अभिव्यक्त संविदा:- ऐसी संविदा जिसमें प्रस्ताव तथा स्वीकृति, दोनों शब्दों में की गई है चाहे वह बोली गई हो या लिखित में हो।
अंतर्निहित संविदा:- ऐसी संविदा जो पक्षकारों के आचरण अथवा उनके बीच संव्यवहारों के क्रम में अंतर्निहित होती है।
अर्थ-संविदा:- यह वह संविदा है जो किसी करार, अभिव्यक्त या अंतर्निहित के कारण उत्पन्न नहीं होती बल्कि कानू उस संविदा को कतिपय विशेष परिस्थितियों के अंतर्गत मान्य करता है। ये संविदाएं साम्यता, न्याय तथा सद-विवेक के सिद्धांत पर आधारित हैं। अधिनियम में इन संविदाओं के अंतर्गत प्रत्युत्पन्न होने वाली देयताओं को कतिपय ऐसे संबंधों के रूप में वर्णित किया गया है जो संविदाओं द्वारा सृजित संबंधों से मिलते जुलते हैं। कानून के अंतर्गत ‘अर्थ-संविदा’ समझे जाने वाले कुछ लेनदने निम्न हैं :-
- जब कोई व्यक्तियों, जो ऐसे धन के भुगतान में रूचि रखता है जो कोई अन्य व्यक्ति कानूनन अदा करने के लिए आबद्ध है तथा इसलिए वह उसे अदा कर देता है, दूसरे व्यक्ति द्वारा प्रतिपूर्ति किए जाने का हकदार है;
- जब किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति की मालिकाना वस्तुएं मिलती हैं तो यह उसका कर्त्तव्य है कि वह उन्हें उसके सही स्वामी तक पहुंचा दे;
- कोई व्यक्ति जिसे गलती से अथवा मजबूरन धन की अदायगी की गई है अथवा कुछ परिदाय किया गया है, तो वह उसकी वापस अदायगी करने या लौटाने के लिए दायी है;
- जहां किसी ऐसे व्यक्ति को जो संविदा करने में अक्षम है यथा अल्पव्यस्क अथवा किसी ऐसे वयक्ति को जरूरियात की आपूर्ति की गई है जिसकी सहायता करने के लिए वह कानूनी रूप से आबद्ध है तो आपूर्तिकर्ता को अक्षम व्यक्ति, इत्यादि की संपत्ति से कीमत वसूल करने का हक होगा।
वैध संविदा- एक वैध संविदा वह ‘संविदा’ है जो अधिनियम की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है। ऐसी संविदा वैयक्तिक अधिकारों का सृजन करती है तथा कानूनी रूप से प्रवर्तनीय है।
अवैध करार:- यह ऐसा करार है जो कानून द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है। यह आदित: अवैध है क्योंकि इसमें वैध संविदा की एक या अधिक अनिवार्यताओं का अभाव होता है। ऐसा करार किन्हीं कानूनी संबंधों का सृजन नहीं करता। तथापि, यह गैर कानूनी करारों से मित्र है जो कानून द्वारा प्रतिसिद्ध हैं। एक गैर कानूनी करार अनिवार्यत: अवैध हो गया किन्तु एक अवैध करार का गैर कानूनी होना आवश्यक नहीं हैं। संविदा अधिनियम द्वारा निम्नकरारों को अवैध घोषित किया गया है :-
- अक्षम व्यक्तियों द्वारा करार;
- करार जिनमें विचारणा तथा वस्तुएं गैर कानूनी हैं;
- विवाह के विरोध में करार;
- व्यापार के विरोध में करार;
- कानूनी कार्रवाई के विरोध में करार;
- करार जिनका अर्थ अनिश्चित है, इत्यादि।
अवैध संविदा:- ऐसी संविदा जो कानून द्वारा प्रवर्तनीय नहीं रहती, अवैध हो जाती है। अन्य शब्दों में, एक करार आरम्भत: प्रवर्तनीय हो सकता है तथा कतिपय परिस्थितियों के कारण बाद में अवैध हो सकता है। इस प्रकार संविदा अपने आरंभ से ही अवैध बनाने वाली कुछेक ऐसी परिस्थितियां नीचे दी गई हैं :-
- कानूनी विचारणा के बिना कोई करार अवैध हो जाता है;
- किसी घटना के घटित होने पर कुछ करने या न करने के लिए की गई आकस्मिक संविदा अवैध हो जाती है जब उस घटना का घटित होना असंभव हो जाता है।
- जब पक्षकार, जिसकी सहमति मुक्त (स्वतंत्र) नहीं है, संविदा को ठुकरा देती है, इत्यादि।
अवैध की जा सकने वाली संविदा:- एक अवैध संविदा ‘’ऐसा करार है जो अपने किसी एक या अधिक पक्षकारों के विकल्प पर कानून द्वारा प्रवर्तनीय है किन्तु अन्य या अत्यों के विकल्प पर नहीं।‘’ ऐसी संविदा में, एक ही पक्षकार की सहमति स्वतंत्र नहीं है तथा कानून उसे व्ययित पक्षकार मानता है। व्ययित पक्षकार को एक युक्तिसंगत समय के भीतर संविदा को स्वीकार (प्रकट) या निरस्त करने का विकल्प प्राप्त है। दूसरे पक्षकार को ऐसा कोई अधिकार नहीं है। तथापि, व्यथित पक्षकार को दूसरे पक्षकार से वे क्षतियां वसूल करने का हक है जो उसे हुई हों किन्तु उसे अपने द्वारा प्राप्त लाभ लौटाने होंगे। |