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अपने वित्त साधनों का प्रबंधन:
नामे और जमा
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नामे और जमा किसी भी लेन देन के दो भाग हैं। व्‍यावसयिक लेन-देन को व्‍यवसाय की आर्थिक गतिविधि के रूप में पारिभाषित किया जा सकता है जो व्‍यवसाय की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करती है। वस्‍तुओं की खरीद और बिक्री; वेतन, किराए, टेलीफोन पर किया गया खर्च; स्‍थाई परिसम्‍पत्तियों की खरीद और लिए गए ऋण, आदि व्‍यावसायिक लेन-देन के उदाहरण हैं। ‘नामे’ शब्‍द का अर्थ है ‘ऋण देना’। जिस कम्‍पनी के नाम पर नामे अंकित होता है इसका अर्थ है उसने दूसरों को ऋण दिया है। इसी प्रकार, जिस कम्‍पनी के नाम पर जमा अंकित होता है इसका अर्थ है उसने दूसरों को ऋण दिया है। इसी प्रकार, जिस कम्‍पनी के नाम पर जमा अंकित होता है उसका अर्थ होता है कि अन्‍य किसी ने इस कम्‍पनी को ऋण दिया है।

एक कम्‍पनी के सभी व्‍यावसायिक लेन-देन को एक प्रधान बहीखाता में रिकॉर्ड किया जाता है। ‘प्रधान’ बहीखाता व्‍यवसाय का मुख्‍य लेखा रिकॉर्ड है जिसमें दो प्र‍विष्टियों अर्थात नामे और जमा के द्वारा वित्तीय लेन-देन दर्शाए जाते हैं। लेखा शब्‍दावली में नामे और जमा शब्‍दों का सामान्‍यत: बहुवचन में प्रयोग किया जाता है और इन्‍हें संक्षिप्‍त रूप में क्रमश: ना. (डीआर) और ज (क्रे. सी आर) लिखा जाता है।

प्रधान बहीखाता में :-

  • नामे को इन निम्‍नलिखित रूपों में दर्शाया जा सकता जा है :-

    • व्यय के विभिन्न शीर्षों के रूप में :- व्यय वह राशि है जो किसी फर्म द्वारा वस्‍तुओं और सेवाओं के उत्‍पादन और बिक्री के लिए खर्च की जाती है। उदाहरणार्थ, वेतन और मज़दूरी का भुगतान।

    • देनदार के रूप में :- देनदार वे व्‍यक्ति हैं जो उधार पर वस्‍तुओं की खरीद करने के कारण फर्म के देनदार होते है और उन्‍हें भविष्‍य में यह राशि चुकानी होती है।

    • परिसम्पत्तियों के रूप में :- परिसम्पत्तियां अपनी मूल्यवान वस्‍तुएं होती हैं। इसमें वह सभी कुछ शामिल है जिससे फर्म का भविष्‍य में नकदी अथवा लाभ की प्राप्ति होती है। उदाहरणार्थ, नकदी और बैंक में जमाराशियां, स्‍टॉक, संयंत्र और मशीनरी, इमारतें, पेटेण्‍ट, पूर्वदत्त व्‍यय, प्राप्‍य, निवेश आदि ।
  • जमा को इन रूपों में दर्शाया जा सकता हैं :-

    • प्राप्ति (राजस्‍व) के विभिन्‍न शीर्षों के रूप में:- प्राप्ति फर्म द्वारा वस्‍तुओं और सेवाओं को बेचकर प्राप्‍त की गई राशि है। उदाहरणार्थ बिक्री में प्राप्तियां, किराया आदि।

    • लेनदार के रूप में:- लेनदार के व्‍यक्ति होते हैं जिन्‍हें फर्म कर्ज चुकाती है।

    • देनदारियों के रूप में :- देनदारियां वे ऋण हैं जो फर्म बाहर से प्राप्त करती है। अन्य शब्‍दों में, उन व्‍यक्तियों के दावे जो मालिक नहीं हैं, देनदारी कहलाते हैं। उदाहरणार्थ : ऋण एवं अग्रिम, बैंक से उधार अथवा बाहर से उधार, देयराशियां, आदि।

    • इक्विटी के रूप में :- इक्विटी से अभिप्राय वह राशि है जो मालिक ने फर्म में निवेश की है अथवा फर्म से दावा कर सकता है। फर्म के लिए यह मालिक के प्रति देनदारी है।

प्रधान बहीखाते में नामे संबंधी सभी प्रविष्टियां बाई ओर रिकॉर्ड की जाती हैं जबकि जमा (क्रेडिट) संबंधी प्रविष्टियां दाई ओर रिकॉर्ड की जाती हैं। वही खाते ‘टी’ खाते इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि जब खाता खाली होता है तो यह ‘टी’ अक्षर के सहश होता है।

नामे और जमा लेख
नामे जमा
- परिसंपत्ति लेखों में वृद्धि - परिसंपत्ति लेखों में कमी
- व्‍यय लेखों में वृद्धि - व्‍यय लेखों में कमी
- देनदारी लेखों में कमी - देनदारी लेखों में वृद्धि
- इक्विटी लेखों में कमी - इक्विटी लेखों में वृद्धि
- राजस्‍व लेखों में कमी - राजस्‍व लेखों में वृद्धि

लेखें में नामे और जमा की प्रविष्टियां मूल्‍य में बिल्‍कुल एकसमान होती हैं लेकिन स्‍वरूप में उल्‍टी होती हैं। इसका कारण है दोहरी प्रविष्टि वही रखने का विशेष सिद्धांत जो इस तर्क पर आधारित है कि कोई भी व्‍यावसायिक लेन-देन कम्‍पनी के दो पहलुओं को प्रभावित करता है। उदाहरणार्थ, यदि कोई वस्‍तु खरीदी जाती है (नामे प्रविष्टि), तो उसके लिए भुगतान भी आवश्‍य होता हे (जमा प्रविष्टि)। दूसरी ओर, यदि कोई वस्‍तु बेची जाती है (जमा प्रविष्टि), तो उसके लिए कम्‍पनी को राशि चुकता की जाती है (नामे प्रविष्टि)।

प्रत्‍येक लेन-देन में दो संगठन शामिल होते है, एक के लिए जो नामे मद है वह दूसरे के लिए जमा मद है और इसीह प्रकार इसका उल्‍टा। उदाहरण के लिए, जैसे कि कोई फर्म, माना ‘क’ थोक-विक्रेता ‘ख’ को 10,000 रुपए की वस्‍तुएं बेचती है, ‘ख’ तो उनकी संबंधित बही में प्रविष्टियां इस प्रकारी होंगी :-

(i) फर्म अर्थात 'क' की बहियों में :-

नामे पक्ष : प्राप्‍त नकदी (10,000 रुपए)
जमा पक्ष : बिक्री के जरिए अर्जित राजस्‍व ( 10,000 रुपए)

(ii) थोक विक्रेता अर्थात 'ख' की बहियों में :-

नामे पक्ष : वस्‍तुओं पर व्‍यय (10,000 रुपए)
जमा पक्ष : भुगतान की गई पूंजी (10,000 रुपए)

इस प्रकार ऐसे लेन-देन में शामिल सभी पक्षों के प्रत्‍येक व्‍यावसायिक लेन-देन को बहियों में दो बार रिकॉर्ड किया जाता है। इस प्रणाली को दोहरी प्रविष्टि प्रणाली कहा जाता है क्‍योंकि सभी लेन-देन में ‘संतुलन’ होना जरूरी है अर्थात नामे और जमा पक्षों की राशि एक जैसी ही होनी चाहिए। अन्‍य शब्‍दों में, दोहरी-प्रविष्टि बही रखने की प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि प्रधान बहीखाता में सभी नामे प्रविष्टियों की कुल राशि सभी जमा प्रविष्टियों की कुल राशि के समान है। दोहरी-प्रविष्टि की यह प्रणाली फर्म के लिए कई तरह से फायदेमंद हैं :-

  • व्‍यावसायिक लेन-देन रिकॉर्ड करने की यही एक क्रमबद्ध और वैज्ञानिक प्रणाली है।
  • यह सभी व्‍यावसायिक लेन-देनों को पूरा रिकॉर्ड रखती है।
  • यह कच्‍चे चिट्ठे को युक्ति के जरिए लेखों की परिशुद्धता की जांच करने में मदद करती है।
  • इससे फर्म को हुए लाभ अथवा हानि का एक साथ विस्‍तार से पता लगाया जा सकता है।
  • तुलनपत्र तैयार करके फर्म की वित्तीय स्थिति का भी पता लगाया जा सकता है।
  • इससे एक वर्ष में प्राप्‍त परिणामों की अगले वर्ष के परिणामों के साथ तुलना करना संभव होता है।
  • इसमें धोखे और विनियोजन की कोई गुंजाइश नहीं होती क्‍योंकि पूरी सूचना उपलब्‍ध होती है।
  • यह प्रबंधक वर्ग को निर्णय लेने में मदद करती है।

प्रधान बही खाता को समान्‍यत: तीन खातों में वर्गीकृत किया जाता है, नामत: व्‍यक्तिग‍त खाता, वास्‍तविक खाता और अवास्‍तविक खाता। खातों के इस वर्गीकरण के आधार पर नामे और जमा के लिए लेखा विधि के मूल नियम निम्‍नलिखित हैं : -

व्‍यक्तिगत खातों से संबंधित नियम:-

व्‍यक्तिगत खाते ऐसे खाते हैं जो व्‍यक्तियों (व्‍यक्ति, फर्म, कम्‍पनियों आदि) से संबंधित होते हैं। देनदारों, लेनदारों और मालिक के पूंजी खाते व्‍यक्तिगत खातों के उदाहरण हैं। ऐसे खाते में फर्म द्वारा लेनदारों को देय राशि तथा फर्म द्वारा अपने देनदारों से वसूल की जा सकने वाली धनराशि को दर्शाया जाता है।

इस खाते में नामे और जमा के लिए नियम इस प्रकार हैं :-

  • प्राप्‍‍तकर्ता के नामे :- राशि प्राप्‍तकर्ता के नामे लिख दी जाती है। उदाहरणार्थ, विक्रेता को भुगतान के मामले में भुगतान की गई राशि उसके नामे लिख दी जाती है।
  • दाता के नाम जमा :- राशि का भुगतान करने वाले के नाम राशि जमा कर दी जाती है। उदाहरणार्थ ग्राहकों से प्राप्तियों के मामले में राशि भुगतानकर्ता ग्राहक के नाम जमा कर दी जाती है।

वास्‍तविक खातों से संबंधित नियम:-

वास्‍तविक खाते वे खाते हैं जो फर्म की परिसंपत्तियों से संबंधित होते हैं। उदाहरणार्थ, भूमि, भवन, निवेश, नकदी, आदि। ये खाते फर्म की सम्‍पत्ति के मूल्‍य तथा फर्म के स्‍टॉक को दर्शाते हैं।

इस खाते में नामे और जमा के लिए नियम इस प्रकार हैं:-

  • जो प्राप्‍त होता है उसे नामे लिखना :- वस्‍तुआं की प्राप्ति को नामे लिखा जाता है। उदाहरणार्थ, यदि कोई फर्म मशीनरी खरीदती है तो इस खरीद को आने वाले स्‍टॉक के नामे लिखा जाएगा।
  • जो बाहर जाता है :- वस्‍तुओं की बिक्री को जमा किया जाता है। उदाहरणार्थ, यदि फर्म अपनी वस्‍तुएं बेचती है तो इस बिक्री को जमा कर दिया जाएगा क्‍योंकि वस्‍तुएं बाहर जा रही है।

अवास्‍तविक (नॉमिनल) खातों से संबंधित नियम:-

अवास्‍तविक (नॉमिनल) खाते ऐसे खाते होते हैं जो व्‍यय, हानि, लाभ और राजस्‍व, आदि से संबंधित होते हैं। बिक्री खाता, ब्‍याज खाता, वेतन खाता नॉमिनल खाते के उदाहरण हैं। यह खात आय को स्रोतों को और विभिन्‍न मदों पर खर्च की गई राशि को भी दर्शाता है।

इस खाते में नामे और जमा के लिए नियम इस प्रकार है:-

  • सभी खर्चों और हानियों को नामे लिखना :- व्‍यय और हानियों के रूप मे सभी नकद भुगतानों को नामे लिखा जाता है। उदाहरणार्थ, वेतन, किराए और हानियों के लिए किए गए भुगतानों को नामे लिखा जाएगा।
  • सभी आय और लाभों को जमा करना :- आय और लाभ के रूप में सभी नकद प्राप्तियों को जमा किया जाता है। उदाहरणार्थ बिक्री से हुई प्राप्तियों, अर्जित आय, बिक्री से हुए लाभों को जमा किया जाएगा।

बही में खाते दर्ज करने के बाद नामे और जमा राशियों को अलग-अलग दर्शाने के लिए एक विवरण तैयार किया जाना है। इस विवरण को 'कच्‍चा चिट्ठा' कहा जाता है। यह कच्‍चा चिट्ठा बही के हरेक खाते को सूचीबद्ध करके और नामे और जमा पक्षों के कुल योग को अलग-अलग कालम में दर्ज करके तैयार किया जाता है। दो कालम अलग-अलग तैयार किए जाते हैं और उनका मिलान किया जाता है। इस तरह प्राप्‍त किए गए योग बराबर ही होने चाहिए। यदि वे बराबर नहीं है तो इसका अर्थ यह होगा कि ये प्रविष्टियां संतुलित नहीं हैं और कहीं कुछ छूट गया है। इस प्रकार, इससे प्रविष्टियों की गणित की दृष्टि से परिशुद्धता की जांच करने में मदद मिलती है।

लेखा विधि के सिद्धांतों पर आधारित व्‍यावसायिक लेन देन रिकॉर्ड करने के प्रयोग से फर्म की वित्तीय स्थिति को जानने में मदद मिलती है। यह फर्म के व्‍यय और आमदनी तथा साथ ही इसके नामे और जमा की राशि को भी दर्शाता है। यह फर्म की लम्‍बे समय तक लाभ को बनाए रखने की क्षमता और इसके विकास की संभाव्‍यताओं को भी दर्शाता है। इसलिए, ऐसे खातों को बनाए रखना कम्‍पनी के वित्त प्रबंधन का एक अभिन्‍न हिस्‍सा है।

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