Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
व्‍यापार का प्रबंधन
spacer
व्‍यापार का प्रबंधन संवर्धन
व्‍यापार का प्रबंधन ग्राहक संबंध प्रबंधन
व्‍यापार का प्रबंधन अपनी बौद्धिक दक्षता का प्रबंधन
व्‍यापार का प्रबंधन बीमा
व्‍यापार का प्रबंधन विपणन एवं बिक्री
व्‍यापार का प्रबंधन अपने वित्त साधनों का प्रबंधन
व्‍यापार का प्रबंधन विनियामक अपेक्षाएं
व्‍यापार का प्रबंधन वितरण
व्‍यापार का प्रबंधन मानव प्रबंधन संसाधन
व्‍यापार का प्रबंधन कर
   
 
Managing a Business
Managing a Business
वितरण:
वितरण चैनल
Previous Page
spacer
वितरण चैनल या व्‍यापार चैनल को उस मार्ग या पथ के रूप में परिभाषित किया गया है जिस पर चलकर वस्‍तुएं उत्‍पादकों या विनिर्माताओं से वास्‍तविक उपभोक्‍ताओं या औद्योगिक प्रयोक्‍ताओं तक पहुंचती हैं। अन्‍य शब्‍दों में यह वितरण नेटवर्क है जिसके माध्‍यम से उत्‍पादक बाजार में अपने उत्‍पाद प्रविष्‍ट करता है तथा उन्‍हें वास्‍तविक प्रयोक्‍ताओं तक पहुंचाता है। इस चैनल में ये शामिल हैं :- उत्‍पादक, उपभोक्‍ता या प्रयोक्‍ता तथा विभिन्‍न बिचौलिए जैसे थोक विक्रेता, बिक्री अभिकरण तथा खुदरा विक्रेता (डीलर) जो उत्‍पादकों तथा उपभोक्‍ताओं के बीच हस्‍तक्षेप करते हैं। अत: यह चैनल उत्‍पादन बिन्‍दु तथा उपभोग बिन्‍दु के बीच अंतर के सेतुकरण का कार्य करता है जिससे समय, स्‍थान तथा स्‍वामित्‍व उपयोगिताओं का सृजन होता है।

एक वितरण चैनल में तीन प्रकार के प्रवाह शामिल हैं :-

  • उत्‍पादकों से उपभोक्‍ताओं तक वस्‍तुओं का अधोमुखी प्रवाह;
  • उपभोक्‍ताओं में उत्‍पादकों तक वस्‍तुओं के नकद भुगतानों का ऊर्ध्‍वमुखी प्रवाह;
  • विपणन सूचना का अधोमुखी एवं ऊर्ध्‍वमुखी, दोनों दिशाओं में प्रवाह अर्थात नए उत्‍पादों विद्यमान उत्‍पादों के नए उपयोगों के संबंध में सूचना का उत्‍पादकों में उपभोक्‍ताओं तक प्रवाह तथा जरूरतों, सुझावों, शिकायतों इत्‍यादि संबंधी फीडबैक के रूप में सूचना उपभोक्‍ताओं/प्रयोक्‍ताओं से उत्‍पादों तक सूचना का प्रवाह।

एक उद्यमी के पास अपने उत्‍पादों का वितरण करने केलिए अनेक वैकल्पिक चैनल उपलब्‍ध हैं1 इन चैनलों में शामिल बिचौलियों की संख्‍या तथा किस्‍मों में मित्रता होती है। कुछ चैनल लघु होते हैं तथा उत्‍पादकों को सीधे ग्राहकों के साथ जोड़ते हैं। जबकि अन्‍य चैनल दीर्घ होते हैं तथा एक या अधिक बिचौलियों के माध्‍यम से दोनों के बीच अप्रत्‍यक्ष कड़ी का काम करते हैं। वितरण के इन चैनलों को मोटे तौर पर चार किस्‍मों मे विभाजित किया गया है।:-

  • उत्‍पादक ग्राहक:- यह सरलतम तथा लघुतम चैनल है जिसमें कोई बिचौलिया शामिल‍त नहीं होता तथा उत्‍पादक अपने उत्‍पादों की बिक्री का सीधे उपभोक्‍ताओं का करते हैं। यह वितरण का तीव्र तथा किफायती चैनल है। इसके अंतर्गत, उत्‍पादक या उद्यमी सभी विपणन कार्यकलापों का स्‍वयं ही निष्‍पादन करता है तथा उसका वितरण पर पूर्ण नियंत्रण होता है। उत्‍पादक अपनी वस्‍तुओं की बिक्री सीधे उपभोक्‍ताओं का घर-घर जा कर बेचने वाले बिक्री कार्मिकों, सीधी डाक या स्‍वयं अपने खुदरा स्‍टोरों के माध्‍यम से कर सकता है। बड़ी फर्में वितरण लागतों में कटौती करने तथा उच्‍च मूल्‍य के औद्योगिक उत्‍पादों की बिक्री करने के लिए इस चैनल का अपनाते हैं। नष्‍ट होने योग्‍य वस्‍तुओं के उत्‍पादक तथा लघु उत्‍पादक भी सीधे स्‍थानीय ग्राहकों को वस्‍तुएं बेचते हैं।
  • उत्‍पादक–खुदरा–ग्राहक:- वितरण के इस चैनल में केवल एक बिचौलिया शामिल होता है जिसे ‘खुदरा विक्रेता’ कहते हैं। इसके अंतर्गत उत्‍पादक अपना उत्‍पाद बड़े खुदरा विक्रेताओं को (अर्थात उन खुदरा विक्रेताओं को जो बड़ा प्रमात्राओं में वस्‍तुएं बेचते हैं) बेच देता है जो आगे उन्‍हें वास्‍तविक उपभोक्‍ताओं को बेच देते हैं। यह चैनल विनिर्माता को स्‍वयं वस्‍तुएं बेचने के भार से मुक्‍त करता है तथा साथ ही उसे वितरण की प्रक्रिया पर नियंत्रण प्रदान करना है। यह उक्‍त उपभोक्‍ता टिकाऊ वस्‍तुओं तथा उच्‍च मूल्‍य के उत्‍पादों के वितरण के लिए उपयुक्‍त है।
  • उत्‍पादक-थोक विक्रेता-खुदरा विक्रेता-ग्राहक:- यह वितरण का सर्वाधिक आम तथा पारम्‍परिक चैनल हैं। इसक अंतर्गत दो बिचौलिए अर्थात थोक विक्रेता तथा खुदरा विक्रेता शामिल होते है। यहां उत्‍पादक अपना उत्‍पाद थोक विक्रेताओं को बेचता है जो बदले में उस खुदरा विक्रेताओं को बेच देते हैं। तथा खुदरा विक्रेता अंतिम रूप से उत्‍पाद अन्‍त्‍य उपभोक्‍ताओं को बेच देते हैं। यह चैनल सीमित वित्त साधनों, संकीर्ण उत्‍पाद श्रृंखला वाले उत्‍पादों के लिए तथा उनके लिए उपयुक्‍त है जिन्‍हें थोक विक्रेताओं की विशेषज्ञ सेवाओं तथा संवर्धनात्‍मक सहायता की आवश्‍यकता होती है। इसका प्रयोग व्‍यापक रूप से बिखरे हुए बाजार वाले उत्‍पादों के लिए सर्वाधिक किया जाता है।
  • उत्‍पादक-अभिकर्ता-थोक विक्रेता-खुदरा विक्रेता-ग्राहक:- यह वितरण का दीर्घतम चैनल है जिसमें तीन बिचौलिए शामिल हैं। इस का प्रयोग तब किया जाता है जब उत्‍पादक वितरण की समस्‍या से पूर्णतय मुक्‍त होना चाहता हैं तथा इस प्रकार अपना सम्‍पूर्ण उत्‍पादन बिक्री अभिकर्ताओं को सौंप देता है। अभिकर्ता कुछेक थोक विक्रेताओं में उत्‍पाद का वितरण कर देते है। प्रत्‍येक थोक विक्रेता अनेक खुदरा विक्रेताओं में उत्‍पाद को वितरित कर देता है जो अंतिम रूप में उसे वास्‍तविकग्राहकों को बेच देते हैं। यह चैनल विभिन्‍न औद्योगिक उत्‍पादों के अपेक्षाकृत व्‍यापक वितरण के लिए उपयुक्‍त है।

उद्यमी के अपने उत्‍पाद के लिए उपर्युकत वितरण चैनल का चयन इस प्रकार करना है कि चयनित चैनल फर्म की घोषित विपणन नीतियों तथा कार्यक्रमों के सुसंगत, नम्‍य एवं प्रभावी हो वितरण चैनल का चयन करते समय, उद्यमी को वैकल्पिक वितरण चैनलों की लागतों, बिक्री प्रमात्रा तथा प्रत्‍याशित लाभों की तुलना कर लेनी चाहिए तथा निम्‍न कारकों को ध्‍यान में रखना चाहिए :-

  • उत्पाद संबंधी दृष्टिकोण:- विनिर्मित उत्‍पादों को किस्‍म और स्‍वरूप वितरण मार्ग का चयन करने के एक महत्‍वपूर्ण घटक है। उत्‍पाद संबंधी मुख्‍य कारक इस प्रकार हैं :-
    • कम इकाई मूल्‍य के और आम इस्‍तेमाल के उत्‍पाद आम तौर पर बिचौलियों के ज़रिए बेचे जाते हैं। जबकि महंगी उपभोक्‍ता वस्‍तुएं एवं औद्योगिक उत्‍पाद सीधे ही उत्‍पादनकर्ता द्वारा स्‍वयं बेचे जाते हैं।
    • जल्‍दी नष्‍ट होने वाले उत्‍पादन; फैशन या शैली में बार -बार होने वाले परिवर्तनों से जुड़े उत्‍पाद तथा वज़नी एवं भारी भरकम उत्‍पाद अपेक्षाकृत छोटे मार्ग अपनाते है और लागतों के कम करने के लिए सामान्‍यत- या सीधे ही वितरित किए जाते हैं।
    • प्रदर्शन, संस्‍थापन और बिक्री के बाद की सेवाओं की अपेक्षा रखने वाले औद्योगिक उत्‍पादों को उपभोक्‍ताओं को सीधे ही बेचा जाता है। जबकि तकनीकी स्‍वरूप के उपभोक्‍ता उत्‍पाद आमतौर पर खुदरा विक्रेताओं के ज़रिए बेचे जाते हैं।
    • अनेक प्रकार के उत्‍पादों का उत्‍पादन करने वाला उद्यमी अपने खुदरा :-केन्‍द्र स्‍थापित करने और सीधे ही उपभोक्‍ताओं को उनकी बिक्री करना किफ़ायती पाएगा। दूसरी ओर, कम संख्‍या के उत्‍पादों का उत्‍पादन करने वाली फर्में अपने उत्‍पाद थोक – विक्रेताओं और खुदरा – विक्रेताओं के ज़रिए बेचते हैं।
    • किसी भी नए उत्‍पाद को आरंभिक चरणों में अधिक संवर्धनकारी प्रयासों की ज़रूरत होती हैं और इसलिए कुछ बिचौलियों की ज़रूरत होगी।
  • बाज़ार संबंधी दृष्टिकोण:- वितरण मार्ग के चयन को प्रभावित करने वाला एक और महत्‍वपूर्ण कारण स्रोत बाज़ार का स्‍वरूप है। इस संबंध में कुछ महत्‍वपूर्ण विशेषताएं इस प्रकार हैं :-
    • यदि उत्‍पाद का बाज़ार औद्योगिक प्रयोक्‍ताओं के लिए है, तब वितरण – मार्ग के लिए किसी बिचौलिए की ज़रूरत नहीं होगी क्‍योंकि वे बड़ी मात्रा में उत्‍पाद खरीदते हैं। चाहे कम हों और वे अधिक मात्रा में खरीदते हैं। जबकि घरेलू उपभोक्‍ताओं के लिए बनाए गए उत्‍पादों के मामले में बिचौलिए शामिल हो सकते हैं।
    • य‍दि संभावित ग्राहाकें की संख्‍या कम है या उत्‍पाद के लिए बाज़ार भौगोलिक दृष्टि के सीमित क्षेत्र में स्थित है, तो सीधे बिक्री करना अधिक उपयुक्‍त होगा। जबकि संभावित ग्राहकों की बड़ी संख्‍या होने के मामले में, बिचौलियों को इस्‍तेमाल करना ज़रूरी हो जाता है।
    • यदि ग्राहक थोक में उत्‍पाद का ऑर्डर देते हैं तो सीधे बिक्री को तरजीह दी जाती है। लेकिन यदि उत्‍पाद कम मात्रा में बेचा जाता है तो बिचौलियों को ऐसे उत्‍पादों के वितरण में इस्‍तेमाल किया जाता है।
  • अन्य दृष्टिकोण:- ऐसे अन्‍य अनेक कारक है जो किसी भी उद्यमी को वितरण मार्ग का चयन करते समय ध्‍यान में रखने चाहिए। इनमें से कुछ निम्‍नानुसार हैं:-
    • किसी नई कारोबारी फर्म को अपने उत्‍पाद को बढ़ावा देने के लिए एक या अधिक बिचौलियों की ज़रूरत हो सकती है जबकि एक सुस्‍थापित फर्म, जिसकी बाज़ार में अच्‍छी साख हो। उपभोक्‍ताओं को अपना उत्‍पाद सीधे ही बेच सकती है।
    • कोई छोटी फर्म, जो अपना वितरण नेटवर्क स्‍थापित करने में निवेश नहीं कर सकती, को अपना उत्‍पाद बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर करना पड़ता है। दूसरी ओर, एक बड़ी फर्म अपने खुदरा बिक्री –केन्‍द्र स्‍वयं स्‍थापित कर सकती है।
    • प्रत्‍येक मार्ग की वितरण लागत भी महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि यह अंतिम उत्‍पाद की कीमत को प्रभावित करती है। आमतौर पर कम महंगे को तरजीह दी जाती है। लेकिन कई बार, ऐसे मार्ग को तरजीह दी जाती है, जो ग्राहकों के लिए सुविधाजनक हो, भले ही वह अधिक महंगा हो।
    • यदि उत्‍पाद की मांग अधिक हो तो अधिकाधिक ग्राहकों को उत्‍पाद के लाभकर वितरण हेतु अधिक मार्गों को इस्‍तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यदि मांग कम हो तो थोड़े से मार्ग ही पर्याप्‍त होंगे।
    • फर्म के लिए आवश्‍यक बिचौलियों का स्‍वरूप और किस्‍म तथा उसकी उपलब्‍धता भी वितरण मार्ग के चयन को प्रभावित करनी हैं। कोई भी कम्‍पनी ऐसे बिचौलिए को तरजीह देती है जो उनके उत्‍पाद की अधिकाधिक बिक्री कर सके तथा साथ ही भण्‍डारण, संवर्धन एक विक्री के बाद की सेवाओं जैसी अन्‍य सेवाएं भी पेश कर सके। वांछित किस्‍म के बिचौलिए उपलब्‍ध न होने की स्थिति में, विनिर्माता को अपना वितरण नेटवर्क स्‍थापित करना होगा।

वितरण मार्ग के चयन को प्रभ्‍ज्ञावित करने वाले ये सभी कारक या विचार अन्‍त: संबंधित और अन्‍योन्‍याश्रित हैं। इसलिए, किसी भी उद्यमी को प्रचालित आर्थिक स्थितियों को देखते हुए समग्र तौर पर इन सभी कारकों को ध्‍यान में रखकर वितरण का सबसे कार्यकुशल और लागत – प्रभावी मार्ग चुनना चाहिए। किसी भी व्‍यापार की दीर्घकालिक लाभप्रदता बनाए रखने के लिए ऐसा निर्णय बहुत महत्‍व रखता है।

^ऊपर

 
संबंधित लिंक्‍स :
उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer