्यधिक प्रतिस्पर्द्धा के होते बिक्री तथा बाजार अंश का अनुरक्षण करना। यह ग्राहक के मन में उत्पाद को प्रतिधारित रखने में भी सहायक है।
- लोगों तक पहुंच बनाना, जो संवर्धन के अन्य माध्यमों के लिए अगम्य हैं।
- किसी विशिष्टि उत्पाद की विभिन्न विशिष्टताओं तथा उपयोगों को स्पष्ट कर उसके बारे में ग्राहकों को शिक्षित करना।
- कम्पनी के सद्भाव का सृजन एवं उसका वर्धन करने में सहायता करना।
विज्ञापन की मुख्य किस्में हैं :-
- उत्पादन विज्ञापन :- यह विद्यमान उत्पादों या नए उत्पादों की बिक्री में सुधार लाने के लिए अभिकल्पित है।
- संस्थागत विज्ञापन :- इस का उद्देश्य उद्यम की प्रतिष्ठा, छवि या सद्भाव को सुधारना है।
- संरचनात्मक विज्ञापन :- इसका उद्देश्य मांग को प्रेरित करना, नए उत्पादों की शुरूआत करना, नए ग्राहकों को आकृष्ट करना तथा उत्पाद में डीलर की रुचि को प्रोत्साहन देना है। इसमें उत्पाद विज्ञापन तथा संस्थागत विज्ञापन, दोनों शामिल हैं।
- प्रतिस्पर्द्धी विज्ञापन :- इस तरह के विज्ञापन बाजार में उपलब्ध अन्य उत्पादों से विज्ञापित उत्पाद की श्रेष्टता स्थापित करने के लिए होते हैं। इन्हें लड़ाकू विज्ञापन भी कहा जाता है, इनका प्रयोजन बाजार में प्रतिस्पर्धा की लड़ाई से पार पाना होता है।
- विनाशकारी विज्ञापन :- प्रकृति में नकारात्मक होते हैं और इनका उद्देश्य दूसरे उत्पाद या व्यावसायियों की छवि और साख को खराब करना होता है।
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