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पेटेंट्स
को उन एकाधिकारी अधिकारों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो सरकार द्वारा सीमित समयावधि अर्थात 20 वर्ष के लिए आविष्कार के पूर्ण प्रकटीकरण हेतु प्रदान किए जाते हैं। यह आविष्कार कोई उत्पाद अथवा प्रक्रिया हो सकता है। अत: यह किसी कार्य को करने का नया ढंग प्रदान करता है अथवा किसी समस्या के लिए नया तकनीकी समाधान प्रस्तुत करता है। उत्पादों अथवा नई मिश्र धातु वाले आविष्कारों को उत्पाद आविष्कार कहा जाता है इसके संगत पेटेंट को ‘उत्पाद पेटेंट’ कहा जाता है। जबकि एक ज्ञात या नई मिश्र धातु बनाने की प्रक्रिया अथवा प्रक्रियाओं वाले आविष्कारों को प्रक्रिया अविष्कार कहा जाता है तथा इसके पेटेंट को ‘प्रक्रिया पेटेंट’ कहा जाता है। पेटेंट प्रदान करने का उद्देश्य उनके संरक्षण एवं उपयोग का संवर्द्धन करके आविष्कारों को इस प्रकार प्रोत्साहित करना है जिसके उद्योगों के विकास में योगदान मिले जो कि बदले में प्रौद्योगिकीय आविष्कार के संवर्द्धन एवं प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण एवं प्रसार में योगदान देते हैं। अत: उस आविष्कार जिसके लिए पेटेंट दिया गया है सम्पदा अधिकारों (कानूनी नाम) सुनिश्चित करना है जो कि एक व्यक्ति अथवा एक कम्पनी हेतु अत्यंत मूल्यवान हो सकता है। व्यक्ति को पेटेंट प्रणाली तथा इसके द्वारा प्रदत्त लाभों का अधिकतम संभव प्रयोग करना चाहिए।
भारत में, पेटेंट अधिनियम, 1970 द्वारा केवल प्रक्रिया पेटेंट हेतु प्रावधान किया गया है तथा खाद्य, दवाओं व रसायनों जैसे उत्पादों हेतु आविष्कारों को केवल ईएमआर (विशिष्ट विपणन अधिकार) प्रदान किए गए है। तथापि पेटेंट्स अधिनियम (संशोधन), 2005 के तहत उक्त उत्पादों के संबंध में। जनवरी, 2005 से उत्पादा पेटेंट्स की भी अनुमति दी गई। अब, पेटेंट अधिनियम (संशोधन), 2005 के तहत पेटेंट्स को पश्च विरोध के साथ पूर्व-पेटेंट ग्रांट विरोध भी अनुज्ञेय है।
भारत में पेटेंट प्रणाली का संचालन महानियंत्रक, पेटेट्स, डिज़ाइन, व्यापार चिन्ह एवं भौगोलिक संकेतक. के अधीक्षण में होता है। महानियंत्रक का कार्यालय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के तहत कार्य करता है। महानियंत्रक, पेटेंट्स, डिज़ाइन एवं व्यापार चिन्ह पेटेंट कार्यालय तथा पेटेंट सूचना प्रणाली (पीआईएस). के कार्यकरण का निदेशन एवं पर्यवेक्षण करता है। पेटेंट कार्यालय पेटेंट अधिनियम के तहत नए आविष्कारों हेतु पेटेंट देने के संबंध में सांविधिक कर्तव्यों का निर्वहन करता है। पेटेंट्स का मुख्य कार्यालय कोलकाता में है तथा मुम्बई, चेन्नै एवं दिल्ली में इसकी शाखाएं है। ये शाखाएं अपने संबंधित क्षेत्राधिकार के भीतर पेटेंट हेतु आने वाले आवेदनों पर विचार करती हैं। पेटेंट सूचना प्रणाली (पीआईएस), नागपुर प्रयोक्ताओं हेतु पेटेंट सूचना आधार के रूप में कार्य कर रही है। पीआईएस विश्व-व्यापी आधार पर पेटेंट संबंधी विस्तृत ब्यौरा तथा पेटेंट संबंधी साहित्य का एक विस्तृत संकलन रखती है तथा आर एण्ड डी प्रतिष्ठानों के विभिन्न प्रयोक्ताओं, सरकारी कार्यालयों, निजी उद्योगों, व्यापार आविष्कारों एवं भारत के भीतर अन्य प्रयोक्ताओं को सर्च सेवाओं एवं पेटेंट प्रति आपूर्ति सेवाओं के माध्यम से पेटेंट में निहित प्रौद्योगिकीय सूचना अथवा पेटेंट संबंधी साहित्य प्रदान करती है।
एक पेटेंट के लिए आवेदन केवल एक खोज के लिए होना चाहिए और उसे निर्धारित प्रपत्र तथा पेटेंट कार्यालय में जमा किया जाना चाहिए। उसमें यह उल्लेख होना चाहिए कि आवेदक के पास खोज है और उनका दावा सत्य है एवं वह प्रथम खोजकर्ता है। खोज का विवरण देते हुए इसके साथ ‘‘अनंतिम विशिष्टताएं’’ का ब्यौरा होना चाहिए। अत: आवेदन, खोज की कार्यविधि के विकसित होने के पूर्ण ब्यौरे के पहले भी किया जा सकता है। एक पेटेंट के लिए दिए गए आवेदन जिसमें खोज का उल्लेख हो, में खोज की प्राथमिकता तिथि सुरक्षित करेगी और इसके पश्चात खोजकर्ता खोज के व्यवहारिक ब्यौरे तैयार करने और अनंतिम विशिष्टताएं प्रस्तुत करने की तिथि से 12 माह के अंदर संपूर्ण विशिष्टताएं प्रस्तुत करने में सक्षम हो सकेगा।
भारत में पेटेंट का अधिकार क्षेत्रीय प्रकृति का है और एक देश में लिए गए पेटेंट को दूसरे देश में लागू नहीं किया जा सकता। खोजकर्ता अथवा उनके समितियों को विभिन्न देशों में उन देशों के पेटेंट पाने के लिए अलग पेटेंट आवेदन प्रस्तुत करने होंगे। सभी देशों में एक समान आवेदन करने के लिए, पीसीटी (पेटेंट्स कॉर्पोरेशन ट्रीटी) के माध्यम से पेटेंट के लिए आवेदन करने का विकल्प है।
पेटेंट प्रदान करने के लिए बुनियादी आवश्यकताएं यह हैं कि खोज तकनीकी प्रकृति की हो तथा निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हो :-
- नवीनता :- विशिष्टता में उजागर किए गए मामले को, भारत में अथवा भारत में पेटेंट के लिए आवेदन करने से पहले कहीं भी प्रकाशित न किया गया हो।
- खोजपूर्ण कदम :- यह आवश्यक नहीं है कि कोई व्यक्ति पूर्व प्रकाशित/जानकारी/ दस्तावेज़ के आलोक में इस कला में निपुण हो।
- औद्योगिक रूप से लागू :- खोज उपयोगी हो ताकि उसे उद्योग में प्रयोग किया जा सके।
परंतु अधिनियम की परिमाषा के अंदर कुछ खोजों गैर-पेटेंट खोज है :-
- ऐसी खोज जो हो अथवा जिससे पूर्णतया प्रतिष्ठित नवीन या नए, भूल से प्रतिकूल हो और पूर्व कला में न हो।
- वैज्ञानिक सिद्धांत की मात्र खोज हो या सैद्धांतिक सार का फार्मूला हो (या किसी जीवित अथवा प्राकृतिक रूप से बन रही निर्जीव वस्तुएं हो)
- एक पहले से मौजूदा वस्तु के मात्र नए रूप की खोज हो, जिससे मौजूद तत्व की प्रभावोत्पादकता में कोई वृद्धि न हो।
- मानव और जानवरों के उपचार के नैदानिक, चिकित्सीय और शल्य चिकित्सा के तरीके हों।
- पौधों, बीजों, जानवरों, अनिवार्यत: जैविक प्रक्रियाएं, व्यापार प्रक्रियाएं, एल्गोरिदम, साहित्यिक, ड्रामा या कलात्मक कार्य, मानसिक क्रियाओं संबंधी प्रक्रियाएं इत्यादि जैसी सामग्री।
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