| अर्ध संचालक एकीकृत परिपथ रूपरेखा अधिनियम,2000 में ‘अर्ध संचालक एकीकृत परिपथों’ को ट्रांजिस्टर तथा अन्य परिपथ तत्वों वाले उत्पाद के रूप में, जो अर्ध संचालक पर बिना अलग किए तैयार किए गए अथवा इंसुलेटिंग सामग्री अथवा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ कार्यकरण के उनके भीतर डिज़ाइन किए गए उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है। यहां ले-आउट डिज़ाइन से तात्पर्य ट्रांजिस्टरों तथा अन्य परिपथ अवयवों, जिनमें ऐसे तत्वों को जोड़ने वाले लीड तार शामिल हैं, की रूपरेखा से है।
अर्ध संचालक एकीकृत परिपथ रूपरेखा (एसआईसीएलडी) अधिनियम, 2000 भारत में एकीकृत परिपथों के डिजाइनों की रूपरेखा हेतु शासी अधिनियम है। अधिनियम का उद्देश्य अर्ध संचालक एकीकृत परिपथ रूपरेखा तथा इससे संबंधित मामलों अथवा इसके परिणामस्वरूप घटित अन्य के क्षेत्र में प्रतिभात्मक संपति अधिकार को संरक्षण प्रदान करना है। अधिनियम का कार्यान्वयन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय , के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जाता है। भारतीय रजिस्टरी में दाखिल किए गए आईसी ले-आउट डिज़ाइन, आईपीआर आवेदनों के लिए यह अधिनियम लागू होता है। अर्ध संचालक एकीकृत परिपथ रूपरेखा रजिस्टरी (एसआईसीएलडीआर) ऐसा कार्यालय है जहां सृजित आईपीआर के पंजीकरण हेतु एकीकृत परिपथों के डिज़ाइन ले-आउट के लिए आवेदन दाखिल किए जाते हैं। रजिस्टरी का अधिकार क्षेत्र अखिल भारत है।
ले-आउट डिज़ाइनों के पंजीकरण में निम्नलिखित उठाए जाने वाले कदम शामिल हैं:-
- ले-आउट डिज़ाइन के सृजनकर्ता द्वारा एसआईसीएलडी रजिस्टरी के पास आवेदन प्रस्तुत करना।.
- रजिस्टर (पंजीयक) आवेदन को स्वीकार, अस्वीकार अथवा कुछ संशोधन के साथ स्वीकार कर सकता है।
- स्वीकृत किया गया आवेदन, स्वीकार किए जाने के 14 दिनों के भीतर विज्ञापित किया जाएगा।
- विज्ञापन पर किसी भी प्रकार का विरोध अथवा आपत्ति विज्ञापन की तिथि से 3 माह के भीतर प्रस्तुत की जा सकती है।
- विरोध का नोटिस, यदि कोई हो तो, का प्रति वक्तव्य पंजीयक से विरोध के नोटिस की प्रति की प्राप्ति के दो माह के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए।
- विरोधी पक्ष को प्रति वक्तव्य की प्रति उपलब्ध कराई जाए।
- पंजीयक पक्षों की सुनवाई कर सकता है।
- ले-आउट डिज़ाइन की मौलिकता पर पंजीयक निर्णय लेगा और अपने निष्कर्षों के आधार पर पंजीकरण आवेदन के पंजीकरण प्रदान अथवा अस्वीकार कर सकता है।
पंजीकरण हेतु निम्नलिखित दस्तावेज जिनमें स्पष्ट रूप से डिजाइन की रूपरेखा का विवरण हो, आवेदन के साथ संलग्न होनी चाहिए :- (i) प्लॉटर पर तैयार की गई तीन ड्राइंगें, जिनमें पंजीकरण हेतु प्रस्तुत डिज़ाइन की रूपरेखा का विवरण दिया गया हो; (ii) पंजीकरण हेतु प्रस्तुत डिज़ाइन की रूपरेखा का उपयोग करते हुए अर्ध-संचालक एकीकृत परिपथ के ताने बाने हेतु प्रयोग में लाए गए मास्क के फोटोग्राफ के तीन सेट; (iii) ऐसे मास्कों के पैटर्नों का विवरण देने वाली ड्राइंगों अथवा फोटोग्राफ का आकार 20 गुणा से कम नहीं होगा। डिज़ाइन की रूपरेखा के पंजीकरण हेतु यदि आवेदक गोपनीयता बनाए रखने का लिखित अनुरोध प्रस्तुत करता है तो वह ड्राइंग अथवा फोटोग्राफों के बदले ऐसे डिज़ाइन की रूपरेखा के आंशिक रूप से कम (ब्लॉक किए गए) ड्राइंग या फोटोग्राफ पंजीयक की संतुष्टि के अनुरूप प्रस्तुत कर सकता है। पंजीयक ऐसे डिज़ाइन की रूपरेखा की संपूर्ण ड्राइंग अथवा फोटोग्राफों का निरीक्षण कर सकता है। ऐसे ब्लॉक किए गए ड्राइंग या फोटोग्राफ पंजीयक की संतुष्टि के अनुरूप होने चाहिए, यानि इससे प्रस्तुत किए गए डिज़ाइन की रूपरेखा की पहचान प्रभावित न होती हो। ऐसी ड्राइंग का ब्लॉक किया गया क्षेत्र डिज़ाइन की शेष रूपरेखा से बड़ा नहीं होना चाहिए। किसी डिज़ाइन की रूपरेखा का पंजीकरण निषिध किया जा सकता है यदि :- (i) यह मौलिक नहीं है; (ii) इसे भारत में व्यापारिक/वाणिज्यिक रूप से प्रयोग किया गया है; (iii) यह आंतरिक रूप से सुस्पष्ट नहीं है। उन्हें भी पंजीकृत नहीं किया जाएगा जो अन्य पंजीकृत डिज़ाइन रूपरेखा से भिन्न होने में सक्षम न हों।
डिज़ाइन की रूपरेखा के पंजीकृत स्वामी को डिज़ाइन की रूपरेखा के पूर्णरूपेण उपयोग का अधिकार होगा और उल्लंघन होने की स्थिति में राहत मांग सकता है। डिज़ाइन की रूपरेखा का पंजीकरण, पंजीकरण के लिए अखिल आवेदन की तिथि पर अथवा भारत में या अन्य किसी भी देश में इसके प्रथम वाणिज्यिक उपयोग की तिथि, जो भी पहले हो, से 10 वर्ष की अवधि के लिए होगा।
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