| विविध बीमा उन जीवन, अग्नि और समुद्री बीमा से भिन्न बीमा संविदाओं के संदर्भ में है। इसमें बहुत से जोखिम शामिल है, जिसमें से मुख्य ये हैं :-
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा किसी व्यक्तिगत अथवा व्यक्तियों के समूहों की किसी व्यक्तिगत दुर्घटना अथवा बीमारी के विरुद्ध बीमा है। बीमा किया गया जोखिम शारीरिक चोट है जिसका परिणाम हिंसक, बाहरी और दृश्य साधनों के कारण और प्रत्यक्षत: दुर्घटना है। भारत में इस प्रकार की बीमा साधारण बीमा निगम द्वारा की जाती है। व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की संविदा कोई क्षतिपूर्ति संविदा नहीं है और बीमाकर्ता बीमा किए गए व्यक्ति की मृत्यु अथवा पूरी तरह से विकलांग होने पर धन की निश्चित राशि अदा करनी होती है अथवा चोट से उबरने के लिए चिकित्सा लाभ प्रदान करना होता है। यदि कुछ विनिर्दिष्ट बीमारियों के विरुद्ध जोखिम को भी शामिल किया जाता है तो उक्त पॉलिसी को ‘व्यक्तिगत दुर्घटना और रुग्णता बीमा’ के रूप में जाना जाता है। उदाहरण के लिए, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लि. द्वारा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा ।
मोटर वाहन बीमा
इसके अंतर्गत व्यक्तिगत अथवा वाणिज्यिक वाहन निम्नलिखित जोखिमों के विरुद्ध संयुक्त बीमा के अध्यधीन हैं :- (i) दुर्घटना अथवा चोरी के कारण मोटर वाहन और उसके अनुषंगियों को हानि अथवा क्षति (ii) दुर्घटना के कारण वाहन के मालिक अथवा यात्री की मृत्यु अथवा चोट लगने पर; (iii) दुर्घटना के लिए वाहन के मालिक द्वारा तीसरे पक्षों को संदेय क्षतियां। इन सभी जोखिमों को शामिल करने के लिए एक वृहत बीमा पॉलिसी को अपनाया जा सकता है। प्रथम दो प्रकार के जोखिमों के विरुद्ध बीमा ऐच्छिक है। लेकिन मोटर वाहन का प्रत्येक मालिक को मोटर वाहन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत तीसरे पक्ष के जोखिमों को शामिल करने के लिए एक बीमा पॉलिसी को लेना अपेक्षित है। ऐसी किसी पॉलिसी तृतीय पक्ष बीमा अथवा दायित्व बीमा के रूप में ज्ञात है। ऐसी किसी पॉलिसी के अंतर्गत तीसरे पक्ष जिसको कोई हानि हुई है, बीमाकर्ता के प्रत्यक्षत: इस बात के बावजूद वाद प्रस्तुत कर सकता है कि वह बीमा की संविदा कोई पक्ष नहीं था। उदाहरण के लिए, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लि. द्वारा मोटर बीमा। यह पॉलिसी वाहन के मालिकों, वित्त पोषकों अथवा पट्टाधारी जिसके किसी मोटर वाहन में बीमायोग्य हित हैं, को शामिल करने के लिए बीमा की व्यवस्था करता है।
तद्रूपता बीमा
इसके अंतर्गत बीमाकर्ता को बीमाकृत को मुआवजा देना होता है अर्थात नियोक्ताओं को कर्मचारियों के कारण उनको हुई हानि के विरूरुद्ध। यह हानि कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी, बेइमानी, निधियों माल दुरुपयोग अथवा संपत्ति की क्षतियों के कारण हो सकती है। इसके अंतर्गत सुरक्षा प्राप्त करने के लिए नियोक्ता को बीमाकृत का अपने कर्मचारियों के बारे में सभी वस्तुगत तथ्यों को बताया जाना अपेक्षित है और अपनी सेवा की शर्त में सभी परिवर्तनों को भी अधिसूचित करता है। उदाहरण के लिए, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि. द्वारा तद्रूपता बीमा। इस पॉलिसी के अंतर्गत बीमा कंपनी बीमाकृत (नियोक्ता) को कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी/बेइमानी के किसी कार्य के कारण हुई किसी प्रत्यक्ष आर्थिक हानि के विरुद्ध क्षतिपूर्ति के लिए सहमत होती है :-
- इस पॉलिसी आंरभ होने की तारीख को अथवा उसके बाद।
- बीमा किए गए साथ अबाधित सेवा के दौरान और इस पॉलिसी के जारी रहने के दौरान पता लगी अथवा इसकी समाप्ति के बारह कैलेण्डर माह के भीतर।
- मृत्यु, बर्खास्तगी अथवा ऐसी मृत्यु, बर्खास्तगी अथवा सेवा निवृत्ति के बारह कैलेण्डर माह सहित कर्मचारी की सेवा निवृत्ति इनमे जो भी पहले हो।
क्रेडिट बीमा
क्रेडिट बीमा उस हानि की पूर्ति करने की एक पॉलिसी है जो संदिग्ध ऋणों अथवा देनदारों द्वारा शेषों का भुगतान न करने के कारण उदभूत हो सकती है। यह उन व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान करता है जो क्रेडिट आधार पर माल को बेचते हैं, को भुगतान न करने के कारण विलोपन के समग्र जोखिम का काफी हद तक व्यय करता है। यह अपने देनदारों के दीवालिएपन से उदभूत हानियों के विरुद्ध उनको सुरक्षा प्रदान करता है। इन प्रकार बिक्री अवधियों का लाभ उठाने और नए उत्पाद व्यवस्थाओं अथवा प्रादेशिक क्षेत्रों सुरक्षित विस्तार में समर्थ बनाता है।
उदाहरण के लिए, न्यू इंडिया एश्योरंस कंपनी लि. द्वारा क्रेडिट बीमा। वे दो स्तरीय क्रेडिट प्रबंधन सहायता प्रदान करते हैं :-
- क्रेडिट निगरानी :- पॉलिसी अवधि के दौरान बीमा कंपनी ग्राहकों की बिक्रियों का मासिक विवरण प्राप्त करती है और ग्राहक-वार बिक्रियों और उनके भुगतान के ढंग पर निकट निगरानी रखती है। यह उनको ग्राहकों की भावी बिक्रियों, क्रेतावार निर्धारित करने में मदद करती है।
- क्रेडिट नियंत्रण :- प्रस्ताव फार्म पर कार्यवाही करते समय वे ग्राहक क्रेताओं के एक भाग का मूल्यांकन करते हैं। यह उन्हें क्रेडिट की सीमा क्रेतावार और स्वविवेकी, दोनों के निर्धारण में समर्थ बनाता है। ये सीमाएं ग्राहक-क्रेताओं की भुगतान क्षमता के प्रमाणिक निदर्शन हैं।
भारत में, एक्सपोर्ट क्रेडिट एंड गारंटी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. निर्यातकों को क्रेडिट बीमा प्रदान करता है। निर्यात क्रेडिट बीमा भुगतान जोखिमों के परिणामों, राजनीतिक और वाणिज्यिक दोनों से निर्यातकों की रक्षा करने, और बिना हानि के भय के विदेशों में अपने व्यापर को फैलाने में उनको समर्थ बनाने के लिए प्रकल्पित की गई है।
कामगार का क्षतिपूर्ति बीमा
नियोक्ता से अपेक्षित है कि वह अपने कामगारों को, जो अपने काम के दौरान घायल हो गए हो या व्यवसाय से जुड़े रोगों से ग्रस्त हो गए हो, क्षतिपूर्ति की अदायगी करे। ऐसी क्षतिपूर्ति कामगार की क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत देय है। नियोक्ता ऐसी देनदारी को कवर करने के लिए बीमा पॉलिसी ले सकता है। प्रीमियम आमतौर पर मजदूरी के आधार पर देय होते हैं। इसे‘नियोक्ता देनदारी बीमा’भी कहा जाता है। उदाहरण, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा कामगार का क्षतिपूर्ति बीमा। इस पॉलिसी में निम्नलिखित जोखिमों के संबंध में बीमा सुरक्षा मुहैया कराई गई है :-
- काम के दौरान ‘कामगार’ को लगी दुर्घटनात्मक चोटों (प्राणघातक चोटों सहित) के संबंध में ‘नियोक्ता’ के रूप में उसकी देनदारी के प्रति बीमित व्यक्ति को मुआवज़ा।
- अतिरिक्त प्रीमियम देने पर-चिकित्सीय, शल्य-चिकित्सा और अस्पताल का खर्च जिनमें नौकरी के दौरान दुर्घटनात्मक चोटों के लिए अस्पताल तक जाने की परिवहन लागत भी शामिल है।
- अतिरिक्त प्रीमियम देने पर, कामगार की क्षतिपूर्ति अधिनियम के अंतर्गत उल्लिखित, रोजगार के दौरान हो जाने वाली बीमारियों के संबंध में देनदारी।
यात्रा बीमा
यात्रा बीमा में भारत से बाहर यात्रा कर रहे उन सभी व्यक्तियों को सामान खो जाने, यात्रा से जुड़ी दुर्घटनाओं जिनमें अस्पताली उपचार वाली चोटें, बीमारियां और चिकित्सीय संकट शामिल हैं, के संबंध में सुरक्षा प्रदान की जाती है। भारत में यह बीमा पॉलिसी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में लोकप्रिय हो गई है। उदाहरणार्थ, युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लि. का यात्रा बीमा।
|