| सहकारी समिति का अर्थ है पंजीकृत समिति या किसी राज्य में उस समय सहकारी समिति से संबंधित किसी कानून या केंद्रीय अधिनियम के तहत पंजीकृत मानी जाती है।
सहकारी समितियों का अभिशासन संबंधित राज्य सहकारी समिति अधिनियम या बहु राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 द्वारा किया जाता है। समितियों जिनका मुख्य उद्देश्य राज्य विशेष के अपने सदस्यों के हितों के लिए कार्य करना है जो उस राज्य के सहकारी समिति अधिनियम द्वारा शासित होती है। जबकि सोसायटी जिसका मुख्य उद्देश्य एक से अधिक राज्यों में अपने सदस्यों के हित में कार्य करना है जो बहु-राज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 2002 द्वारा शासित होती है।
प्रत्येक राज्य के सहकारी समिति अधिनियम के अनुसार राज्य के विधान के अंतर्गत किसी राज्य के भीतर पंजीकृत सहकारी समिति को सरकार या उस राज्य के सहकारी समिति पंजीयक की अनुमति के बिना दूसरे राज्यों के सहकारी समिति पंजीयक की अनुमति के बिना दूसरे राज्यों में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाती है। बहु राज्यीय सहकारी समिति के मामले में यह एक से अधिक राज्यों में कार्य कर सकती है चूंकि अधिनिम के तहत उसे अधिकार प्राप्त है और अपना कारोबार करने के लिए किसी राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है।
सहकारी समितियों के कराधान के लिए सावधान
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत सहकारी समिति एक कराधेय समिति है। अधिनियम के अधीन एक सहकारी समिति को व्यक्तियों का संघ (एओपी) माना जाता है जो आयकर अधिनियम, 1961 के अधीन ' व्यक्ति ' की परिभाषा में शामिल किया गया है।
यद्यपि कराधान के प्रयोजन से सहकारी समिति को, व्यक्तियों का संघ का दर्जा दिया जाता है। अधिनियम की धारा 67 क और धारा 86 को समिति के सदस्यों पर लागू होने से हटा दिया गया है।
सरकारी समिति पर उस दर पर कर लगाया जाता है जो एओपी के लिए लागू दरों से वार्षिक वित्त अधिनियम भिन्न हैं। के तहत यद्यपि व्यष्टि हिन्दू अविभाजित परिवार, एओपी या व्यष्टियों का निकाय चाहे निगमित या अन्यथा नहीं, या प्रत्येक कृत्रिम न्यायनिर्णयन व्यक्ति जिनका आयकर अधिनियम में उल्लेख किया गया है पर वित्त अधिनियम का पैरा क में निर्धारित दरों पर प्रभार लगाया जाता है। सहकारी समिति पर वार्षिक वित्त अधिनियम की पहली अनुसूची के भाग 1 का पैरा ख के अधीन निर्धारित दरों पर कर लगाया जाता है। A
पैरा ख के उपबंधों के अनुसार अभिकल्पित आयकर की राशि प्रत्येक सहकारी समिति के मामले में अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा। अधिभार की दर का निर्धारण प्रत्येक वित्त अधिनियम में निर्धारित की जाती है।
सहकारी समितियां अनेकानेक रियायतों के हकदार होती है, उनकी कराधेय आय के अभिकलन में। इके अतिरिक्त वार्षिक वित्त अधिनियम के तहत अपने प्रभार्य आय पर रियायती दर कर लाभ भी मिलता है।
संपत्ति कर अधिनियम [ धारा 3(1) ] के अनुसार, केवल व्यष्टियां, हिन्दू अविभाजित परिवार और कंपनियों पर संपत्ति कर लगाया जाता है। इस प्रकार से सहकारी समिति के मामले में कोई संपत्ति कर प्रभारित
नहीं होता है।
अधिक जानकारी के लिए हमारे 'कराधान' खंड को देखें।
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