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कर:
कॉर्पोरेट का कराधान
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कम्‍पनी, चाहे वह भारतीय हो या विदेशी हो, आयकर अधिनियम,1961 के अंतर्गत कराधान के लिए दायी है। कॉर्पोरेशन कर ऐसा कर है जो पंजीकृत कम्‍पनियों तथा कॉर्पोरेशन की आय पर उद्ग्रहीत किया जाता है।

कम्‍पनी का अर्थ है :-

  • कोई भारतीय कम्‍पनी, अथवा

  • कोई कॉर्पोरेट (निगमित) निकाय जिसे भारत से बाहर किसी देश द्वारा या उसके कानूनों के अंतर्गत निगमित किया गया हो, अथवा

  • कोई संस्‍था, एसोसिएशन या निकाय जिसे आयकर अधिनियम 1922 के अंतर्गत किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए कम्‍पनी के रूप में निर्धारित किया गया हो अथवा जिसे पहली अप्रैल 1970 को या उससे पूर्व किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस अधिनियम के अंतर्गत कम्‍पनी के रूप में निर्धारित किया गया हो, अथवा

  • कोई संस्‍था, एसोसिएशन अथवा निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं तथा चाहे वह भारतीय हो या गैर भारतीय हो जिसे केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड के किसी सामान्‍य अथवा विशेष आदेश के द्वारा कम्‍पनी घोषित किया गया हो।

भारत की कम्‍पनी, चाहे वे सरकारी हो या निजी हो, कम्‍पनी अधिनयिम 1956 द्वारा शासित हैं। कम्‍पनी रजिस्‍ट्रार तथा कम्‍पनी विधि बोर्ड इस अधिनियम के उपबंधों को प्रशासित करते हैं।

तथापि, कराधान के प्रयोजनार्थ, कम्‍पनियों को मोटे तौर पर निम्‍न प्रकार वर्गीकृत किया गया हैं :-

  • देशीय कम्‍पनी [ धारा 2 (22 क )]:- का अर्थ है कोई भारतीय कम्‍पनी (अर्थात कम्‍पनी अधिनियम, 1956 कम्‍पनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत निर्मित तथा पंजीकृत कम्‍पनी) या कोई अन्‍य कम्‍पनी जिसने आयकर अधिनियम के अंतर्गत आयकर के लिए दायी अपनी आय के संबंध में ऐसी आय में से संदेय लाभांशों की भारत के भीतर घोषणा तथा भुगतानों के लिए निर्धारित व्‍यवस्‍था की है। देशीय कम्‍पनी सरकारी कम्‍पनी या निजी कम्‍पनी हो सकती है।
  • विदेशी कम्‍पनी [ धारा 2 (23 क) ] :- का अर्थ है वह कम्‍पनी जिसका नियंत्रण एवं प्रबंधन पूर्णतया भारत के बाहर अवस्थित है तथा जिसने भारत के भीतर लाभांशों की घोषणा तथा भुगतान के लिए निर्धारित व्‍यवस्‍थाएं नहीं की हैं।

कम्‍पनी के कराधान से जुड़े प्रावधान

भारतीय कम्‍पनियों पर उनकी आय के स्रोत तथा उदगम को ध्‍यान में रखे बिना उनकी विश्‍वव्‍यापी आय पर कर लगाया जाता है। विदेशी कम्‍पनियों पर केवल उस आय पर कर लगाया जाता है जो भारत से बाहर किए गए प्रचालनों से प्राप्‍‍त होती है अथवा कुछ मामलों में उस आय पर कर लगाया जाता है जो भारत में सृजित हुई मानी जाती है। पश्‍चोक्‍त में भारत में अवस्थित पूंजीगत आस्तियों की बिक्री से प्राप्‍त लाभ (भारतीय कम्‍पनी में शेयरों की बिक्री से लाभों सहित), ब्‍याज, तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्‍क, रायल्‍टी तथा भारतीय कम्‍पनियों से लाभांश शामिल है। इस प्रकार, कम्‍पनी की आय पर कर देयता कम्‍पनी की रिहायशी प्रास्थिति पर निर्भर है।

  • कम्‍पनी को किसी संगत विगत वर्ष के दौरान भारत में निवासी कहा जाता है यदि :- () वह एक भारतीय कम्‍पनी है; अथवा () इसके कार्यकलापों का नियंत्रण एवं प्रबंधन पूर्णतया भारत में अवस्थित है। निवासी कम्‍पनियों के मामले में, कर के लिए दायी कुल आय में निम्‍न शामिल है [ (धारा 5(1)) ]:-
    • कोई भी आय जो ऐसी कम्‍पनी द्वारा या उसकी ओर से भारत में प्राप्‍त हुई है या प्राप्‍त हुई मानी गई हैं;
    • कोई भी आय जो संगत विगत वर्ष के दौरान भारत में उपार्जित या प्राप्‍त हुई है अथवा उपार्जित या प्राप्‍त मानी गई है;
    • कोई भी आय जो संगत विगत वर्ष के दौरान भारत के बाहर उपार्जित या प्राप्‍त हुई है।
  • इसी प्रकार, एक कम्‍पनी को किसी संगत विगत वर्ष के दौरान अनिवासी कहा जाता है यदि () वह भारतीय कम्‍पनी नहीं है, तथा () इसके कार्यकलापों का नियंत्रण एवं प्रबंधन पूर्णतया/अंशत: भारत के बाहर अवस्थित है। अनिवासी कम्‍पनियों के मामले में, कर के लिए दायी कुल आय में निम्‍न शामिल है [ (धारा 5(2)) ]:-
    • कोई भी आय जो ऐसी कम्‍पनी द्वारा या उसकी ओर से भारत में प्राप्‍त हुई है या प्राप्‍त हुई मानी गई हैं;
    • कोई भी आय जो संगत विगत वर्ष के दौरान भारत में उपार्जित या प्राप्‍त हुई है अथवा उपार्जित या प्राप्‍त मानी गई है;

परिणामत:, ऐसी स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है जहां एक ही आय उसी कम्‍पनी के पास एक या अधिक देशों में कर योग्‍य हो जाए तो दोहरे कराधान में परिणामी हो। दोहरे कराधान की समस्‍या निम्‍न में से किसी एक कारण से उत्‍पन्‍न हो सकती है :-

  • कम्‍पनी (या व्‍यक्ति) किसी एक देश का निवासी हो किन्‍तु उसे किसी अन्‍य देश से भी आय प्राप्‍त होती है, इस प्रकार वह दोनों देशों में कर लगाए जाने योग्‍य हो जाता है।
  • कम्‍पनी/व्‍यक्ति की विश्‍व आय पर दो या अधिक देशों में कर लगाया जाए जिसे कर के प्रति समवर्ती पूर्ण देयता कहा जाता है। एक देश करदाता की राष्‍ट्रीयता के आधार पर कर लगाता है तथा दूसरा देश अपनी सीमा के भीतर उसका निवास होने के आधार पर कर लगाता है। इस प्रकार, एक देश में मूल निवास स्‍थान रखने वाला तथा किसी अन्‍य देश में रह रहे व्‍यक्ति पर उसकी विश्‍व आय के संबंध में दोनों देशों में कर लगाया जाता है।
  • कोई कम्‍पनी/व्‍यक्ति जो दोनों देशों में अनिवासी है, उन देशों में से एक से प्राप्‍त आय पर उन में से प्रत्‍येक में कर के अध्‍यधीन है। उदाहरणार्थ, अनिवासी व्‍यक्ति की एक देश में स्‍थायी स्‍थापना है तथा उसके माध्‍यम से वह दूसरे देश से आय प्राप्‍त करता है।

कॉर्पोरेटों के कराधान की व्‍यवस्‍था भारत में दोहरे कराधान से राहत आयकर अधिनियम की धारा 90 तथा धारा 91 के अतंर्गत की गई है।

  • आयकर अधिनियम की धारा धारा 90 द्विपक्षीय राहत से संबंधित हैं। इसके अंतर्गत केन्‍द्रीय सरकार ने भारके के बाहर के किसी भी देश के साथ करार किया है। इन करारों को "दोहरे कर से बचाव का करार (डीटीएएएस)" कहा जाता है। इसमें निम्‍नलिखित की व्‍यवस्‍था की गई है:-

    • निम्‍नलिखित के संबंध में राहत प्रदान करना :-
      • ऐसी आय जिस पर भारत और उस देश दोनों में आयकर का भुगतान कर दिया गया है ; या
      • भारत में प्रभार योग्‍य आयकर और उस देश में संबंधित लागू कानून जिससे पारम्‍परिक आर्थिक संबंध, व्‍यापार और निवेश का संवर्धन किया जा सके, या
    • ऐसी आय जिस पर किसी भी देश में कर प्रभारित होगा ताकि इस अधिनियम के तहत और उस देश में समतुल्‍य प्रवर्तित कानून के अधीन दोहरे कराधान से बचा जा सके।

    इसके अतिरिक्‍त, केन्‍द्रीय सरकार निम्‍नलिखित की व्‍यवस्‍था करने के लिए करार करती है :-

    • अपवंचन की रोक या अधिनियम के अधीन या उस देश में लागू समतुल्‍य कानून के तहत प्रभार योग्‍य आयकर से बचाव के लिए सूचना का आदान-प्रदान या ऐसे अपवंचन या बचाव के मामलों का अन्‍वेषण, या
    • अधिनियम के तहत और उस देश में लागू समतुल्‍य कानून के तहत आयकर की वसूली।

    भारत ने 65 देशों के साथ डीटीएए का करार किया है जिनमें यू.एस ए , यू के, जापान, फ्रांस, जर्मनी आदि देश शामिल हैं। ऐसे देशों के मामले में जिनमें भारत ने दोहरे कराधान से बचाव का करार किया है, कर की दरों का निर्धारण ऐसे ही करारों द्वारा किया जाता है।

    धारा के तहत निर्धारित को विशेष तरीके से जमा/वापसी अदायगी द्वारा राहत दी जाती है यद्यपि उस को दोनों देशों में कर देना पड़ता है। यह राहत दूसरे देश में भुगतान योग्‍य कर के लिए जमा के रूप में हो सकती है या कम दर पर कराधान करके। ऐसी द्विपक्षीय राहत देने में शामिल निम्‍नलिखित कदम हैं :- (क) आयकर अधिनियम के उपबंधों के अनुसार भारत में भुगतान योग्‍य कर देने वाला व्‍यक्ति की कुल आय की गणना (ख) दूसरी संविदाकारी कंपनी के साथ किए गए कर संधि के निबंधनों के अनुसार राहत अनुमत करना।

    आयकर अधिनियम के अधीन उत्‍पन्‍न कर दायित्‍व भारत और विदेशी देश के बीच दोहरे कराधान से बचाव करारों के उपबंधों के अध्‍यधीन होते हैं। इस प्रकार से संधि के प्रावधान आयकर के प्रावधानों पर हावी होगा।

    डीटीएए के अधीन करारों के प्रकारों को निम्‍नानुसार श्रेणीबद्ध किया जा सकता है :-

    • व्‍यापक करार:- ये सुस्‍पष्‍ट दस्‍तावेज होते हैं जिसमें य‍ह ब्‍यौरा होता है कि विभिन्‍न शीर्षों के अंतर्गत आय का परिकलन कैसे किया जाए।
    • सीमित करार :- ये करार वायुयान, जहाज, कार्गो ढुलाई और भाड़ा के संचालन से व्‍युत्‍पन्‍न आय से संबंधित दोहरे कराधान से बचने के लिए किए जाते हैं।
    • अन्‍य करार :- इसमें दोहरे कराधान से राहत नियमावली शामिल होते हैं।

  • आयकर अधिनियम की धारा 91 एक पक्षीय राहत से संबंधित है। इसके अंतर्गत यदि कोई व्‍यक्ति/कंपनी किसी भी पिछले वर्ष में भारत में रह चुका है और आयकर का भुगतान कर चुका है जो उसे भारत में प्राप्‍त हुआ है, ऐसा कोई भी देश जिसके साथ दोहरे कराधान से राहत के लिए कोई करार नहीं किया गया है (धारा 90 के अध्‍यधीन) तो उसकी आय में से भारतीय आयकर जो उसके द्वारा देय होगा, ऐसे दोहरे कर वाली आय पर परि‍कल्पित, की कटौती भारतीय कर की औसत दर या उक्‍त देश का औसत कर दर पर, इसमें से जो भी कम हो, और यदि दोनों बराबर हो, तो भारतीय कर दर पर कटौती की जाएगी।

इस धारा के तहत राहत की परिगणना करने में निम्‍नलिखित कदम शामिल हैं :- (क) कुल आय पर कर की गणना और इस पर लागू राहत का दावा (ख) धारा 88 ई के तहत छूट का दावा करने के बाद अधिभार और शिक्षा पर कर जोड़ना (ग) पिछले चरण में परिकल्पित कर को भाग देकर औसत कर दर का अभिकल्‍पन कुल आय के साथ करना। (घ) सभी देय राहतों को घटाने के बाद उक्‍त देश में वास्‍तव में भुगतान किया गया आयकर को भाग देकर बाह्य देश की औसत कर दर का अभिकल्‍पन करना। (ड़) पिछले दो चरणों में अभि‍कल्पित दर पर भारत में भुगतान योग्‍य कर से राहत का दावा करना, जो कम हो उसके आधार पर।


अधिक जानकारी के लिए हमारे खंड 'कराधान' को देखें ।

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संबंधित लिंक्‍स :
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