| जनशक्ति प्रबंधन किसी भी व्यवसाय के प्रबंधन की प्रक्रिया का एक अभिन्न हिस्सा है। यह एक व्यापक कार्य है और इसे संगठन के सभी स्तरों के सभी प्रबंधकों द्वारा निष्पादित किया जाता है। कार्मिक प्रबंधकों अथवा मानव संसाधन प्रबंधक संगठन की उत्तरोत्तर जरूरतों को व्यक्त करते हैं ओर एक साझे सामान्य लक्ष्य की ओर अलग अलग संभाव्यता निदेशित करते हैं। आज मानव तत्व को सर्वाधिक महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है क्योंकि संगठन अन्य संसाधनों का कारगर उपयोग संगठन के कार्मिकों के प्रबंधन पर निर्भर करता है। जैसे जैसे ज्ञान और अनुभव बढ़ता जाता है मानव संसाधन का मूल्य भी बढ़ जाता है। उनमें विकास के लिए अन्तर्निहित ऊर्जा और संभाव्यता होती है।
मानव संसाधन की प्रबंध व्यवस्था करना एक सतत प्रक्रिया है क्योंकि संगठन के कार्यबल में हमेशा ही कुछ बदलाव होता रहता है। यह संगठन में कार्य कर रहे लोगों पर ध्यान केन्द्रित करता है, ऐसे मानवीय संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद करता है। जिससे हर कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप में संतुष्टि प्राप्त हो और वह संगठन के समग्र लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अधिक से अधिक सहयोग करे। बढ़ते हुए भूमंडलीकरण के साथ व्यावसायिक परिवेश में बदलावों, कार्यबल की बदलती हुई जनसांख्यिकी में, विकास के परिणामस्वरूप लाभप्रदता पर संकेद्रण में वृद्धि, औद्योगिकीय बदलावों, बौद्धिक पूंजी और संगठन में हो रहे, कभी न समाप्त होने वाले बदलावों के कारण मानव संसाधनों का प्रबंधन का महत्व बढ़ गया है। मानव संसाधनों के प्रबंधन की नीति की धारणा नई-नई दक्षताओं और योग्यताओं का विकास करना, कर्मचारियों के कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में सुधार करना और कर्मचारियों को अपने कार्य और संगठन के लिए और अधिक मेहनत करने, श्रेष्ठ प्रयास, दक्षता और जानकारी का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हुए संगठन की लागतों को कम करना है।
कार्मिक प्रबंधन के विशेष उद्देश्य निम्नलिखित हैं :-
- संगठन में विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना और उन्हें बनाए रखना।
- उपलब्ध मानव संसाधनों का कारगर उपयोग सुनिश्चित करना।
- कर्मचारियों को काम करने की अच्छी परिस्थितियां, मजदूरी (वेतन) और सुविधाएं मुहैया करना।
- प्रत्येक कर्मचारी की भरपूर क्षमता का विकास करना।
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