| अग्नि बीमा एक संविदा जिसके अंतर्गत बीमाकर्ता एक प्रतिफल (प्रीमियम) के बदले में बीमाकृत उस हानि की प्रतिपूर्ति के लिए सहमत हो जाता है जो बीमाकृत को किसी विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान अग्नि के कारण संपत्ति के विनाश अथवा क्षति के कारण हुई हो। उक्त संविदा पार्टियों द्वारा संविदा के समय सहमत अधिकतम धनराशि को विनिर्दिष्ट करता है जो बीमाकृत हानि के मामले में दावा कर सकता है। तथापि यह धनराशि क्षति का माप नहीं है। हानि को अग्नि के बाद ही सुनिश्चित की जा सकती है। बीमाकर्ता पॉलिसी के अंतर्गत नियत अधिकतम धनराशि से अनाधिक क्षति की वास्तविक धनराशि के भुगतान के लिए उत्तरदायी है।
एक अग्नि बीमा पॉलिसी बीमाकर्ता की अनुमति के बिना सौंपी नहीं जा सकती है क्योंकि बीमाकृत के संविदा के समय के साथ-साथ हानि के समय संपत्ति में बीमायोग्य हित हो सकते हैं। माल में बीमायोग्य हित (i) स्वामित्व (ii) अभिग्रहण अथवा (ii) संविदा के कारण उदभूत हो सकते हैं। एक व्यक्ति के निजी संपत्ति अथवा माल में सीमित हित उन्हें न केवल अपने स्वयं के हित को कवर करने के लिए बीमा करा सकता है बल्कि उसमें दूसरों का भी हित हो। अग्नि बीमा के अंतर्गत विषय के गत मामले में निम्नलिखित व्यक्तियों के हित होते हैं :-
- मालिक
- गिरवी रखने वाला
- अधिग्राही
- गिरवी दलाल
- सरकारी रिसीवर अथवा दीवालियेपन की कार्यवाईयों के प्रबधनकर्ता
- ग्राहक के सामान का भण्डारगृह रक्षक
- विधिपूर्वक धारण करने वाला कोई व्यक्ति अर्थात सामान्य वाहक, व्हारफिंगर, कमीशन एजेंट।
‘’अग्नि’’ शब्द अपनी लोकप्रिय और साहित्यिक आशय में प्रयुक्त किया जाता है जिसकी ‘’सीमाएं टूटी हुई’’ है। ‘अग्नि’ जिसका घरेलू अथवा विनिर्माण को प्रयोजन के लिए प्रयोग किया जाता है, जब तक यह आम सीमाओं के भीतर सीमित है, यह अग्नि नहीं है। अग्नि बीमा नीति में, ‘अग्नि’ का आशय दहन अथवा जलने के द्वारा रोशनी और ताप पैदा करता है। अत: अग्नि वास्तविक प्रज्वलन के परिणाम निकलने चाहिए और परिणामी हानि ऐसे प्रज्वलन के कारण आसन्न होनी चाहिए। ‘अग्नि द्वारा हानि अथवा क्षति’ वाक्यांश में आग बुझाने के प्रयासों के कारण हुई हानि अथवा क्षति शामिल है।
अग्नि बीमा द्वारा कवर हानियों के प्रकार हैं :-:-
- आग को बुझाने के लिए उपयोग में लिए गए जल के कारण खराब हुआ माल और क्षतिग्रस्त संपत्ति।
- अग्नि की लपटों को फैलाने से रोकने के लिए फायर बिग्रेड द्वारा जुड़े हुए परिसरों का गिराना।
- भवन जहां अग्नि लगी हुई है, ये सामान को हटाने की प्रक्रिया में सामान का टूटना अर्थात खिड़की से बाहर फर्नीचर को फेंकने के कारण क्षति।
- आग बुझाने के लिए लगाए गए व्यक्तियों को दी गई मजूदरी।
किसी अग्नि बीमा द्वारा कवर नहीं की गई हानियों के प्रकार हैं :-
- भूकंप, आक्रमण, विदेशी दुश्मन का कार्य, शत्रुता अथवा युद्ध, नागरिक संघर्ष, दंगे, विद्रोह, मार्शल ला, सैनिक चढाई अथवा बगावत अथवा विप्लव के कारण अग्नि के कारण हुई हानि।
- भूमिगत अग्नि के कारण हुई हानि।
- किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के आदेश द्वारा संपत्ति को जलाने के कारण हुई हानि।
- अग्नि के दौरान अथवा बाद में चोरी से हानि।
- अपने स्वयं के उबाल अथवा स्वत: दहन के कारण सम्पत्ति का हानि अथवा क्षति अर्थात किसी बम का इसमें अंतरराष्ट्रीय गुटि के कारण विस्फोट।
- रोशनी अथवा विस्फोट के कारण हानि अथवा क्षति तब तक शामिल नहीं यिका जाता है। जब तक इसका कारण वास्तविक चिनगारी जिससे आग फैली है, नहीं हो।
अग्नि द्वारा हानि के दावे के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी की जानी चाहिए :-
- हानि वास्तविक अग्नि अथवा प्रज्वलन के कारण होनी चाहिए न कि उच्च ताप के कारण।
- हानि का आसन्न कारण अग्नि होना चाहिए।
- हानि अथवा क्षति पॉलिसी की विषयवस्तु से संबंधित होना चाहिए।
- प्रज्वलन या तो माल का होना चाहिए अथवा उन परिसरों का होना चाहिए जहां माल रखा गया है।
- अग्नि आकस्मिक होनी चाहिए न कि इरादतन हो। यदि अग्नि को कारण बीमाकृत अथवा उसके एजेंटों के किसी विद्वेषपूर्ण अथवा जानबूझकर किया गया कार्य है तो बीमाकर्ता हानि के जिम्मेदार नहीं होगा।
अग्नि बीमा पॉलिसियों के प्रकार :-
- विशेष पॉलिसी :- यह एक पॉलिसी है जिसमें किसी विशेष धनराशि जो संपत्ति की वास्तविक कीमत से कम है, के लिए हानि कवर की गई है। सम्पत्ति की वास्तविक कीमत को प्रतिपूर्ति की धनराशि का निर्धारण करते समय प्रतिफल को शामिल नहीं किया जाता है। ऐसी कोई पॉलिसी ‘औसत खण्ड’ के अध्यधीन नहीं है। ‘’औसत खण्ड’’ वह खण्ड है जिसके द्वारा बीमाकृत को अपने आप हानि के एक भाग वहन करने के लिए कहा जाता है। खण्ड का मुख्य उद्देश्य कम बीमा को रोकना, पूर्ण बीमा को प्रोत्साहित करना और संपत्ति मालिकों बीमा से पहले उनकी संपत्ति सही मूल्य निर्धारण प्राप्त करने के लिए दबाव डालना। यदि बीमाकर्ता किसी औसत खण्ड को जोड़ा है तो उक्त पॉलिसी ‘’औसत पॉलिसी’’ के रूप में जानी जाती है।
- वृहद् पॉलिसी :- इसे ‘’आल इन वन’’ पॉलिसी के रूप में भी जाना जाता है और इसमें अग्नि, चोरी, डकैती, तीसरे पक्ष के जोखिम, आदि जैसे जोखिम शामिल हैं। इसमें अग्नि के कारण बंद रहे व्यापार की अवधि के दौरान लाभ में हानि को भी शामिल किया जा सकता है।
- मूल्यांकित पॉलिसी :- प्रतिपूर्ति की संविदा से अतिक्रमित है। इसके अंतर्गत बीमाकृत पॉलिसी को लेते समय सहमत नियत धनराशि वसूल सकता है। हानि की स्थिति में हानि की वास्तविक धनराशि से असंबद्ध रहते हुए नियत धनराशि की संदत्त की जाती है।
- फ्लोटिंग पॉलिसी :- वह पॉलिसी जिसमें एकल धनराशि के अंतर्गत उसी व्यक्ति से संबंधित लेकिन विभिन्न स्थानों पर स्थिति संपत्ति को एकल धनराशि और एक प्रीमियम के अंतर्गत अग्नि के कारण हुई हानि को शामिल करता है। ऐसी किसी पॉलिसी में दो अलग स्थानों पर स्थित दो भण्डारगृहों में पड़े माल को शामिल किया जा सकता है। यह पॉलिसी हमेशा ‘औसत खण्ड’ के अध्यधीन है।
- रिप्लेसमेंट अथवा रि-इंस्टेटमेंट पॉलिसी :- वह पॉलिसी जिसमें बीमाकर्ता एक रि-इंस्टेटमेंट खंड जोड़ता है जिसके द्वारा वह अग्नि द्वारा क्षतिग्रस्त अथवा नष्ट हुई सम्पत्ति के रिप्लेसमेंट की लागत का भुगतान करने के बजाय सम्पत्ति को रि-इंस्टेट अथवा रिप्लेस कर सकता है। ऐसी किसी पॉलिसी में बीमाकर्ता को दो विकल्पों में से एक को चुनना होता है अर्थात या तो नकद भुगतान करे अथवा सम्पत्ति को रिप्लेस करे, बाद में वह अन्य विकल्प परिवर्तित नहीं कर सकता है।
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