| वर्तमान वैश्वीकृत परिदृश्य में, किसी संगठन में नियोजित जनशक्ति को सही आकार देना, बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा का सामना करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रबंधन कार्य नीति बन गई है। स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति योजना (वीआरएस) कर्मचारियों की मौजूदा संख्या में समग्र कमी की व्यवस्था करने के लिए सर्वाधिक मानवीय तकनीक है। यह तकनीक कंपनियों द्वारा औद्योगिक इकाई में नियोजित कार्य बल में कमी लाने के लिए प्रयोग की जाती है। अब यह अधिक जनशक्ति को कम करने और संगठन के कार्य निष्पादन में सुधार लाने के लिए आम तौर पर प्रयोग में लाई जाती है। कर्मचारियों को कंपनी से स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक उदार, कर-मुक्त पृथक्करण भुगतान है। यह ‘गोल्डन हैंडशेक’ नाम से भी जानी जाती है क्योंकि यह छंटनी का एक स्वर्णिम माध्यम है।
भारत में औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 छंटनी द्वारा, प्रतिष्ठानों को बंद करके, अधिक स्टाफ में कमी करने के मामले में नियोजकों पर प्रतिबंध लगाता है और छंटनी प्रक्रिया में बहुत वैधताएं और जटिल प्रक्रियाएं अंतर्निहित हैं। इसके अतिरिक्त छंटनी की किसी भी योजना और स्टाफ तथा श्रमिकों की कमी का ट्रेड यूनियनों द्वारा जोरदार विरोध किया जाता है। अत: इस समस्या का समाधान करने के लिए एक वैकल्पिक कानूनी समाधान के रूप में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना की शुरूआत की गई, इसने सरकारी उपक्रमों सहित नियोजकों को अधिशेष जन शक्ति को कम करने के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं की पेशकश करने की अनुमति दी और किसी भी कर्मचारी पर बाहर निकलने के लिए कोई दबाव नहीं दिया जाता है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं का यूनियनों द्वारा भी अधिक विरोध नहीं किया गया क्योंकि इसकी प्रवृत्ति स्वैच्छिक है और कोई दबाव का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में लागू किया गया। तथापि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना की पेशकश करने और कार्यान्वित करने से पूर्व सरकार का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होता है।
एक कारोबारी फर्म निम्नलिखित परिस्थितियों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना का विकल्प अपना सकती है :-
- कारोबार में मंदी के कारण।
- तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण, जब तक कार्मिक संख्या में कमी न की जाए, प्रतिष्ठान जीवनक्षम नहीं हो पाता है।
- विदेशी सहयोगियों के साथ संयुक्त उद्यमों के कारण।
- अधिग्रहणों और विलयनों के कारण।
- उत्पाद/प्रौद्योगिकी के पुराने पड़ने के कारण
यद्यपि वीआरएस के लिए पात्रता मानदण्ड एक कंपनी से दूसरी कंपनी में भिन्न होते हैं, लेकिन सामान्यता जिन कर्मचारियों की आयु 40 वर्ष हो चुकी है और जिन्होंने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के पात्र हैं। यह योजना कामगारों और कार्यपालकों सहित सभी कर्मचारियों पर लागू होती है परन्तु कंपनी के निदेशकों पर नहीं। वह कर्मचारी, जो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनता है, पूरी की गई सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए पैंतालीस दिन की परिलब्धियां अथवा सेवानिवृत्ति के समय पर मासिक परिलब्धियों को सेवा की सामान्य तारीख से पूर्व सेवा के शेष महीनों से गुणा करके प्राप्त राशि, जो भी कम हो, का पात्र है। इन फायदों के साथ ही, कर्मचारी अपनी भविष्य निधि और ग्रेच्युटी देयताएं भी प्राप्त करते हैं। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के समय पर प्राप्त मुआवजा कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर निर्धारित राशि तक आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (10 ग) के अधीन कर से छूट प्राप्त है। तथापि सेवानिवृत होने वाले कर्मचारी को उसी प्रबंधन से संबंद्ध किसी अन्य कंपनी या संस्था में नियोजित नहीं किया जाना चाहिए।
कंपनियां अपने कर्मचारियों की विभिन्न श्रेणियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की भिन्न योजनाएं बना सकती हैं। तथापि इन योजनाओं को नियम 2 ख क के आयकर नियमों में निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप होना चाहिए, आयकर अधिनियम की धारा 10 (10 ग) के प्रयोजनों के लिए दिशानिर्देश नियम 2 ख क के आयकर नियामवली में निर्धारित किए गए हैं। इन दिशानिर्देशों में यह उपबंध है कि कंपनी द्वारा तैयार की गई स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना निम्नलिखित अपेक्षाओं के अनुसार होनी चाहिए, अर्थात् :-
(i) यह कंपनी के उस कर्मचारी पर लागू हो जिसने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है अथवा 40 वर्ष की आयु पूरी कर ली हैं ;
(ii) यह कंपनी के निदेशकों के अतिरिक्त कंपनी के कामगारों और कार्यपालकों सहित सभी कर्मचारियों (चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए) पर लागू हों;
(iii) स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना इस तरह तैयार की गई है कि इसके परिणामस्वरूप कंपनी के कर्मचारियों की मौजूदा संख्या में समग्र कटौती हो;
(iv) स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति द्वारा उत्पन्न रिक्ति को नहीं भरा जाता है, न ही सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारी को उसी प्रबंधन से संबद्ध अन्य कंपनी या संख्या में नियोजित किया जाना चाहिए।
(v) कर्मचारियों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के कारण प्राप्य राशि सेवा के प्रत्येक पूरे किए गए वर्ष के लिए डेढ़ माह के वेतन अथवा सेवानिवृत्ति के समय पर मासिक परिलब्धियों को अधिवर्षिता पर उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख से पूर्व बचे सेवा के शेष महीनों से गुणा करके प्राप्त राशि से अधिक नहीं होगी, किसी भी स्थिति में, राशि प्रत्येक कर्मचारी के मामले में पांच लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
( vi ) कर्मचारी ने विगत में किसी अन्य स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना का लाभ नहीं उठाया हो।
कुछ कंपनियां वीआरएस चुनने वाले कर्मचारियों के लिए लाभों का आकर्षक पैकेज प्रदान करती है। उदाहरणार्थ वीआरएस योजना में कर्मचारियों को उनके भविष्य के बारे में परामर्श देना; स्कीम के अंतर्गत प्राप्त निधियों का प्रबंधन; उन्हें पुनर्वास सुविधाएं प्रदान करना आदि भी शामिल हो सकता है।
कंपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना कार्यान्वित करते समय निम्नलिखित घोषणाएं कर सकती हैं :-
- संगठन का आकार छोटा करने के कारण
- स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के लिए पात्रता मानदण्ड
- योजना के लिए आवेदन कर सकने वाले कर्मचारियों की आयु सीमा और न्यूनतम सेवा अवधि
- स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्ति की पेशकश करने वाले कर्मचारियों को प्रस्तुत किए गए लाभ
- स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए किसी आवेदन को स्वीकार करने या अस्वीकार करने क नियोजक के अधिकार
- तारीख जब तक योजना खुली है
- योजना से जुड़े आयकर संबंधी फायदे और आयकर का प्रभाव क्षेत्र
- यह भी उल्लेख किया जाना चाहिए कि जो कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनते हैं और इस योजना के अधीन लाभ स्वीकार करते हैं, भविष्य में संगठन में रोजगार के पात्र नहीं होंगे।
यह पाया गया है कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना कानूनी दृष्टि से नियोजकों, कर्मचारियों और उनकी यूनियनों को कोई समस्या पैदा नहीं कर रही हैं। परन्तु किसी संगठन की छंटनी योजनाएं इसकी कार्यनीति संबंधी योजनाओं के संगत होनी चाहिए। इसकी कार्यविधि और लागू करने के कारणों पर शीर्ष प्रबंधन सहित सभी सभी प्रबंधन स्टाफ के साथ चर्चा की जानी चाहिए। संगठन को उन विभागों और कर्मचारियों की पहचान करने की आवश्यकता है जिन पर वीआरएस लागू है और इस तरह इसकी शर्तें तैयार करने तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वालों के लिए उपलब्ध लाभ बताने की आवश्यकता है। यह सूचना संगठन के प्रत्येक कर्मचारी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जिसमें उस अवधि का उल्लेख हो जिसके दौरान योजना खुली रहेगी। इसके अतिरिक्त मौजूदा कर्मचारी भी अपनी नौकरी गंवाने के भय के कारण असुरक्षा महसूस कर सकते हैं। स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति की एक संभावित कमी यह है कि सक्षम कर्मचारी कंपनी छोड़ सकते हैं जबकि अक्षम कर्मचारी कंपनी में बने रह सकते हैं। अत: यह नियोजक का उत्तरदायित्व है कि उन्हें प्रेरित करे और उनकी आशंकाओं और डर को दूर करे। |