| चिकित्सा का अभिप्राय स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा से है जो बीमार, दुर्घटना होने या बीमारी होने पर अपने कर्मचारियों को व्यापार उद्यम द्वारा मुहैया कराई जाती है। स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में संगठन कम से कम वर्ष में एक बार कर्मचारी एवं उनके आश्रितों के उपचार के लिए उचित व्यवस्था मुफ्त या रियायती दर पर अपने कर्मचारियों के लिए नियमित चिकित्सा जांच की व्यवस्था करते हैं । कर्मचारियों को निम्नलिखित भी मुहैया कराया जाता है :- (i) चिकित्सा भत्ता;(ii) चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति: (iii) चिकित्सा अवकाश आदि।
केन्द्र अपने कर्मचारियों के लिए जो राजधानी और बड़े शहरों में निवास करते है केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना के माध्यम से और सरकारी अस्पतालों के जरिए स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं व्यस्थित करता है। योजना के तहत चिकित्सा सुविधाएं सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होती हैं जिनका भुगतान सिविल बजट से किया जाता है और उनके रिश्तेदार जो उस क्षेत्र में निवास करते हैं, स्कीम में शामिल किए जाते हैं। कर्मचारी योजना में से विकल्प चुन सकता है और अपने स्वामी के नियोक्ता द्वारा प्रदत्त चिकित्सा सुविधाएं ले सकता है। यदि कर्मचारी या उसके परिवार का सदस्य जो स्कीम में शामिल है, ऐसी जगह पर बीमार हो जाता है जो सीजीएचएस स्कीम में शामिल नहीं है तो उपचार केन्द्रीय सेवा (चिकित्सा उपचार) नियमावली 1944 के तहत अनुमत होगा। ये नियम निम्नलिखित को छोड़कर सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू होंगे (i) रेलवे सेवा के कर्मचारी (ii) वे जो अराजपत्रित हैं और कोलकाता से गुजरते हैं जिनकी सेवा शर्तें केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई जाती हैं या बनाई गई मानी जाती हैं, जब वे कार्य पर नहीं हैं, अवकाश पर हैं या भारत में बाध्य सेवा देते हैं या निलंबित हैं।
कम्पनी की चिकित्सा सुविधाओं में महिला कर्मचारियों को दी जाने वाली मातृत्व लाभ भी शामिल है। तदनुसार मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (एम बी एक्ट) का अधिनियम गर्भवती महिला कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए की गई है। अधिनियम का लक्ष्य मातृत्व सुरक्षा से संबंधित मामलों में एक रुपता लाना है और यह सभी फैक्टरियों, खानों और बागानों के लिए लागू होता हैं इसमें वे शामिल नहीं हैं जो 'कर्मचारी’ राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत आते हैं। अधिनियम में यह व्यवस्था है कि गर्भवती महिला कर्मचारियों को बर्खास्त नहीं किया जाना चाहिए और मातृत्व अवकाश की अवधि में उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाए। इसमें ये प्रावधान सन्निहित हैं :- (i) शिशु के जन्म के पहले और बाद में निश्चित अवधि के लिए महिला कर्मचारी को नकदी मातृत्व लाभ का भुगतान : (ii) 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश; चिकित्सा बोनस और कुछ अन्य लाभ। यह अधिनियम केन्द्रीय राज्य सरकारों दोनों द्वारा प्रवर्तित किया जाता है।
चूंकि अच्छी चिकित्सा देखभाल की पहुंच साधारणत: काफी महंगी होती है और इसमें बड़ी लागत निहित होती है, नियोक्ता अपने कर्मचारियों को चिकित्सा बीमा भी प्रदान करते हैं। बहुत भी बीमा कम्पनियों ने कुछ नीतियां तैयार की हैं जो कर्मचारियों को चिकित्सा बीमा मुहैया कराती है। उदाहरण के लिए:-
- यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड द्वारा कामगार क्षतिपूर्ति बीमा :- इसके तहत नियोक्ता को अपने कामगार के लिए प्रतिपूर्ति का भुगतान करना अपेक्षित है जो अपने कार्य के दौरान चोटिल होता या व्यावसायजनक बीमारी का शिकार होता है। ऐसी क्षतिपूर्ति कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत भुगतान योग्य होता है। ऐसे दायित्व का बीमा करने के लिए नियोक्ता बीमा पॉलिसी प्राप्त करता है। प्रीमियम साधारणत: पारिश्रमिक के आधार पर देय होता है। इसे 'नियोक्ता' देयता बीमा' भी कहा जाता है। यह पॉलिसी निम्नलिखित जोखिमों के लिए बीमा मुहैया कराती है :-
- कार्य करते समय 'कामगार' के दुर्घटनाग्रस्त होने पर 'नियोक्ता' के रूप में अपनी देयता के लिए बीमित क्षतिपूर्ति।
- अतिरिक्त प्रीमियम चिकित्सा पर सर्जिकल और अस्पताल के खर्च जिसमें दुर्घटना वश चोट लगाने पर अस्पताल पहुंचाने का खर्च शामिल है।
- कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम, के तहत उल्लिखित बीमारियों के संबंध में देयता, अतिरिक्त प्रीमियम पर जो नियुक्त के कारण इसके दौरान होती है।
इसी प्रकार से, नियोक्ता दायित्व नीति न्यू इंडिया इंश्योरेंस कम्प्नी लिमिटेड द्वारा प्रदान की जाती है। उनकी पॉलिसी में नियुक्त होने पर नियुक्ति के दौरान कामगार की मृत्यु होने या शारीरिक चोट, व्यावसायिक रोग होना शामिल है।
सुरक्षित कार्य परिवेश और स्वास्थ्य कार्य बल सफल व्यापार संगठन की बुनियाद बनाने में महत्वपूर्ण भमिका अदा करते हैं। |