| जीवन बीमा बीमाकर्ता और उस व्यक्ति जो अपने जीवन को जोखिमों के विरुद्ध बीमाकृत किया गया है, के बीच संविदा है। इसके अंतर्गत बीमाकृत व्यक्ति एक बार पालिसी लेने पर बीमा कंपनी को नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान करता है, इसके बदले बीमाकर्ता बीमाकृत की मृत्यु पर अथवा विनिर्दिष्ट समयावधि की समाप्ति पर, जो भी पहले हो, निश्चित धनराशि का भुगतान करने का आश्वासन देता है। जीवन बीमा के लिए भुगतान निश्चित होता है लेकिन वह घटना जिसके लिए बीमा कराया गया है, निश्चित नहीं होता है।
जीवन बीमा व्यापक तौर पर सभी व्यष्टियों, व्यापारों, समुदायों, सोसाइटी और आम जनता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह आय की हानि के विरूद्ध संरक्षण प्रदान करता है और पालिसी के घटकों की प्रतिपूर्ति करता है। यह बहुत से लाभों की व्यवस्था करता है जो निम्नानुसार हैं :-
- यह परिवार के सदस्यों अथवा आश्रितों को किसी बीमाकृत व्यक्ति की असमय मृत्यु के विरूद्ध सुरक्षा की व्यवस्था करती है।
- यह सेवा निवृत्ति को बाद निजी व्यक्ति अर्जन क्षमता कम होने पर बुढ़ापे में सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन के आनंद के लिए बचतों की सुविधा, प्रदान करता है।
- यह लोगों को जब कोई जीवन बीमा कराया जाता है तो नियमित रूप से प्रीमियम के भुगतान के लिए उनको बाध्य करके धन की बचत के लिए प्रोत्साहित करता है।
- यह सार्वजनिक बचतों निवेश का माध्यम बनाने के लिए तैयार करने में मदद करती है, इस प्रकार देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
- इसका पालिसी ऋण को उगाहने के लिए प्रतिभूति के रूप में उपयोग किया जा सकता है इस प्रकार किसी व्यष्टि अथवा व्यापार के क्रेडिट मूल्य में सुधार करती है।
- इसका आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर लाभों के रूप में भी उपयोग में लिया जाता है, कुल आय से कटौती के रूप में संदत्त प्रीमियम की अनुमति दी जाती है।
जीवन बीमा पालिसियों के प्रकार
- सम्पूर्ण जीवन पालिसी :- इस पालिसी पर प्रीमियम बीमाकृत जीवन के जीवन समय में संदत्त होता है। बीमाकृत राशि बीमाकृत की मृत्यु पर ही संदत्त होती है।
- संदान (एन्डोमेन्ट) पालिसी :- यह पालिसी ‘संदान अवधि’ के रूप में ज्ञात किसी विशेष अवधि के लिए ली जाती है। बीमाकृत राशि या तो बीमाकृत जीवन की समाप्ति पर अथवा निजी नियत अवधि की समाप्ति पर संदत्त होती है। यदि व्यक्ति की पालिसी की परिपक्वता तक मृत्यु नहीं होती है तो वह जीवन पालिसी की परिपक्वता के बाद बीमाकृत धनराशि वापस प्राप्त करेगा। यह जीवन बीमा का सबसे लोकप्रिय रूप है।
- संयुक्त बीमा पालिसी :- इस पालिसी में पति और पत्नी अथवा किसी व्यापार के भागीदार एक संयुक्त पालिसी ले सकते हैं। बीमाकृत राशि संदान अवधि की समाप्ति पर अथवा बीमाकृत जीवन में ये किसी एक की पहले मृत्यु पर, जो भी पहले हो, संदत्त होती है। ऐसी पालिसियां आमतौर पर भागीदार फर्मों द्वारा ली जाती हैं।
- वार्षिक पालिसी :- इस पालिसी में बीमाकृत द्वारा संदत्त की जाने वाली धनराशि एक मुश्त नहीं होती है बल्कि मासिक, तिमाही, अर्द्ध वार्षिक अथवा वार्षिक किस्तों द्वारा संदत की जाती है जो या तो जब तक मृत्यु नहीं हो जाती है अथवा विनिर्दिष्ट वर्षों की संख्या के लिए संदत की जाती है। इस प्रकार पालिसी उन व्यक्तियों के लिए बहुत उपयोगी है जो अपने लिए और अपने आश्रितों की समाप्ति के बाद एक नियमित आय की व्यवस्था की इच्छा रखते हैं।
- निक्षेपनिधि पालिसी :- यह पालिसी अधिकतर उन फर्मों और कंपनियों द्वारा ली जाती है जो किसी देयता को चुकाने के लिए अथवा किसी समय अवधि के बाद किसी परिसंपदा के प्रतिस्थापन के लिए प्रावधान करने के लिए निधियों का संचयन करने के लिए है।
- समूह बीमा पालिसी :- यह पालिसी किसी व्यापरी कंपनी में सभी कर्मचारियों की जीवन सुरक्षा के लिए ली जा सकती है। कर्मचारियों के अश्रित इन बीमाओं के लाभों के हकदार हैं।
जीवन बीमा दोहरी बीमा के प्रावधानों के अंतर्गत शामिल नहीं होती है क्योंकि जीवन बीमा कोई क्षतिपूर्ति संविदा नहीं है। |