| बाजार अनुसंधान बाजार में उत्पाद के मूल्य या मांग के साथ-साथ उद्योग में उद्यम के स्थान का सुनिश्चय करने के लिए किया जाने वाला एक प्रयास है। इसे सूचना का संग्रहण, सृजन, विश्लेषण तथा व्याख्या करने तथा निष्कर्षों को विपणन निर्णय करने में प्रयोग हेतु संसूचित करने की प्रणालीबद्ध तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया के रूप में परिभाषित यि जा सकता है। यह बाजार में विद्यमान उत्पादों के बारे में समस्त संगत सूचना उपलब्ध कराता है तथा फर्म की नए उत्पादों को आरम्भ करने से जुड़ी समस्याओं को अभिज्ञात करने तथा उनका समाधान करने में सहायता करता है। यह फर्म की विपणन अवसरों को अभिज्ञात करने तथा उनका मूल्यांकन करने एवं फर्म की लाभप्रदत्ता हेतु उनका दोहन करने में सहायता करता है। इस प्रकार, बाजार अनुसंधान व्यापक रूप में विभिन्न गतिविधियों में फर्म के लिए उपयोगी है जिनमें ये शामिल हैं बिक्री पूर्वानुमान; बाजार अंश का मापन; बाजार रुझानों का अभिचिन्हांकित करना ब्रांड छवियों का मापन; उपभोक्ता पार्श्वचित्र का विकास करना; उत्पादों तथा पैकेजिंग का अभिकल्पन; मांग की विश्लेषण करना; कीमत अवधारणाओं को मापना विज्ञापन की प्रभावात्मकता सुनिश्चित करना।
बाजार अनुसंधान के उद्देश्य
- सूचना के माध्यम से उपभोक्ता का कम्पनी के साथ सम्पर्क स्थापित करना।
- ग्राहकों की वास्तविक आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं की छानबीनन करना।
- उस सूचना को खोजना तथा उसका विश्लेषण करना जिसका प्रयोग सर्वोत्तम वैकल्पिक विपणन निर्णय तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है।
- वस्तुओं तथा सेवाओं में आवश्यक परिवर्तनों का सुझाव देना ताकि उनमें बाजार मांग की पूर्ति हो सके।
- यह पहले से जान लेना कि अर्थव्यवस्था में किस प्रकार के लक्ष्य विद्यमान है जहां कम्पनी अपने उत्पाद की शुरूआत कर सकती है।
- कम्पनी के विद्यमान या नव प्रविष्ट उत्पादों के बारे में बाजार में लोगों की अनुक्रियाओं को जानना।
- कम्पनी के बाह्य माहौल में अवसरों तथा संकटों को अभिज्ञात करना।
- बाजार अंश धीरे-धीरे खोने के कारणों का पता लगाना तथा देश के भीतर तथा बाहर बाजार में कम्पनी की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए अर्थोपायों को अभिचिंहाकित करना।
बाजार अनुसंधान प्रक्रिया में चरण या अवस्थाएं
- उद्देश्यों का अभिचिंहाकंन तथा परिभाषा
यह विपणन अनुसंधान की प्रक्रिया में प्रथम चरण है। इसका अत्यधिक विशिष्ट महत्व है क्योंकि यह अनुसंधान कार्य की दिशा दर्शाता है। अनुसंधान प्रक्रिया का आरंभ जांच की जाने वाली समस्या या मुद्दों की स्पष्ट परिभाषा बना कर या समस्या अथवा मुद्दों के संक्षिप्त विवरण तैयार कर होती है, जिन्हें खोजा जाना है। समस्या की स्पष्ट परिभाषा अनुसंधान की सभी अनुवर्ती अनुसंधान प्रयासों में सहायता करती है जिसमें उचित अनुसंधान उद्देश्य निर्धारित करना, प्रयुक्त की जाने वाली तकनीकों का निर्धारण तथा एकत्र की जाने वाली सूचना का विस्तार शामिल है।
- अनुसंधान उद्देश्य का विवरण
अगले चरण में, अनुसंधान उद्देश्यों का औपचारिक कथन करता है तथा अनुसंधान करने के कारण तथा उद्देश्य बताता है। ऐसे उद्देश्यों को गुणात्मक या प्रमात्रात्मक अर्थों में व्यक्त किया जाता है तथा इनकी अभिव्यक्ति अनुसंधान प्रश्नों, विवरण या परिकल्पनाओं के रूप में की जाती है।
- अनुसंधान अभिकल्पन की योजना बनाना
अगला चरण अनुसंधान अभिकल्पन का विकास करना है जो आवश्यक सूचना के संग्रहण तथा विश्लेषण के लिए प्रक्रियाविधियां निर्दिष्ट करने वाली एक मास्टर योजना है। यह अनुसंधान कार्य योजना के लिए रूपरेखा (ढांचा) की घोतक है। अध्ययन के उद्देश्य को अनुसंधान अभिकल्पन में शामिल किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संग्रहित डाटा उद्देश्यों के लिए संगत है। अनुसंधान आवश्यक सूचना के स्रोतों, डाटा संग्रहण विधि यथा सर्वेक्षण, साक्षात्कार इत्यादि; अनुसंधान की प्रविधि, समय निर्धारण तथा संभावित लागतों का निर्धारण भी करता है।
नमूने निर्माण में ऐसी प्रक्रियाविधियां शामिल हैं जिनके द्वारा मदों की लघु संख्या अथवा लक्षित जनसंख्या के भागों को सम्पूर्ण जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने के लिए अभिग्रहण किया जाता है। इसमें निम्न से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं :- (i) लक्ष्य जनसंख्या को पारिभाषित करना; (ii) ऐसे नमूने का चयन जो सही रूप से जनसंख्या का घोतक हो; (iii) प्रयोजन के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला नमूने का आकार; तथा (iv) नमूने निर्माण के लिए विभिन्न इकाइयों का चयन।
इसमें समस्या का समाधान करने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले तथ्य एकत्र करना शामिल है। डाटा प्राथमिक है यदि इसका संग्रहण अवलोकन, प्रयोग तथा सर्वेक्षण विधियों जैसे विभिन्न साधनों के माध्यम से अनुभव के आधार पर अध्ययन के जरिए मूलाधार से किया जाता है। इसका संग्रहण बिक्री कार्मिकों, ग्राहकों तथा डीलरों से किया जाता है। डाटा गौण (द्वितीयक) है यदि इसका संग्रहण संबंधित रिपोर्टों, पत्रिकाओं तथा अन्य आवधिक प्रकाशनों, विशेषतया लिखित लेखों, सरकारी प्रकाशनों, पुस्तकों इत्यादि से किया जाता है। आंकड़ा स्रोत आंतरिक या बाहय हो सकते हैं। आंतरिक स्रोत स्वयं फर्म में ही विद्यमान होते हैं जैसा लेखाकरण डाटा, बिक्री कार्मिकों की रिपोर्टें इत्यादि जबकि फर्म से बाहय स्रोत बाहरी स्रोत हैं।
- आंकड़ा प्रक्रियान्वयन तथा विश्लेषण
एकत्र किए गए आंकड़ों का प्रक्रियान्वयन एवं विश्लेषण किया जाता है। इस प्रकार इसे एक अर्थपूर्ण प्ररूप में रूपांतरित किया जाता है ताकि आरंभिक रूप से अभिज्ञात तथा परिभाषित समस्याओं के उत्तर सुझाए जा सकें। आंकड़ा प्रक्रियान्वयन की शुरूआत डाटा के वर्गीकरण तथा कूटीकरण सुसंगतता की जांच करने के लिए डाटा के सम्पादन अथवा निरीक्षण से की जाती है। डाटा का विश्लेषण संग्रहित डाटा को समझने के लिए तर्क के अनुप्रयोग का द्योतक है। इसमें संगत पैटर्नों का निर्धारण तथा विभिन्न विश्लेषणात्मक तकनीकों के प्रयोग द्वारा समुचित ब्यौरों का सारांशीकरण शामिल है। इस चरण का उद्देश्य यह जांच करना है कि क्या अनुभव आधारित निष्कर्ष पूर्व में किए गए कथनों या परिकल्नाओं को समर्थित करते हैं या उनका विरोध करते हैं।
- निष्कर्षों का निरूपण करना तथा रिपोर्ट तैयार करना
अंतिम चरण सूचना की व्याख्या करना तथा व्यापार निर्णयनों में प्रयोग हेतु निष्कर्ष निकालना है। अनुसंधान रिपोर्ट में स्पष्ट तथा प्रभावपूर्ण रूप में अनुसंधान निष्कर्ष संसूचित किए जाने चाहिए। आवश्यक होने पर अनुसंधान मामले में अपनी समुचित अनुशंसाएं या सुझाव दे सकता है। इस प्रकार तैयार रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण तकनीकी रूप से सही तथा अवबोधगम्य होना चाहिए।
बाजार अनुसंधान का महत्व
- यह संभाव्य बिक्री के पूवानुमान द्वारा आयोजित उत्पादन सुकर बनाता है।
- यह विद्यमान या नए उत्पादों के प्रति उपभोक्ता प्रतिरोध के कारणों को चुनने में सहायता करता है।
- यह उत्पाद के लिए मांग के स्वरूप को उदघाटित करता है अर्थात क्या उत्पाद की पूर्ण वर्ष मांग रहती है या इसकी मौसमी मांग होती है।
- यह उत्पाद की उपयोगिता के साथ-साथ वितरण के विद्यमान चैनलों की प्रभावात्मकता को निर्दिष्ट करता है।
- यह विद्यमान उत्पादों के लिए कुछ नए उपयोग उदघाटित कर सकता है।
- यह संभावी या भावी बाजारों के बारे में सूचना उपलब्ध कराता है।
- यह उत्पाद की नई श्रृंखलाओं की खोज में सहायक है।
तथापि, अनुसंधान अध्ययन अपना प्रयोजन पूरा करने में विफल रहेगा यदि विपणन प्रबंधक अनुसंधान समस्या का पूर्ण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत न करें; अथवा अपर्याप्त समय अनुमत करे; या अनुसंधान का प्रयोग एक ‘अग्नि शमन’ युक्ति के रूप में करें; अथवा अनुसंधान के मूल्य (महत्व) को पूर्ण रूप में न समझे, अत: कोई भी आकार होने के बावजूद प्रत्येक कम्पनी के पास एक उपयुक्त (सफल) बाजार अनुसंधान कार्यनीति होनी चाहिए जो निरंतर इसके उत्पाद के निष्पादन की निगरानी करे। कार्यनीति में उत्पाद के लिए प्रतिस्पर्द्धा के साथ-साथ ग्राहकों की अनुक्रिया की भी नियमित आधार पर जांच की जानी चाहिए। यह अनुसंधान प्रक्रिया बड़े पैमाने के व्यवसायों के लिए कहीं अधिक सहज है जिनके पास सामान्यत: अपने स्वयं के औपचारिक विपणन नेटवर्क, मीडिया अभियान तथा सशक्त बिक्री बल होते हैं। उदाहरणार्थ, (i) विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई) , कृषि मंत्रालय देश में विभिन्न कृषि वस्तुओं के संबंध में जिस विपणन सर्वेक्षण तथा विपणन प्रणाली का गहन अध्ययन करता है। निदेशालय अनेक रिपोर्टें प्रकाशित करता है तथा लब्ध प्रतिष्ठ विद्वानों, संस्थाओं को कृषि विपणन के क्षेत्र में जांचोन्मुखी गुणवत्ता अनुसंधान करने के लिए अनुसंधान अनुदान प्रदान करता है;(ii) कपड़ा समिति , कपड़ा मंत्रालय में एक बाजार अनुसंधान स्कंध है जो कपड़ों के लिए मांग पैटर्न के संबंध में नियमित बाजार सर्वेक्षणों/जनगणना के साथ-साथ कपड़ा उद्योग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों संबंधी आंकड़ाधार के सृजन के लिए उद्योग विशिष्ट सर्वेक्षणों/जनगणना का संचालन करना है। |