बिक्री कौशल या व्यक्तिगत (वैयक्तिक) बिक्री सवंर्धन का सबसे पुराना और आम स्वरूप है। इसमें विनिर्माता द्वारा संभावी क्रेता को सीधी बिक्री शामिल है। यह क्रेता को कोई विशिष्ट उत्पाद या सेवा कररने के लिए प्रेरित करने के प्रयोजनार्थ संभावी ग्राहक के साथ आमने सामने किया गया मौखिक सम्पर्क है। यह संभावी ग्राहकों की आवश्यकताओं, स्वरूप तथा व्यवहार को समझने तथा उन्हें प्रश्नाधीन उत्पाद के संबंध में पूर्ण जानकारी देने की एक महत्वपूर्ण विधि है। इस प्रकार प्राप्त सूचना उद्यमी को ग्राहकों की मांग के अनुसार उत्पाद का विनिर्माण करने में सहायता करती है। वैयक्तिक स्वरूप की होने के कारण यह संवर्धन की एक अपरिहार्य तकनीक है। कोई भी फर्म निम्नलिखित उद्देश्यों से वैयक्तिक बिक्री करती है :-
- आत्मिक भाव के साथ किसी नए उत्पाद या सेवा का परिचय देना।
- उत्पादों के लिए इस प्रकार मांग का सृजन करना कि वह आपूर्ति में पूर्वगामी हो।
- ग्राहकों के संदेहों को व्यक्तिगत रूप से दूर करना
- न्यूनतम लागत पर प्रभावी बिक्री करना तथा पुनरावृत्त बिक्री सुनिश्चित करना।
- प्रबंधकों को लिए बहुमूल्य पश्च जानकारी (फीडबैक) उपलब्ध कराना।
बिक्री कार्मिकों को उनके नियोजकों के आधार पर निम्न श्रेणियों में श्रेणीकृत किया जा सकता है :-
- विनिर्माता का बिक्री कार्मिक :- उन्हें सीधे उपभोक्ताओं को या थोक विक्रेताओं को अथवा खुदरा विक्रेताओं को उत्पाद बेचने के लिए नियोजित किया जाता है। उन्हें अपने नियोजकों के उत्पादों के बारे में विशेषीकृत ज्ञान प्राप्त होता है। ये या तो सृजनात्मक विक्रेता होते हैं अथवा डीलर-शोधन विक्रेता होते हें। पूर्ववर्ती को किसी नए उत्पादों के लिए आउटलेट का सृजन करने तथा डीलरों के साथ उत्पाद प्रहस्तन के लिए प्रेरित करने हेतु सम्पर्क करने के लिए नियोजित किया जाता है। जबकि पश्चोक्त द्वारा अपने नियोक्ता के उत्पादों के डीलरों को सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
- विशेष बिक्री कार्मिक :- उच्च मूल्य वस्तुओं जैसे कम्प्यूटरों, ऑटोमोबाइल, मशीन, टेलीविजन सेट इत्यादि में संव्यवहार करते हैं। वे संभावी ग्राहकों के साथ मुलाकात करते हैं तथा उन्हें अपने उत्पाद की उपयोगिता पर उत्पाद की संस्थापना में भी सहायता करते हैं।
- थोक विक्रेता के बिक्री कार्मिक :-सामान्यत: खुदरा तथा बही आदेशों पर आते हैं। वे खुदरा विक्रेताओं को उत्पाद की उपलब्धता के बारे में जानकारी देते हैं तथा आपूर्तियां प्राप्त करने में उनकी सहायता करते हैं।
- खुदरा विक्रेता के बिक्री कार्मिक :- सीधे उपभोक्ताओं के साथ संव्यवहार करते हैं। वे काउंटर बिक्री कार्मिक या बहिरंग बिक्री कार्मिक हो सकते हैं। पूर्वोक्त स्टोर में आने वाले ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं जबकि पश्चोक्त वस्तुओं के नमूने ले जा कर संभावी ग्राहकों के पास जाते हैं और उन्हें अपने में वस्तुएं क्रय करने के लिए प्रेरित करते हैं।
वैयक्तकि बिक्री की सफलता बिक्री कार्मिक के कौशलों, उस ढांचे जिसमें वह कार्य करता है, तथा साथ ही उसवके ज्ञान एवं अनुभव पर निर्भर करती हैं। एक प्रभावपूर्ण बिक्री कार्मिक को उत्पाद की पूर्णजानकारी होनी चाहिए तथा उसमें संभावी क्रेता को आश्वस्त करने का सामर्थ्य होना चाहिए उसे उस कम्पनी/फर्म का भी पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिसका वह प्रतिनिधि है तथा उसमें ग्राहक के प्रश्नों का उत्तर देने का सामर्थ्य होना चाहिए। प्रभावपूर्ण होने के लिए, बिक्री कार्मिक के पास निम्न प्रकार का ज्ञान होना चाहिए :-
- आत्म ज्ञान :- उसमें अपने कार्य की आवश्यकताओं के आलोक में स्वयं का निरंतर आकलन करके तथा अपने गुणों का विश्लेषण करके अपने व्यक्तित्व का सर्वोत्तम उपयोग करने का समार्थ्य होना चाहिए। इसमें उसे अपनी क्षमताओं को सुधारने तथा प्रशिक्षण एवं अनुभव के जरिए अपनी कमजोरियों को दूर करने में सहायता मिलेगी।
- फर्म का ज्ञान :- उसे फर्म के इतिहास की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। उसे अपनी फर्म के उद्देश्यों, नीतियों, स्थिति तथा संगठनात्मक संरचना को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। ऐसे ज्ञान से उसे वैयक्तिक बिक्री के फर्म के सशक्त बिंदुओं का प्रयोग करने में सहायता मिलेगी।
- उत्पाद का ज्ञान :- उसमें ग्राहकों को उनके संदेहों तथा आपत्तियों को दूर कर उत्पाद की विशिष्टताओं तथा उपयोगिता के संबंध में आश्वस्त करने का सामर्थ्य होना चाहिए। इस प्रकार उसे उत्पाद के स्वरूप विनिर्माणकारी ब्यौरों, बिक्री की शर्तों तथा निबंधनों, प्रयुक्त वितरण चैनलों एवं संवर्धनात्मक गतिविधियों की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
- प्रतिस्पर्द्धियों का ज्ञान :- अपने उत्पाद की उत्कृष्टता सिद्ध करने के उद्देश्य से उसे प्रतिस्पर्द्धी उत्पादों, उनके सकारात्मक तथा नकारात्मक विशेषताओं की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। प्रतिस्पर्द्धियों की बिक्री नीतियों, उनके ब्रांडों तथा कीमतों इत्यादि की जानकारी भी सहायक होगी।
- ग्राहकों का ज्ञान :- सफल होने के उद्देश्य से उसे सही आकर्षणीयता तथा दृष्टिकोण का प्रयोग करना चाहिए। उसमें संभावताओं को सही तथा त्वरित रूप से समझपने तथा उन्हें प्रेररित करने एवं उन्हें स्थायी रूप से जीतने का सामर्थ्य होना चाहिए, अत: उसे ग्राहकों के स्वरूप तथा किस्म (उनकी आयु, अवस्थल, लिंग, आय, शिक्षा, इत्यादि) तथा उनके क्रय उद्देश्यों (निम्न कीमत, सुविधा, प्रतिष्ठा, फैशन, इत्यादि) का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए।
- बिक्री तकनीकों का ज्ञान :- सबसे अधिक, उसे बिक्री कौशल के सिद्धातों एवं तकनीकों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए। उसे ग्राहक पर संकेन्द्रित ध्यान देना चाहिए, ग्राहकों के प्रति नम्र एवं सहानुभूति का व्यवहार रखना चाहिए, कभी धैर्य नहीं खोना चाहिए, ग्राहक को राजा मानना चाहिए, स्थायी ग्राहक तथा सद्भाव निर्माण उसका उद्देश्य होना चाहिए, उसे सर्वोत्तम संभव तरीके से ग्राहक की सहायता करनी चाहिए, इत्यादि।
वैयक्तिक बिक्री में विज्ञापन के जरिए सामूहिक या अवैयक्तिक बिक्री की तुलना में प्रचालन में अधिक नम्य होने को लाभ विद्यमान है। बिक्री कार्मिक व्यष्टि ग्राहकों की आवश्यकताओं, उद्देश्यों एवं व्यवहार के समनुरूप उपयुक्त होने के लिए अपने बिक्री प्रस्तुतीकरणों में काटछांट कर सकते हैं। वे किसी विशिष्ट बिक्री दृष्टिकोण के प्रति ग्राहक की अनुक्रिया का अवलोकन कर सकत हैर तथा फिर तत्स्थल आवश्यक समायोजन कर सकता है। विक्रेता अपने उत्पाद के लिए लक्ष्य बाजार का चयन कर सकता है तथा केवल संभावी ग्राहकों पर संकेन्द्रण कर सकता है। संवर्धन के अन्य साधनों की तुलना में वैयक्तिक बिक्री अधिक प्रभावपूर्ण है क्योंकि यह वास्तविक बिक्री में परिगामी होती है। |