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बीमा:
बीमा एजेंसियां
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भारत में बीमा संघीय विषय है। देश में जीवन बीमा और साधारण बीमा से संबंधित समस्‍त नीतिगत मुद्दे, जिनमें बीमा विनियामक प्राधिकरण भी शामिल हैं, वित्त मंत्रालय में बीमा प्रभाग के कार्य-क्षेत्र की परिधि में आते हैं। इसके कार्यों में ये शामिल हैं - बीमा से संबंधियों अधिनियमों को लागू करना, राष्‍ट्रीयकृत बीमा कम्‍पनियां के निष्‍पादन की निगरानी करना, राष्‍ट्रीयकृत बीमा कम्‍पनियों के कर्मचारियों की सेवा-शर्तों के संबंध में नियम और विनियम बनाना इत्‍यादि।

भारत में बीमा कारोबार से जुड़े मुख्‍य कानून निम्‍नलिखित है:-

  • बीमा अधिनियम, 1938 :- बीमा कारोबार से जुड़े कानून को समेकित एवं संशोधित करने के लिए बनाया गया अधिनियम।
  • बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999:-बीमा पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षा करने के लिए, बीमा उद्योग के व्‍यवस्थित विकास को विनियमित, संवर्धित और सुनिश्चित करने के लिए और उनसे जुड़े मुद्दों के संबंध में तथा साथ ही बीमा अधिनियम, 1938 जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और साधारण बीमा कारोबार (राष्‍ट्रीकरण) अधिनियम 1922 में संशोधन करने के लिए एक प्राधिकरण की स्‍थापना का प्रावधान करने हेतु बनाया गया अधिनियम।
  • जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 :- भारत में जीवन बीमा के कारोबार के राष्‍ट्रीकरण के लिए इस प्रयोजनार्थ स्‍थापित किए गए निगम को ऐसा समस्‍त कारोबार अन्‍तरित करने का प्रावधान करने तथा निगम के कारोबार के विनियमन एवं नियंत्रण का प्रावधान करने और उनसे जुड़े मामलों हेतु प्रावधान करने हेतु बनाया गया अधिनियम।
  • साधारण बीमा कारोबार (राष्‍ट्रीकरण) अधिनियम, 1972 :- भारतीय बीमा कम्‍पनियों के शेयरों तथा अन्‍य मौजूदा बीमाकर्ताओं की हामीदारी के अधिग्रहण एवं अन्‍तरण, ताकि समाज के हित में साधारण बीमा कारोबार का विकास करके अर्थव्‍यवस्‍था की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके और सुनिश्चित किया जा सके कि आर्थिक तंत्र का प्रचालन का परिणाम समाज के हित के प्रतिकूल सम्‍पत्ति का कुछ हाथों में संकेन्‍द्रण के रूप में न हो, ऐसे कारोबार तथा उनसे जुड़े मामलों के विनियमन और नियंत्रण हेतु प्रावधान करने वाला अधिनियम।
  • समुद्री बीमा अधिनियम, 1963 :- समुद्री बीमा से संबंधित कानून को विधिबद्ध करने वाला अधिनियम।
  • साधारण बीमा कारोबार (राष्‍ट्रीकरण) संशोधन अधिनियम, 2002 :- साधारण बीमा कारोबार (राष्‍ट्रीकरण) अधिनियम, 1972 में और संशोधन करने वाला अधिनियम।
  • बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2002 निजी क्षेत्र :- बीमा अधिनियम।

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी)

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्‍थापना जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी और इसका उद्देश्‍य जीवन बीमा को कही अधिक व्‍यापक रूप से और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाना था जिससे उन्‍हें उचिता लागत पर पर्याप्‍त वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराई जा सके। एलआईसी ने देशभर में 2048 शाखाओं, 100 मंडलों और 7 आंचलिक कार्यालयों का विस्‍तृत नेटवर्क स्‍थापित कर लिया है। भारतीय जीवन बीमा निगम विदेशों में भी कारोबार करता है और फिजी, मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम में उसके कार्यालय है। शाखा प्रचालनों के अलावा, निगम में बहरीन, नेपाल और श्रीलंका में प्रतिष्ठित स्‍थानीय भागीदारों के साथ संयुक्‍त रूप से विदेशी अनुषंगी कम्‍पनियां स्‍थापित की हैं। भारतीय बीमा क्षेत्र के उदारीकृत परिदृश्‍य में भी एलआईसी अग्रणी जीवन बीमाकर्ता के स्‍थान पर है और अपने विगत रिकॉर्डों को तोड़ता हुआ नए विकास के पथ पर तेज़ी अग्रसर हो रहा है।

भारतीय साधारण बीमा निगम (जीआईसी)

भारतीध साधारण बीमा निगम (जीआईसी) की स्‍थापना साधारण बीमा कारोबार (राष्‍ट्रीकरण) अधिनियम, 1972 (गिना), के अनुसरण में साधारण बीमा या गैर जीवन बीमा कारोबार की देख-रेख, नियंत्रण तथा प्रचालन के प्रयोजनार्थ की गई थी। आरंभ में जीआईसी की चार अनुषंगी शाखाएं थी, अर्थात्:- नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि.,न्‍यू इंडिया इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि., द ओरियन्‍टल कम्‍पनी लि. और यूनाइटेड इंडिया इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि.। लेकिन वर्ष 2000 में इन शाखाओं को जीआईसी से अलग कर दिया गया और ''जिस्‍सा'' (जनरल इंश्‍योरेंस पब्लिक सैक्‍टर एसोसिएशन) नामक संघ बनाया गया।

अब जीआईसी को ''भारतीय पुनर्बीमाकर्ता'' के रूप में अनुमोदित कर दिया गया है और यह सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विभिन्‍न साधारण बीमा कम्‍पनियों को पुनर्बीमा सहायता प्रदान करता है। जब बीमा कम्‍पनियां बीमा कारोबार की हामीदारी देने के दौरान हो सकने वाले नुकसान से स्‍वयं को बचाने के लिए अन्‍य हामीदारों या अन्‍य बीमा कम्‍पनियों के साथ व्‍यवस्‍था करके अपने जोखिम को कम करती हैं तो इसे पुनर्बीमा कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब कई बार कुल बीमा की राशि बहुत अधिक हो जाती है जिसके कारण बीमाकर्ता पर अत्‍यधिक देनदारी हो जाती है। इसलिए वे उस विषय का दोबारा बीमा कटाकर जोखिम का कुछ हिस्‍सा दूसरे बीमाकर्ता पर अन्‍तरित कर देते हैं। इस प्रकार यह दो बीमाकर्ताओं के बीच निष्‍पादित संविदा है और इसका बीमित मूल पक्षकार से कोई संबंध नहीं है।

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए)

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (अ‍ाईआरडीए अधिनियम) के अधिनियमन के साथ ही बीमा क्षेत्र को भारतीय नि‍जी बीमा कम्‍पनियों से प्रतिस्‍पर्धा के लिए खोल दिया गया। आईआरडीए अधिनियम, 1999 के प्रावधानों के अनुसार, 19 अप्रैल, 2000 को बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) की स्‍थापना की गई जिसका उद्देश्‍य बीमा पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करना तथा बीमा उद्योग के व्‍यवस्थित विकास को विनियमित, संर्वधन तथा सुनिश्चित करना था। आईआरडीए अधिनियम 1999 बीमा बाजार में निजी क्षेत्र के निकायों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्‍त किया जिस पर अब तक सरकारी क्षेत्र की बीमा कम्‍पनियों/निगमों का विशेषधिकार था।

आईआरडीए पर बीमा पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षा करने की ज़िम्‍मेदारी है। इस उद्देश्‍य को हासिल करने के लिए, प्राधिकरण ने निम्‍नलिखित उपाय किए हैं :-

  • आईआरडीए ने पॉलिसीधारक हित संरक्षण विनियम 2001 को अधिसूचित किया है ताकि इन बातों की व्‍यवस्‍था की जा सके :- पॉलिसी प्रस्‍ताव दस्‍तावेज़ आसानी से समझी जाने वाली भाषामें हो जीवन और गैर जीवन दोनों से संबं‍धी दावा-प्रक्रिया; शिकायत निवारण तंत्र की स्‍थापना; दावों का शीघ्र निपटान; और पॉलिसीधारकों की सेवा आदि। इन विनियमों में दावों के निपटान में होने वाली देश के लिए बीमाकर्ता द्वारा ब्‍याज की अदायगी का भी प्रावधान किया गया है।
  • बीमाकर्ताओं से शोधन-क्षमता मार्जिन रखने की अपेक्षा की जाती है ताकि वे दावों के भुगतान के संबंध में पॉलिसीधारकों के प्रति अपने दायित्‍व को पूरा करने की स्थिति में हो।
  • बीमा कम्‍पनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे पॉलिसी के अंतर्गत लाभ, निबंधन एवं शर्तों का खुलासा करें। बीमाकर्ता द्वारा निकाले गए विज्ञापनों से बीमा कराने वाली जनता भ्रमित नहीं होनी चाहिए।
  • सभी बीमाकर्ताओं को अपने मुख्‍य कार्यालयों में तथा अन्‍य कार्यालयों में उपयुक्‍त शिकायत निवारण तंत्र स्‍थापित करना चाहिए।
  • प्राधिकरण बीमाकर्ताओं द्वारा बीमा संविदा के तहत प्रदान की गई सेवाओं के संबंध में पॉलिसीधारकों से प्राप्‍त किसी शिकायत का मामला बीमकर्ता के समक्ष रखता है।

^ऊपर

   
संबंधित लिंक्‍स :
जीवन बीमाकर्ता    
सरकारी क्षेत्र    
भारतीय जीवन बीमा निगम    
       
निजी क्षेत्र    
बजाज आलियांज लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि. बिड़ला सन-लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.
एचडीएफसी स्‍टैंडर्ड लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि. आईसीआईसी प्रूडेंशियल लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.
आईएनजी वैश्‍य लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि. मैक्‍स न्‍यू यॉर्क लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.
मेट लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि. ओम कोटक महिन्‍द्रा लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.
एसबीआई लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि. टाटा एआईजी लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.
अविवा लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि. सहारा इण्डिया लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.
श्री राम लाइफ इंश्‍योरेंस क. लि.    
   
साधारण बीमाकर्ता  

सरकारी क्षेत्र

निजी क्षेत्र
नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि बजाज आलियांज जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि.
न्‍यू इंडिया इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि. आईसीआईसीआई लोम्‍बार्ड जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि.
ओरियन्‍टल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड इफ्फको टोकियो जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि.
युनाइटेड इंण्‍डिया इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि. रिलायंस जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड
भारतीय निवेश ऋण गारंटी निगम रॉयल सुन्‍दरम अलायंस इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड
    टाटा एआईजी जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड
पुन: बीमाकर्ता चोलामण्‍डलम जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड
भारतीय साधारण बीमा निगम एचडीएफसी छब जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड
एग्रीकल्‍चरल जनरल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड
 
 
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