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बीमा : बीमे के प्रकार :
समुद्री बीमा
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समुद्री बीमा की संविदा एक करार है जिसके द्वारा बीमाकर्ता क्षतिपूर्ति उस ढंग से और सहमत सीमा तक समुद्री साहसिक अभियान के विरुद्ध लेता है। कोई समुद्री साहसिक कार्य वह है जब कोई बीमा योग्‍य संपत्ति समुद्री जोखिम में विक्षेपित होती है अर्थात समुद्री में समुद्री यात्रा के लिए परिणामी जोखिम। ‘समुद्र के जोखिम’ शब्‍द केवल समुद्री दुर्घटनाओं अथवा अभिज्ञातों के संदर्भ में है और इसमें हवा और लहरों के सामान्‍य कार्य शामिल नहीं हैं। इसके अलावा समुद्री जोखिमों में अग्नि, युद्ध जोखिम, समुद्री डकैती, जब्‍ती और माल को फेंकना आदि शामिल है।

समुद्री बीमा के चार प्रकार हैं :-

  • खोल बीमा :- इस बीमों में पोत और उसके उपकरण शामिल किए जाते है अर्थात फर्नीचर और फिंटिंग, मशीनरी, औजार, ईंधन आदि। यह सामान्‍यतया जहाज के मालिक के लिए होता है।

  • कार्गो बीमा :- इसमें जहाज में और चालक दल के संबंधित व्‍यक्तियों के एवं यात्रियों का मौजूद कार्गो अथवा सामान।

  • मालभाड़ा बीमा :- यह माल भाड़े की हानि के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करती है। बहुत से मामलों में माल का मालिक संविदा की शर्त के अंतर्गत तभी माल भाड़ा देने के लिए बाध्‍य है जब माल पतन के स्‍थान पर सुरक्षित सुपुर्द कर दिया जात है। यदि जहाज रास्‍ते में खो जाता है अथवा कार्गों क्षतिग्रस्‍त अथवा चुरा लिया जाता है तो जहाजरानी कंपनी मालभाड़ा खो देती है। मालभाड़ा बीमा ऐसे जोखिम के विरुद्ध सुरक्षा के लिए ली जाती है।

  • दायित्‍व बीमा :- इसमें बीमाकर्ता उस हानि जो बीमाकृत जहाज के दुर्घटनाग्रस्‍त और इसी प्रकार के अन्‍य खतरों के कारण तीसरे पक्ष के दायित्‍व के कारण हो सकती है, के विरूरुद्ध क्षतिपूर्ति लेता है।

समुद्री बीमा की किसी संविदा में बीमाकृत का हानि के समय बीमाकृत विषयगत मामले में बीमायोग्‍य हित होना चाहिए। बीमायोग्‍य हित पॉलिसी लेते समय मौजूद होने आवश्‍यक नहीं है। समुद्री बीमा के अंतर्गत निम्‍नलिखित व्‍यक्तियों के बीमायोग्‍य हित होते हैं :-

  • जहाज के मालिक का जहाज में कोई बीमायोग्‍य हित है।
  • कार्गो के मालिक का कार्गो में बीमायोग्‍य हित है।
  • कोई क्रेडिटर जिसने जहाज अथवा कार्गो की सुरक्षा पर अग्रिम धन दिया है, का उनके ऋण की सीमा तक बीमायोग्‍य हित है।
  • जहाज का कप्‍तान और कर्मी दल अपने श्रम के संबंध में बीमायोग्‍य हित हैं।
  • यदि विषयगत वस्‍तु का बीमा गिरवी रखा जाता है तो गिरवीकर्ता का उसके पूर्ण मूल्‍य में बीमायोग्‍य हित है और गिरवी रखने वाले का उसके विरूद्ध शेष किसी राशि के संबंध में बीमायोग्‍य हित है।
  • न्यास में किसी संपत्ति को धारण करने वाले न्यासी का ऐसी संपत्ति में बीमायोग्‍य हित है।
  • अग्रिम मालभाड़ा के मामले में मालभाड़े को अग्रिम देने वाले व्‍यक्ति का हानि के मामले में पुन: संदेय ऐसे माल भाड़े तक बीमायोग्‍य हित है।
  • बीमाकृत का किसी बीमा पॉलिसी जो वह लेता है, के प्रभारों में बीमायोग्‍य हित है।

समुद्री बीमा पॉलिसियों के प्रकार :-

  • यात्रा पॉलिसी :- यात्रा पॉलिसी वह पॉलिसी है जिसमें विषयगत मामले में किसी विशेष यात्रा के लिए इसमें दिए गए समय से असंबद्ध रहते हुए बीमा किया जाता है। इस मामले में जोखिम जहाज के यात्रा आरंभ करने से संबद्ध है।

  • समय पॉलिसी :- वह पॉलिसी है जिसमें विषयगत मामले में समय की किसी निश्चित अवधि के लिए बीमा किया जाता है। जहाज कोई भी रास्‍ता जो वह पसन्‍द करे अपना सकता है, उक्‍त पॉलिसी में उल्लिखित समयावधि के लिए समुद्र के खतरों से सभी जोखिमों को शामिल करेगी। कोई समय पॉलिसी एक वर्ष से अधिक की अवधि नहीं हो सकती है, लेकिन इसमें ‘निरस्‍तरता खण्‍ड’ निहित हो सकता है। ‘निरन्‍तरता खण्‍ड’ को आशय यदि यात्रा विनिर्दिष्‍ट अवधि के भीतर पूरी की जाती है तो जोखिम में यात्रा पूरी होने तक अथवा गंतव्‍य पत्तन पर जहाज के पहुंचने तक के जोखिम शामिल हैं।

  • मिश्रित पॉलिसी :- इसमें यात्रा और समय पॉलिसियों का मिश्रण है और यह किसी विनिर्दिष्‍ट अवधि के लिए विशेष यात्रा के दौरान जोखिम को कवर करती है।

  • मूल्‍यांकित पॉलिसी :- मूल्‍यांकित पॉलिसी वह पॉलिसी है जिसमें बीमा किए गए विषयगत मामले के मूल्‍य पर बीमाकर्ता और बीमाकृत के बीच सहमति होती है और यह अपने आप पॉलिसी में विनिर्दिष्‍ट होता है।

  • खुली अथवा अमूल्‍यांकित पॉलिसी :-यह वह पॉलिसी है जिसमें बीमा किए गए विषयगत मामले को विनिर्दिष्‍ट नहीं किया जाता है। बीमा की गई राशि की सीमा के अधीन यह हानि के मूल्‍य को अनुवर्ती रूप से अनिश्चित करने पर छोड़ती है।

  • फ्लोटिंग पॉलिसी :- यह वह पॉलिसी है जो केवल धनराशि का उल्‍लेख करती है जिसके लिए बीमा कराया गया है और जहाज (जहाजों) के नाम और और अन्‍य ब्‍यौरे अनुवर्ती घोषणाओं द्वारा परिभाषित करने पर छोड़ती है। ऐसी पॉलिसियां उन व्‍यापारियों के लिए बहुत उपयोगी है जो जहाजों के माध्‍यम से माल की रवानगी करते हैं।

  • दांव अथवा सम्‍मान पॉलिसी :- यह वह पॉलिसी है जिसमें बीमाकृत के कोई बीमायोग्‍य हित नहीं हैं और बीमायोग्‍य हित के संवितरण क लिए अभिगोपक तैयार किए जाते हैं। ऐसी पॉलिसियों को ‘पॉलिसी प्रूफ आफ इंट्रेस्‍ट (पी.पी.आई.) के रूप में जाना जाता है।

^ऊपर

 
समुद्री बीमा, यूनाइटेड इंडिया इन्‍सुरेंस कंपनी लि. द्वारा
 
 
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