भारत में बीमा का व्यापार व्यापक रूप से चार प्रकार में बंटा हुआ है, जिसमें जीवन बीमा; अग्नि बीमा; समुद्री बीमा और विविध बीमा शामिल है। जीवन बीमा बीमाकर्ता और उस व्यक्ति जो अपने जीवन के जोखिमों के विरूद्ध बीमाकृत है, के बीच संविदा है। अग्नि बीमा एक संविदा है जिसके अंतर्गत बीमाकर्ता किसी प्रतिफल (प्रीमियम), के बदले में वित्तीय हानि के लिए बीमाकृत को प्रतिपूर्ति के लिए सहमत हो जाता है जो पश्चवर्ती को किसी विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान अग्नि के कारण संपत्ति अथवा माल के विनाश अथवा क्षति के कारण नुकसान हुआ हो। समुद्री बीमा एक करार है जिसके द्वारा बीमाकर्ता समुदी साहस के लिए आकस्मिक हानि के विरूद्ध सहमत रूप से और सीमा तक बीमाकृत को प्रतिपूर्ति करता है। ‘जीवन बीमाकर्ता’ जीवन बीमा का व्यापार करते हैं जबकि ‘सामान्य बीमाकर्ता’ बाकी बीमा का व्यापार करते हैं। कानून के अनुसार किसी को सम्पूर्ण अनुमति नहीं दी गई है। लेकिन एक व्यक्ति जितनी बीमा पॉलिसियां वह चाहे उतनी ले सकता है और सभी पॉलिसियों को उनकी परिपक्वता पर भुनाया जा सकता है। अत: बीमा कंपनियों द्वारा ‘दोहरी बीमा’ पॉलिसी दी जाती है। इसके अंतर्गत बीमाकृत व्यक्ति उसी जोखिम के लिए दो अथवा उससे अधिक बीमा कंपनियों के पास बीमा करा सकती है ताकि अपने आपको किसी हानि जो निजी बीमाकर्ता के कारण उदभूत हो सकती है, के विरूद्ध सुरक्षा के लिए दीवालिया हो जाता है और जिसमें बीमाकृत कुल राशि विषयवस्तु के मूल्य से अधिक हो। यदि कोई हानि होती है तो वह बीमाकर्ताओं वह ठीक होने के लिए भुगतान का दावा कर सकता है। तथापि प्रत्येक बीमाकर्ता हानि के लिए धनराशि के उसी अनुपात के लिए अंशदान के लिए उत्तरदायी है जिसके लिए प्रत्येक उत्तरदायी हैं और बीमाकृत बीमाकर्ताओं से एक साथ अपनी वास्तविक हानि से अधिक वसूल नहीं कर सकता है।