| भविष्य निधि ऐसी निधि है जो कम्पनी के कर्मचारियों को उनके रोजगार समाप्त होने पर लाभ पहुंचाती है (जो निधि कोष के सदस्य हैं) । कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को पूर्वनिर्धारित दरों के अनुसार निधि में अंशदान करने की आवश्यकता होती है। निधि की सदस्यता के लिए अर्हक होने के लिए कामगार को एक वर्ष की लगातार सेवा पूरी करनी होती है और उसे 12 माहों की अवधि के दौरान 240 दिन कार्य कर लिया होना चाहिए। कर्मचारियों को मूल वेतन, महंगाई भत्ता और अपने पास रखने के भत्तों की निश्चित दर अंशदान करना होता है। इसी प्रकार नियोक्ताओं को भी उसी दर पर अंशदान करना होता है।
भारत में भविष्य निधि संबंधी शासी अधिनियम है कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम 1952 (ईपीएफ एण्ड एमपी एक्ट) । यह अधिनियम औद्योगिक कामगारों के उनकी सेवानिवृत्ति पश्चात भविष्य के लिए और मृत्यु हो जाने की दशा में उनके आश्रितों के लिए व्यवस्था करने के लिए कुछ प्रावधान बनाने के मुख्य उद्देश्य से बनाया गया था। यह अधिनियम जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू होता है। यह प्रत्येक प्रतिष्ठान के लिए लागू होता है, जो अधिनियम की अनुसूची I में विनिर्दिष्ट एक या अधिक उद्योगों या केन्द्रीय सरकार द्वारा शासकीय राजपत्र में अधिसूचित किसी कार्यकलाप में रत है एवं 20 या इससे अधिक व्यक्तियों को नियुक्त किया है। अधिनियम में कामगारों और उनके आश्रितों के लिए वृद्धावस्था की जोखिमों, सेवानिवृत्ति, सेवामुक्त, छंटनी या कामगार की मृत्यु हो जाने पर बीमा की व्यवस्था है।
लागू वर्तमान में अधिनियम के तहत ये योजनाएं कार्यरत हैं और इनका प्रशासन केन्द्रीय ट्रस्टी बोर्ड द्वारा होता है। तीन योजनाओं को एक साथ मिलकार कर्मचारियों को वृद्धावस्था और उत्तरजीविता लाभ कर्मचारी की दीर्घावधिक अभिरक्षा एवं सुरक्षा और उसकी मृत्यु के बाद उसके परिवार के सदस्यों के लिए और समय पर अग्रिम जिसमें बीमारी के दौरान अग्रिम और सदस्यता की अवधि के दौरान रिहायशी आवास खरीदने/निर्माण करने के लिए अग्रिम की व्यवस्था की जाती है। ये तीन योजनाएं निम्नलिखित हैं :-
- केन्द्रीय ट्रस्टी बोर्ड कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 :- इसमें कर्मचारियों के लिए अनिवार्य बचत प्रणाली की व्यवस्था करके प्रतिष्ठान में वित्तीय सुरक्षा प्रदान किया जाता है। योजना में ऐसे कर्मचारियों को शामिल किया जाता है जिनकी मजदूरी, 6,500 रुपए प्रतिमाह से कम है। इस योजना में निधि के सदस्यों की निम्नलिखित आवश्यकताओं की पूर्ति की होती है :- (i) सेवानिवृत्ति; (ii) चिकित्सा देखभाल; (iii) आवास; (iv) पारिवारिक दायित्व; (v) बच्चों की शिक्षा; और (vi) बीमा पॉलिसियों का वित्त पोषण। तथापि, कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत दिवंगत सदस्य के उत्तराधिकारियों या नामितों को राहत पहुंचाने के लिए मृत्यु राहत कोष की स्थापना की गई है।
- कर्मचारी जमा सहबद्ध बीमा योजना, 1976 :- भविष्य निधि के दिवंगत सदस्य के परिवार को जीवन बीमा के रूप में अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार में कर्मचारी जमा सहबद्ध बीमा योजना पुन: स्थापित की है। इसके तहत कर्मचारी की सेवा में रहते मृत्यु हो जाने पर, जो कर्मचारी भविष्य निधि का सदस्य है, तो उस व्यक्ति को जो भविष्य निधि संचय प्राप्त करने का हकदार है, को पिछले 12 माहों के दौरान दिवंगत के भविष्य निधि खाते में औसत शेष के बराबर राशि का भुगतान किया जाएगा।
- कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 (कर्मचारी परिवार पेंशन योजना 1971 का प्रतिस्थापन) :- पेंशन (जो अधिवर्षिता के रूप में भी जाना जाता है) एक सेवानिवृत्ति योजना है जिसका उद्देश्य व्यक्ति को जीवन के लिए सुरक्षित आय मुहैया कराती है। इसकी परिभाषा कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय वृद्धावस्था के दौरान, स्थायी विकलांगता के समय, कामगार की मृत्यु होने पर परिवार पेंशन आदि के रूप में देय भुगतान या लाभ के रूप में दी गई है। कर्मचारी पेंशन योजना औद्योगिक कामगारों के लिए पुर:स्थापित की गई थी जिसमें वेतन के 50 प्रतिशत की दर पर पेंशन कर्मचारी को सेवानिवृत्त होने पर या 33 वर्षों की सेवा पूरी करने पर भुगतान योग्य होता है। पेंशन का हकदार बनने के लिए कम से कम 10 वर्ष की सेवा आवश्यकता है, इस योजना में कर्मचारी का वेतन और उसकी सेवा के आधार पर परिवार के सदस्यों को पेंशन मुहैया कराई जाती है। योजना का वित्तपोषण नियोक्ताओं और कर्मचारी की कर्मचारी भविष्य निधि में अंशदान के कुछ भाग के साथ केन्द्रीय सरकार द्वारा अतिरिक्त अंशदान के साथ किया जाता है।
कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (ईपीएफ एण्ड एमपी एक्ट) का प्रशासन केन्द्रीय और राज्य सरकारों तथा केन्द्रीय ट्रस्टी बोर्ड और समितियों एवं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)| कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) इंडिया, सदस्यों और वित्तीय लेन देनों के आधार पर विश्व में एक सबसे बड़ी भविष्य निधि संस्था है। यह एक त्रिपक्षीय स्वायत्त निकाय है यह श्रम मंत्रालय, भारत के सरकार के नियंत्रणाधीन हैं जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। ईपीएफओ का लक्ष्य अपने सतत प्रयास के जरिए और अपने सदस्यों को सुधरती अनुपालन मानक एवं लाभ प्रदाय प्रणाली के द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रबंधन की जाने वाली वृद्धावस्था आय सुरक्षा कार्यक्रम की पहुंच और गुणवत्ता का विस्तार करना है। इस तरह से यह देश के आर्थिक और सामाजिक खुशहाली के लिए योगदान करने हेतु लक्षित है। |