प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम,1957, के अनुसार प्रतिलिप्यधिकार' से अभिप्रेत किसी 'कार्य' को करने अथवा उसे अथवा उसके किसी महत्वपूर्ण भाग को करने के लिए प्राधिकृत करने के विशिष्ट अधिकार से है। यहाँ प्रयुक्त ‘कार्य’ शब्द से अभिप्राय है :-
- साहित्य – संबंधित कार्य:- इसके कम्प्यूटर कार्यक्रम, तालिकाएं, समेकन एवं कम्प्यूटर डाटाबेस शामिल हैं।
- नाटकीय कार्य :- इसके वाचन का कोई अंश, कोरियोग्राफिक कार्य अथवा मूक शो में मनोरंजन, दृश्य संबंधी प्रबंध अथवा अभिनय, जिसका रूप लिखित अथवा अन्य ढंग से निर्धारित है, शामिल है।
- संगीतमय कार्य :- इसके संगीत कार्य, ऐसे कार्य की कोई लेखा-चित्रीय चित्रलिपि शामिल है परंतु इसमें गाए, बोले अथवा संगीत के साथ किए जाने वाले कोई शब्द अथवा कार्य शामलि नहीं है।
- कलात्मक कार्य :- इसका अर्थ है कि पेंटिंग, मूर्तिकल्प, ड्राइंग (रेखाचित्र, नक्शा, चार्ट अथवा योजना सहित), नक्काशी अथवा फोटोग्राफ चाहे उनके कलात्मक गुण हों अथवा नहीं। इसमें वास्तुशिल्प का कार्य तथा कलात्मक शिल्पकारी का कोई अन्य कार्य शामिल है।
- सिनेमेटोग्राफिक फिल्म :-इसका अर्थ है किसी माध्यम पर दृश्य रिकॉर्डिंग का कोई कार्य जो उस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है जिससे किसी तरीके से चल तस्वीर तैयार की जा सके।
- ध्वनि रिकॉर्डिंग :- इसका अर्थ ध्वनियों की रिकॉर्डिंग से है जिससे ध्वनियाँ उत्पन्न की जा सकें। इसमें माध्यम पर ध्यान नहीं दिया जाता जिसके द्वारा ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
'संबंधित अधिकार' निष्पादकों के अधिकार है जैसे अभिनेता, गायक एवं संगीतकार, फोनोग्राफ एवं संचार संगठनों के प्रोड्यूसर।
प्रतिलिप्यधिकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग के प्रभार में है। भारत में प्रतिलिप्यधिकार के कानून प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम,1957 से शामिल होते है। अधिनियम के तहत एक प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड की स्थापना की जाती है। बोर्ड की कॉपीराइट पंजीकरण से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णय, कॉपीराइट के कार्य, जनता से रोके गए कार्यों के संबंध में लाइसेंस देने, अप्रकाशित भारतीय कार्य, अनुवादों के उत्पादन एवं प्रकाशत तथा निश्चित विनिर्दिष्ट प्रयोजनों हेतु कार्य सौंपें गए है। अधिनियम द्वारा प्रतिलिप्यधिकार रजिस्टार के नियंत्रण के तहत प्रतिलिप्यधिकार कार्यालय की स्थापना की गई है।
किसी कार्य के सृजित होते ही कॉपीराइट अस्तित्व में आता है तथा कॉपीराइट प्राप्त करने में किसी औपचारिकता की आवश्यकता नहीं होती है। दूसरे शब्दों में, कॉपीराइट का प्रापण स्वचालित है तथा पंजीकरण वैकल्पिक है। तथापि, कॉपीराइट के स्थायित्व के संबंध में विवाद की स्थिति में कॉपीराइट के पंजीकरण का प्रमाणपत्र तथा उसके की गई प्रविष्टियाँ न्यायालय में प्रथम दृष्टया गवाही के रूप में काम आती हैं।
कॉपीराइट रजिस्टर में कार्य पंजीकृत करवाने की सुविधाएं शिक्षा विभाग के कॉपीराइट कार्यालय में रखी जाती हैं। समस्त प्रकार के कार्यों को पंजीकरण सुविधाएं प्रदान करवाने के लिए कॉपीराइट कार्यालय की स्थापना की गई है।
कॉपीराइट नियम, 1956 किसी कार्य के पंजीकरण हेतु प्रक्रिया निर्धारित करते है। पंजीकरण की प्रक्रिया निम्नानुसार हैं:-
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पंजीकरण हेतु आवेदन नियमों में यथानिर्धारित ढंग से फॉर्म IV (विवरणों का वक्तव्य एवं आगे के विवरण) में किए जाते हैं।
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प्रत्येक कार्य हेतु पृथक आवेदन किए जाने चाहिए।
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प्रत्येक आवेदन में नियमों में निर्धारित आवश्यक शुल्क होना चाहिए।
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आवेदन, आवेदक द्वारा अथवा उस वकील द्वारा जिसके पक्ष में वकालतनामा अथवा पावर ऑफ अटॉर्नी की गई है, हस्ताक्षरित होनी चाहिए। पक्ष द्वारा हस्ताक्षरित तथा वकील द्वारा स्वीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी भी संलग्न हो। विवरणों को दर्शाती विवरणी तथा अतिरिक्त विवरणों को दर्शाती विवरणी के प्रत्येक कॉलम का विशिष्ट रूप से उत्तर दिया जाए।
प्रकाशित तथा अप्रकाशित दोनों ही प्रकार के कार्य पंजीकृत किया जा सकते हैं। जब किसी कार्य को अप्रकाशित रूप में पंजीकृत किया गया है तथा बाद में यह प्रकाशित हो जाता है तो आवेदक निर्धारित शुल्क के साथ फॉर्म V में कॉपीराइट रजिस्टर में प्रविष्ट विवरणों में परिवर्तन हेतु आवेदन कर सकता है।
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