
| |
|
|
 |
| |
|
 |
नकद प्रत्येक व्यापार की प्राणशक्ति होता है। यह किसी भी व्यापार को चलाने के लिए सबसे ज़रूरी परिसम्पत्ति होती है। सफल व्यापार के लिए सुव्यवस्थित नकद प्रवाह प्रबंधन अनिवार्य है। नकद प्रवाह का अभिप्राय है एक निर्दिष्ट अवधि में व्यापार में पैसा आने और जाने की स्थिति। यह कम्पनी की आय और व्यय का रिकॉर्ड है। यह व्यापार के नकद अन्त: प्रवाहों और नकद बहि: प्रवाहों के बीच अन्तर के रूप में परिकलित किया जाता है। नकद अन्तर्प्रवाह उपभोक्ताओं को की गई माल या सेवाओं की बिक्री से व्यापार में आने वाले धन के रूप में परिभाषित किया जाता है। जबकि नकद बहिर्प्रवाह व्यय की अदायगी के रूप में व्यापार से बाहर जाने वाले धन के संचलन के रूप में परिभ्ज्ञाषित किया जाता है।
कम्पनी के नकद प्रवाहों को निम्नलिखित में वर्गीकृत किया जा सकता है:-
- प्रचालनात्मक नकद प्रवाह:- प्रमुख कारोबारी कार्यकलाप के परिणामस्वरूप अर्थात् व्यापार के नियमित प्रचालनों के कारण व्यापार में नकद आता है और जाता है। उदाहरणार्थ, बिक्री से प्राप्तियां, कच्चा माल खरीदने पर हुआ व्यय इत्यादि।
- निवेश नकद प्रवाह :- आगे चलकर व्यापार को लाभान्वित करने वाले पूंजी व्यय, निवेश या अधिग्रहण करने के लिए प्राप्त या संवितरित नकद। उदाहरणार्थ, संयंत्र और मशीनरी में निवेश इत्यादि।
- वित्तीय नकद प्रवाह :- वित्तीय कार्यकलाप के परिणामस्वरूप प्रापत या संवितरित नकद जैसे कि ऋण प्राप्त करना या अदा करना, स्टॉक जारी करना या पुन: खरीद करना और लाभांश की अदायगी करना।
इसका प्रयोग आय या व्यापार की वृद्धि को जांचने के लिए किया जाता है। यदि आपके नकद प्रवाह की स्थिति बाधाग्रस्त है और आप अपने आपूर्तिकर्ताओं या ऋणदाताओं को अदायगी करने में या कर्मचारियों को भुगतान कर पाने में बहुत मुश्किल का सामना कर रहे है तो आपको अपना व्यापार बन्द कर पड़ सकता है। इसलिए, अपने नकद-प्रवाह का प्रबंधन करना बहुत ज़रूरी है ताकि आप अपने ऋण समय पर अदा कर सकें और यदि ज़रूरत हो तो भविष्य में दोबारा ले सके।
नकद प्रवाह के प्रबंधन का अर्थ है सही समय पर नकद अन्त: प्रवाहों की नियमित राशि बनाकर रखना था उनमें वृद्धि करना ताकि वे ज़रूरत पड़ने पर नकद परिव्ययों के लिए आसानी से उपलब्घ हो सकें। मुख्य उद्देश्य नकद-प्राप्तियों और उसके संवितरण के बीच समय अन्तराल को कम करना है। नकद –प्रवाहों के प्रबंधन के दोहरे उद्देश्य इस प्रकार हैं:-
- नकद संग्रहणों में तेज़ी लाना – नकद का संरक्षण करने और नकद शेष रखने की ज़रूरत को कम करने के लिए फर्म का लक्ष्य नकद संग्रहणों में तेज़ी लाना होता है। इस प्रयोजनार्थ निम्नलिखित तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं :
- ग्राहक से सुरक्षित विधियों जैसे डिमांड ड्राफ्ट, साख पत्र, विनिमय- हुण्डी इत्यादि के माध्यम से भुगतान प्राप्त करना।
- ग्राहकों को तत्काल भुगतान करने के लिए प्रेरित करने हेतु बिल या इन्वॉयस के साथ अपना पता लिखा लिफाफा भेजा जा सकता है।
- डाक संबंधी देरी से बचने के लिए शहर से बाहर के ग्राहकों के साथ कार्रवाई करते समय कूरियर सेवा, स्पीड पोस्ट इत्यादि जैसे संचार के तीव्र माध्यमों का प्रयोग किया जा सकता है।
- ऐसी कम्पनी के मामले में जिसकी विभिन्न स्थानों पर शाखाएं हों, कम्पनी ''विकेन्द्रित संग्रहण केन्द्र'' स्थापित कर सकती है। इसके अन्तर्गत, कम्पनी के उन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बैंक खाते होने है। जहां इसकी शाखाएं स्थित होती है। क्षेत्र विशेष के ग्राहकों को स्थानीय संग्रहण केन्द्र में भुगतान करना होता है और स्थानीय संग्रहण केन्द्र द्वारा एकत्रित चेक स्थानीय बैंक खाते में जमा किए जाते हैं।
- कम्पनी ''लॉक-बॉक्स प्रणाली'' का तरीका अपना सकती है। इसके अन्तर्गत कम्पनी डाकघर का लॉक-बॉक्स नामक बॉक्स किराए पर लेती है और यह महत्वपूर्ण संग्रहण केन्द्रों पर स्थित होता है। ग्राहकों को सीध ही लॉक-बॉक्स में भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है। कम्पनी के स्थानीय बैंकरों को बॉक्स से चेक निकालने और कम्पनी के खातों में जमा करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है।
- नकद-भुगतानों में देरी करना – इसका लक्ष्य यथा संभव नकद-भुगतान करने में धीमापन लाना है। ऐसा निम्नलिखित तरीकों की मदद से किया जा सकता है:
- कम्पनी को, इसके द्वारा आपूर्ति की गई वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए अधिकतम उधार प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
- भुगतान एकल केन्द्रीय खाते से किया जाना चाहिए।
- भुगतान करने में चेक की बजाय बैंक ड्राफ्ट का प्रयोग
- भुगतान ऐसे बैंक से किया जा सकता है जो कम्पनी के बैंक, जिसे अदायगी की जानी है, से दूर हो। इस तरह पारगमन समय बढ़ जाता है और फर्म इस देरी से लाभान्वित होगी।
- यदि कम्पनी को निर्धारित अवधि में ही भुगतान करना हो तो इसे निर्दिष्ट तिथि से पूर्व भुगतान नहीं करना चाहिए जब तक कि कम्पनी नकद डिस्काउंट के लिए पात्र न हो।
|
नकद प्रवाहों की कारगर प्रबंधन वयवस्था करने के लिए, कम्पनियों को नकद योजना बनाने की ज़रूरत होती है। यह नकद की योजना बनाने और उसके प्रयोग पर नियंत्रण रखने की तकनीक है। यह फर्म मौजूदा तथा भावी नकद प्रवाहों एवं ज़रूरतों का पूर्वानुमान लगाने में मदद करता है। यह नकद अधिशेषों और कमियों के बीच के अन्तराल को समनुरूप बनाएगा। कम्पनी की नकद संबंधी ज़रूरतों का आकलन करने के लिए उसके पास उपलब्ध सर्वोत्तम उपकरण है नकद-बजट तैयार करना। नकद बजट एक ऐसा विवरण है जिसमें एक ओर नकद प्राप्तियों (नकद अन्तर्प्रवाह) के अनुमानित स्रोत तथा दूसरी ओर नकद के विभिन्न उपयोग (नकद बहिर्प्रवाह) दर्शाए जाते हैं।
नकद अन्तर्प्रवाह के तहत सूचीबद्ध विभिन्न मदें :- नकद बिक्रियां ; उधारकर्ताओं से हुए संग्रहण; प्राप्त ब्याज/लाभांश; शेयरों या डिबेंचरों का निर्गमन; ऋणों या उधारों की प्राप्तियां; अचल परिसम्पत्तियों की ब्रिकी इत्यादि।
जबकि, नकद बहिर्प्रवाह के अंतर्गत विभिन्न मदें हैं :- ऋणदाताओं को भुगतान; कच्चे माल की खरीद; मज़दूरी या वेतन; विभिन्न प्रकार के ऊपरी खर्च; शेयरों/डिबेचरों का मोचन; ऋण की किश्तें; अचल परिसम्पत्तियों की खरीद; ब्याज; कर; लाभांश इत्यादि।
सभी कम्पनियों को अपने नकद प्रवाहों की उपयुक्त प्रबंधन व्यवस्था करने के लिए लेखाकार से अवश्य परामर्श करना चाहिए। नकद प्रवाह का प्रबंधन कम्पनी की आय और व्यय के स्रोत तथा राशि की पहचान से शुरू होता है। कोई भी फर्म निम्नलिखित विधि से लेखांकन के बुनियादी नियमों का पालन करके अपने नकद प्रवाहों का प्रबंधन कर सकती है :-
- भविष्य में वित्तीय परेशानियों से बचने के लिए व्यापक दृष्टिकोण रखकर नकद प्रवाहों को समझें। यह आपके व्यापार को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए ईंधन माना जाता है।
- समयावधि विशेष में नकद प्रवाहों को तथा उनमें हुए परिवर्तनों का आकलन करें और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए कम्पनी की नकद-प्राप्तियों एवं परिव्ययों को वर्गीकृत करें। ऐसा व्यापार की ज़रूरत पर निर्भर करते हुए मासिक, साप्ताहिक या दैनिक आधार पर नकद-प्रवाहों का वितरण तैयार करके किया जा सकता है। यह विवरण व्यापार की अल्पकालिक वहनीयता का निर्धारण करता है। यदि नकद में बढ़ोतरी हो रही हो (और नकद प्रवाह सकारात्मक है) तो कम्पनी को अल्पावधि में लाभकर एवं शोधन–क्षम और अपनी नकद संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम माना जाएगा। यदि कम्पनी ऋण ले रही हो तो विवरण में ऋणदाता को दर्शाया जाएगा कि कम्पनी अपनी ऋण अदा किस प्रकार करेगी और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है।
- नकद प्रवाहों का विश्लेषण जो नकद बहि: प्रवाहों के साथ नकद अन्त: प्रवाहों के समय एवं राशि की तुलना करके किया जाता है। इससे कम्पनी को व्यापार के नकद प्रवाह के चक्र में समस्याजनक मुद्दों का समाधान करने में मदद मिलेगी तथा नकद की कमी एवं अधिशेष की स्थितियां भी स्पष्ट हो सकेंगी। यह कम्पनी के आन्तरिक रूप से सृजित नकद से इसके दीर्घकालिक उधार को चुकाने का दायित्व पूरा करने में कम्पनी का सामर्थ्य भी प्रकट करता है।
- व्यापार के नकद प्रवाह का पूर्वानुमान लगाना, अर्थात् यह अनुमान लगाना कि कम्पनी को कितना धन प्राप्त होगा और यह विभिन्न प्रचालनों में कितना खर्च करेगी। नकद प्रवाह के अनुमानों में ये शामिल हैं – अवधि के आरंभ में हाथ में मौजूद नकद तथा विभिन्न स्रोतों से मिलने वाली अन्य नकद प्राप्तियों को जोड़ना तथा फिर उन्हें अनुमानित परिवर्तनों के साथ समायोजित करना जैसे कि पूंजी सुधार, ऋण ब्याज और अन्य ब्याज, नए वित्तपोषण स्रोत या पिछले वित्तपोषण स्रोतों का समापन, बिक्री में उतार-चढ़ाव, कम्पनी द्वारा शुरू किए गए विभिन्न कार्यक्रम इत्यादि। अगला कदम है आने वाले नकद परिव्ययों, जिनमें किराया, वस्तुसूची नियंत्रण, कार्यालय आपूर्ति, ऋण भुगतान, अनुरक्षण प्रभार, नकद लाभांश शामिल है, की राशियां एवं तारीखों की विस्तृत जानकारी रखना। इन नकद प्रवाह संबंधी अनुमानों को नियमित रूप से अद्यतन किया जाना चाहिए।
- ऐसे लोगों या कम्पनी को, जो आपके देनदार हैं, को यथाशीघ्र भुगतान करने के लिए प्रोत्सहित करके नकद-प्रवाहों में वृद्धि करना और नकद परिव्ययों में देरी करना।
- नकद प्रवाहों के समय-निर्धारण की समस्या पर अधिक ध्यान देना। यह समस्या या तो नकद अधिशेष या फिर नकद की कमी से उत्पन्न हो सकती है। नकद अधिशेष तब होते हैं जब आय पहले प्राप्त हो जाती है और उसे व्यय के रूप में इस्तेमाल किया जाना होना है। दूसरे शब्दों में, ऐसा तब होता है जब नकद-प्राप्तियां नकद व्ययों से अधिक हो जाती हैं। जबकि नकद की कमी तब होती है जब व्यय आय से पहले उत्पन्न हो जाता है और कम्पनी नकद प्राप्त होने तक अपने बिलों का भुगतान करने में असमर्थ होती है। दूसरे शब्दों में, यह समस्या तब होती है जब नकद-प्राप्तियां नकद व्ययों से कम रहती हैं। इसलिए, ऐसी समस्या से निपटने के लिए व्यापार हेतु उपयुक्त कार्यनीति बनाई जानी चाहिए।
- नकद की कमी से निपटने के लिए, फर्म :- (i) किसी बैंक या व्यक्ति से ऋण प्राप्त कर सकती है; (ii) प्राप्य राशियों (आपको देय धन) के संग्रहण में तेजी ला सकती है ; (iii) निधियां जुटाने वाले समारोह या अभियान आयोजित कर सकती है; (iv) पट्टे पर लेकर उपकरणों की खरीद को वित्तपोषित कर सकती है या कुछ समायवधि में इसका भुगतान कर सकती है अथवा निवेशों का परिसमापन कर सकती है और आपूर्तिकर्ताओं एवं ऋणदाताओं को करने में देरी कर सकती है।
- नकद अधिशेष/लाभ में संबंध में कार्रवाई करने के लिए फर्म :- (i) वित्तीय बाजार में अल्पावधिक निवेश करके निवेश आय अर्जित कर सकती है; (ii) कमी के समय में इनका उपयोग कर सकती है ; (iii) छूट पर प्राप्त सामान की खरीद कर सकती है जो वह वर्ष के दौरान इस्तेमाल करेगी।
|
^ऊपर |
|
| |
|
|
|
|