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विनियामक अपेक्षाएं: संविदा कानून :
संविदा भंग करना
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दूसरे पक्षकार द्वारा संविदा के उल्‍लंघन के मामले में व्‍ययित पक्षकार के लिए उपलब्‍ध उपचार हैं :-
  • संविदा निरसन के लिए वाद :- निरसन संविदा का प्रतिसंहरण है। जब एक पक्षकार द्वारा कोई संविदा उल्‍लंघित की जाती है तो दूसरा पक्षकार निरसन के लिए वाद कर सकता है तथा आगे कार्य निष्‍पादन से मना कर सकता है। ऐसे मामले में व्‍यथित पक्षकार संविदा के अंतर्गत अपनी सभी देयताओं से मुक्‍त हो जाता है।

  • हानियों के लिए वाद :- संविदा के उल्‍लंघन द्वारा क्षतिग्रस्‍त पक्षकार क्षतियों की प्राप्ति हेतु कार्यवाही कर सकता है। न्‍यायालय द्वारा व्‍यथित पक्षकार को दूसरे पक्षकार के द्वारा उल्‍लंघन के परिणामस्‍वरूप हुई हानि या क्षति के लिए अनुमत मौद्रिक क्षतिपूर्ति की जाती है।

  • निषेधाज्ञा के लिए वाद :- निषेधाज्ञा न्‍यायालय का आदेश है जो किसी व्‍यक्ति से ऐसा कार्य न करने की अपेक्षा करता है जो संविदा की विषयवस्‍तु है। निषेधाज्ञा प्रदान करने की शक्ति विवेकाधीन है तो यह अस्‍थायी रूप से या अनिश्चित अवधि के लिए दी जा सकती है।

  • ‘प्रमात्रात्‍मक योग्‍यता’ पर वाद :- ‘प्रमात्रात्‍मक योग्‍यता’ का अर्थ है ‘उसका जितना योग्‍यतानुसार अनुज्ञेय है’ अथवा ‘उतना जितना अर्जित किया गया है।‘ प्रमात्रात्‍मक योग्‍यता का वाद किसी ऐसी संविदा के अंतर्गत प्रयुक्‍त या आपू‍रित सामग्री के मूल्‍य के लिए किया गया दावा है जो दूसरे पक्षकार द्वारा उल्‍लंघन के कारण अवैध हो गई है। जब कोई संविदा अवैध हो जाती है तो ऐसी संविदा के अंतर्गत लाभ प्राप्‍त व्‍यक्ति उन्‍हें उस व्‍यक्ति को वे लाभ बहाल करने के लिए आबद्ध हैं जिससे उसने उन्‍हें प्राप्‍त किया है।

  • विशिष्‍ट कार्यनिष्‍पादन के लिए वाद :- जब संविदा के उल्‍लंघन द्वारा हुई हानियों की प्रतिपूर्ति क्षतिपूर्ति द्वारा नहीं की जा सकती है अथवा जहां क्षतियों की प्रमात्रा सुनिश्चित करने के लिए कोई मानदंड नहीं है, वहां व्‍यथित पक्षकार संविदा के विशिष्‍ट निष्‍पादन के लिए डिग्री प्रदान करने हेतु न्‍यायालय में जा सकता है। विशिष्‍ट निष्‍पादन का आदेश तब किया जाता है जब :-

    • धन एक पर्याप्त उपचार है

    • यह दोनों में से किसी भी पक्षकार के लिए असाम्या पूर्ण है

    • संविदा का स्‍वरूप वैयक्तिक है

    • न्‍यायालय इसके निष्‍पादन का पर्यवेक्षण नहीं कर सकता।

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