Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
व्‍यापार का प्रबंधन
spacer
व्‍यापार का प्रबंधन संवर्धन
व्‍यापार का प्रबंधन ग्राहक संबंध प्रबंधन
व्‍यापार का प्रबंधन अपनी बौद्धिक दक्षता का प्रबंधन
व्‍यापार का प्रबंधन बीमा
व्‍यापार का प्रबंधन विपणन एवं बिक्री
व्‍यापार का प्रबंधन अपने वित्त साधनों का प्रबंधन
व्‍यापार का प्रबंधन विनियामक अपेक्षाएं
व्‍यापार का प्रबंधन वितरण
व्‍यापार का प्रबंधन मानव प्रबंधन संसाधन
व्‍यापार का प्रबंधन कर
   
 
Managing a Business
Managing a Business
कर:
व्‍यक्तियों का कराधान
Previous Page
spacer
व्‍यक्तियों पर आयकर लगाया जाता है। आयकर व्‍यक्तियों, कॉर्पोरेशनों अथवा व्‍यापारी निकायों के अन्‍य स्‍वरूपों द्वारा अर्जित आय पर उद्ग्रहित प्रत्‍यक्ष कर है। भारतीय संविधान ने केवल केन्‍द्र सरकार को आयकर का उद्ग्रहण एवं संग्रहण करने की शक्ति दी है। सरकार द्वारा स्‍थायी आयकर विभाग केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा शासित है। सीबीडीटी वित्त मंत्रालय में राजस्‍व विभाग का एक भाग है। इसे भारत में विभिन्‍न प्रत्‍यक्ष करों से जुड़ें सभी मामलों का प्रभार दिया गया है। यह भारत में प्रत्‍यक्ष करों की नीति तथा आयोजन के लिए आवश्‍यक निविष्टियां उपलब्‍ध कराता है तथा आयकर विभाग के माध्‍यम से प्रत्‍यक्ष कर कानूनों के प्रशासन के लिए भी उत्तरदायी है। आयकर से जुड़े सभी मामलों के लिए, आयकर अधिनियम, 1961 संरक्षणात्‍मक सर्वव्‍यापी (अम्‍ब्रैला) अधिनियम है जो केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड को अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्‍वयन हेतु नियम निरूपित करने ( आयकर नियम, 1962 ) की शक्ति प्रदान करता है।

आयकर अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति की विगत वर्ष की कुल आय के संबंध में, उस निर्धारण वर्ष के लिए वित्त अधिनियम द्वारा निर्धारित दरों पर सदृश निर्धारण वर्ष के लिए आयकर प्रभारित किया जाएगा। अन्‍य शब्‍दों में, एक वर्ष में अर्जित आय अगले वर्ष में कर योग्‍य है तथा निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारित आयकर दरें विगत वर्ष के दौरान अर्जित आय के संबंध में प्रयोज्‍य हैं।

कृपया नोट करें :- जिस वित्तीय वर्ष में आय अर्जित की जाती है, उसे विगत वर्ष कहा जाता है। विगत वर्ष के अनुवर्ती वित्तीय वर्ष को निर्धारण वर्ष कहा जाता है। निर्धारण वर्ष वह वर्ष है जिसमें विगत वर्ष में अर्जित वे‍तन कर योग्‍य होता है (पर कर लगाया जाता है)। कोई भी वित्तीय वर्ष प्रत्‍येक वर्ष पहली अप्रैल से आरंभ होता है तथा अगले वर्ष की 31 मार्च को समाप्‍त होता है।

नव आरंभ व्‍यापार या व्‍यवसाय के मामले में, विगत वर्ष नए व्‍यवसाय या व्‍यापार के आरंभ होने की तिथि से आरंभ होकर अगली 31 मार्च तक होता है यदि व्‍यक्ति पहले से ही निर्धारिती नहीं है।

आयकर अधिनियम में केन्‍द्रीय बजट द्वार प्रत्‍येक वर्ष वार्षिक संशोधन किए जाते हैं। बजट में वित्त विधेयक में विभिन्‍न संशोधन निहित होते हैं जिन्‍हें केन्‍द्र सरकार द्वारा उद्ग्रहीत प्रत्‍यक्ष करों में किया जाना प्रार्थित है। विधेयक को आयकर तथा अन्‍य करों का उल्‍लेख भी किया जाता है। एक बार अनुमोदित कर दिए जाने पर विधेयक वित्त अधिनियम बन जाता है तथा इसके उपबंधों को आयकर अधिनियम में शामिल कर लिया जाता है।

आयकर अधिनियम के अंतर्गत, प्रत्‍येक निर्धारिती द्वारा प्रत्‍येक वर्ष वित्त अधिनियम के अंतर्गत नियत दरों पर आयकर संदेय है। " निर्धारिती " का अर्थ ऐसा व्‍यक्ति है जिसके द्वारा अधिनियम के अंतर्गत कोई कर या कोई अन्‍य धन राशि (अर्थात शास्ति या ब्‍याज) संदेय है। इसमें निम्‍नलिखित शामिल हैं :-

क) प्रत्‍येक व्‍यक्ति जिसके संबंध में इस अधिनियम के अंतर्गत उसकी आय या किसी अन्‍य व्‍यक्ति, जिसके संबंध में वह निर्धारिती है, की आय या उसके द्वारा या ऐसे अन्‍य व्‍यक्ति द्वारा उठाई गई हानि, या उसे या ऐसे अन्‍य व्‍यक्ति का संदेय प्रतिदाय के निर्धारण के लिए कोई कार्यवाही की गई है;

ख) प्रत्‍येक व्‍यक्ति जिसे इस अधिनियम के किसी प्रावधान (उपबंध) के अंतर्गत निर्धारिती माना गया है;

ग) प्रत्‍येक व्‍यक्ति जिसे इस अधिनियम के किसी प्रावधान (उपबंध) के अंतर्गत चूककर्ता निर्धारिती माना गया है।

इस अधिनियम के अंतर्गत शब्‍द " व्‍यक्ति " में ये शामिल हैं:-

  • कोई व्‍यक्ति
  • कोई हिन्‍दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ)
  • कोई कम्‍पनी
  • कोई फर्म
  • व्‍यक्तियों की एसोसिएशन (एओपी) या व्‍यष्टि निकाय (बीओआई), चाहे वह निगमित किया गया हो या नहीं।
  • कोई स्‍थानीय प्राधिकरण
  • कृत्रिम न्‍यायिक व्‍यक्ति

आयकर अधिनियम में शब्‍द ' आय ' का अर्थ है निश्चित स्रोतों से किसी प्रकार की नियमितता अथवा प्रत्‍याशित नियमितता से ‘प्राप्‍त’ होने वाली आवधिक मौद्रिक आय। आयकर अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि आयकर प्रभारित करने के प्रयोजनार्थ तथा कुल आय की संगणना के लिए समस्‍त आय को पांच आय स्रोतों के अंतर्गत श्रेणीकृत किया जाएगा। इनमें से प्रत्‍येक स्रोत से व्‍यक्ति की आय का परिकलन व्‍यक्ति की कुल सकल आय की संगणना के लिए किया जाता है। आय के उक्‍त सभी शीर्षों में कुल आय का परिकलन किसी भी निर्धारण वर्ष में अप्रैल के प्रथम दिन यथा लागू अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाता है। अनुमत कटौतियों को कम कर दिया जाता है तथा फिर निर्धारित दरों पर संदेय आयकर का परिकलन किया जाता है। यदि व्‍यक्ति की आय विभिन्‍न शीर्षों से प्राप्‍त हो रही हो तो वह व्‍यक्ति संबंधित शीर्ष के अंतर्गत अनुज्ञेय कटौती का दावा करने के लिए पात्र है चाहे प्रत्‍येक शीर्ष के अंतर्गत परिकलन कर योग्‍य आय में परिणामी हो रहा हो या न हो रहा हो।

आयकर अधिनियम के अंतर्गत आय की परिभाषा समावेशी स्‍वरूप की है अर्थात परिभाषा में सूचीबद्ध मदों के अलावा आय की मूलभूत शर्त को पूरा करने वाली किसी भी प्राप्ति को आय माना जाना है तथा उस पर तदनुसार आयकर लगाया जाएगा।

किसी व्‍यक्ति की आय का परिकलन निम्‍नलिखित पांच शीर्षों के अंतर्गत किया जाता हैं :-

  • वेतन से आय
  • गृह सम्‍पत्ति से आय
  • कारोबार या व्‍यवसाय के लाभों तथा प्रतिफल से आय
  • पूंजी लाभ से आय
  • अन्‍य स्रोतों से आय

^ऊपर

 
संबंधित लिंक्‍स :
आयकर अधिनियम, 1961
आयकर नियम 1962
परिपत्र
अधिसूचनाएं
आयकर विभाग
भारत में आयकर कार्यालय
 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer