वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और सुरक्षा) अधिनियम,1999 में प्रदान किया गया है कि भौगोलिक संकेत का अर्थ है एक ऐसा संकेत, जो वस्तुओं की पहचान, जैसे कृषि उत्पाद, प्राकृतिक वस्तुएं या विनिर्मित वस्तुएं, एक देश के राज्य क्षेत्र में उत्पन्न होने के आधार पर करता है, जहां उक्त वस्तुओं की दी गई गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य कोई विशेषताएं इसके भौगोलिक उद्भव में अनिवार्यत:: योगदान देती हैं। दो प्रकार के भौगोलिक संकेत होते हैं (i) पहले प्रकार में वे भौगोलिक नाम हैं जो उत्पाद के उद्भव के स्थान का नाम बताते हैं जैसे शैम्पेन, दार्जीलिंग आदि। (ii) दूसरे हैं गैर-भौगोलिक पारम्परिक नाम, जो यह बताते हैं कि एक उत्पाद किसी एक क्षेत्र विशेष से संबद्ध है जैसे अल्फांसो, बासमती आदि।
वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और सुरक्षा) अधिनियम,1999 भारत में भौगोलिक संकेतों को अधिशासित करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं प्रवर्तन विभाग के अंतर्गत महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन तथा ट्रेड मार्ग, ''भौगोलिक संकेतों के पंजीयक'' हैं। महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेड मार्ग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री (जीआईआर) की कार्यशैली का निर्देशन और पर्यवेक्षण करता है।
किसी वस्तु विशेष के संबंध में एक भौगोलिक संकेत पंजीकरण के इच्छुक, कानून द्वारा स्थापित किसी प्रक्रिया विधि, व्यक्तियों के समूह, संगठन या प्राधिकरण को भौगोलिक संकेत के पंजीयक के पास लिखित आवेदन प्रस्तुत करना होता है। आवेदन उस भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री के कार्यालय में जमा किया जाता है जिसकी राज्य क्षेत्र सीमाओं, राज्य क्षेत्र, क्षेत्र या स्थान के अंतर्गत वह आता है, जहां संबंधित भौगोलिक संकेत स्थित है। यद्यपि, पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, फिर भी यह उल्लंघन के लिए कार्रवाई की सुविधा हेतु बेहतर कानूनी सुरक्षा का लाभ उठाने में सहायता देता है। जीआई के पंजीकरण से उन वस्तुओं के संबंध में जीआई के उपयोग के लिए पंजीकृत स्वामी को विशिष्ट और स्वत: अधिकार मिलेगा, जिनके लिए पंजीकरण किया गया है और जीआई के उल्लंघन के विषय में राहत पाने का अधिकार भी मिलता है। जीआई का पंजीकरण दस वर्ष की अवधि के लिए किया जाएगा, परन्तु इसे अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार समय-समय पर नवीकृत किया जा सकता है।
कुछ वस्तुएं अधिनियम के तहत पंजीकरण योग्य नहीं हैं :-
- जब भौगोलिक संकेत एक जेनरिक (वंश) नाम बन जाता है, उन वस्तुओं के नाम, जिन्होंने अपने मूल अर्थ खो दिए हैं और अब उनके सामान्य नाम उपयोग में लाए जाते हैं।
- यदि भौगोलिक संकेत के उपयोग से जनता को धोखा देने, भ्रम पैदा करने अथवा किसी प्रभावी कानून के खिलाफ है।
- ऐसे भौगोलिक संकेत, जिनमें विवादास्पद अथवा अश्लील सामग्री है या समाज के किसी वर्ग को चोट पहुंचे, आदि।
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