बोनस का अभिप्राय है अतिरिक्त एकमुश्त आय जो अपने कर्मचारियों को संगठन द्वारा साधारणत: वार्षिक आधार पर दिया जाता है। यह कर्मचारियों को विशेष अवसरों जैसे त्योहारों, नया वर्ष या अन्य महत्वपूर्ण समारोहों में प्रदान किया जाता है। कुछ फर्म अपने कर्मचारियों को फर्म के उच्च निष्पादन में उनके योगदान के लिए संकेत के रूप में बोनस का वितरण करती है। उद्यम द्वारा किए गए ऐसे सभी ऐसे संकेत कर्मचारियों का प्रयास बढ़ाने में तथा संगठन में विश्वास बढ़ाने में सहायता करते हैं।
भारत में प्रतिष्ठान द्वारा बोनस का भुगतान बोनस भुगतान अधिनियम 1956 द्वारा अभिशासित होता है। अधिनियम प्रत्येक प्रतिष्ठान जो अधिनियम के अंतर्गत आता है, के नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को बोनस का भुगतान करने के लिए सांविधिक दायित्व अधिरोपित करता है। अधिनियम के अनुसार कर्मचारी शब्द का अर्थ है कोई भी व्यक्ति जो वेतन या मजदूरी के आधार पर जो प्रतिमाह निश्चित निर्धारित राशि से अधिक नहीं होती है, उद्योग में नियुक्त किया जाता है जो कुशल, अकुशल, शारीरिक, पर्यवेक्षण, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकीय या लिपिकीय कार्य पुरस्कार हेतु करता है।
यह अधिनियम ऐसे प्रत्येक फैक्टरी के लिए लागू होता है जहां 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और ऐसे प्रत्येक प्रतिष्ठान में जहां 20 या अधिक व्यक्ति नियुक्त है, किसी भी दिन लेखाकरण वर्ष के दौरान भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के तहत शामिल कर्मचारियों को छोड़कर, पत्तन एवं डाक कर्मगारों, यूनिवर्सिटी आदि के लिए लागू होता है।
अधिनियम के तहत लेखाकार वर्ष के प्रत्येक कर्मचारी अपने नियोक्ता द्वारा बोनस भुगतान का हकदार होता है बशर्तें कि यह इस शर्त के अधीन होगा कि उसने उस वर्ष कम से कम 30 कार्य दिवसों में कार्य किया हो। तथापि, यह बोनस नियोक्ता द्वारा केवल तब भुगतान योग्य होगा जब नियोक्ता को संगठन चलाने से लाभ होता है चूंकि बोनस इन लाभों में से भुगतान योग्य होता है। जहां कहां भी वेतन या मजदूरी एक निश्चित सीमा, जिसका उल्लेख किया जाता है, से अधिक होता है (प्रति वर्ष) तब ऐसे कर्मचारी को भुगतान योग्य बोनस की गणना इस तरह की जाएगी मानो उसका वेतन या मजदूरी उस विशेष राशि के बराबर था।
इसके अलावा अधिनियम में न्यूनतम और अधिकतम बोनस के भुगतान की व्यवस्था है और बोनस भुगतान को उत्पादन और उत्पादकता से जोड़ने की व्यवस्था है। प्रत्येक नियोक्ता कर्मचारी द्वारा वर्ष भर में अर्जित वेतन या मजदूरी को कम से कम 8.33 प्रतिशत की दर से बोनस का भुगतान करेगा या सौ रुपए जो भी अधिक हो। यहां यह आवश्यकता नहीं है कि नियोक्ता के पास आबंटन योग्य अधिशेष लेखाकरण वर्ष में हो। जबकि जब आबंटन योग्य अधिशेष कर्मचारी को भुगतान योग्य न्यूनतम बोनस की राशि से अधिक होता है तो नियोक्ता ऐसे बोनस के एवज में, कर्मचारी द्वारा अर्जित वेतन या मजदूरी के निश्चित भाग में उस राशि के समकक्ष बोनस का भुगतान करने के लिए बाध्य होता है।
बोनस के रूप में ऐसा लाभ कर्मचारी के लिए और अधिक परिश्रम करने और संगठन के विकास के लिए सर्वोत्तम योगदान करने हेतु प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है। |