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मानव प्रबंधन संसाधन: कर्मचारी लाभ:
पारिश्रमिकी
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पारिश्रमिक का अभिप्राय कुल वेतन पैकेज है जिसे कर्मचारी समय-समय पर प्राप्‍त करता है। एक स्‍वास्‍थ्‍य सक्षम और समर्पित कार्य बल सफल संगठन का अति मूल्‍यवान परिसम्‍पत्ति है। ऐसे कार्य बल या कर्मचारियों को प्राप्‍त करने और विकसित करने के लिए यह आवश्‍यक है कि उन्‍हें उनकी सेवाओं के लिए उचित रूप से पुरस्‍कृत किया जाएगा। परिलाब्धिक पारिश्रमिक ढांचा प्रबल शक्ति है जो कर्मचारियों को अपना अधिकतम मूल्‍य उद्यम के लिए देने हेतु अभिप्रेरित करता है। ऐसी पारिश्रमिक दरों का निर्धारण करते समय संगठन निम्‍नलिखित कारकों को ध्‍यान में रखता है :-
  • नियोक्‍ता और कर्मचारियों के बीच मोल-भाव करने की क्षमता अति महत्‍वपूर्ण है।
  • संगठन विशेष की स्थिति और वित्तीय क्षमता के लिए अधिक पारिश्रमिक का भुगतान करने की दक्षता।
  • बाजार में एक ही प्रकार के कार्य के लिए प्रचलित पारिश्रमिक दर (अर्थात प्रतिस्‍पर्धा का स्‍तर) तथा अर्थव्‍यवस्‍था की प्रबल स्थिति।
  • यदि कार्य के लिए विशिष्‍ट कौशल और प्रशिक्षण की आवश्‍यकता होती है तो पारिश्रमिक तदनुसार अधिक होना चाहिए।
  • कामगार द्वारा किया जाने वाला कार्य की प्रकृति और प्रकार। उदाहरण के लिए उच्‍च पारिश्रमिक दरें जटिल और आपदाजनक कार्यों के लिए अधिक पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना चाहिए।
  • कामगारों की उत्‍पादकता जैसे वे कामगार जो अधिक सक्षम और अनुभवी हैं, को अधिक पारिश्रमिक मिलना चाहिए।

उपर्युक्‍त पर विचार करते हुए, पारिश्रमिक भुगतान की तीन महत्‍वपूर्ण प्रविधियां निम्‍नलिखित हैं :-

  • समय दर प्रणाली :- यह पारिश्रमिक भुगतान की एक सरलतम और सबसे पुरानी प्रविधि है। इसके अंतर्गत कार्य पर बिताए गए समय के आधार पर परिलब्धि दी जाती है। कार्य करने के समय में वृद्धि के साथ पारिश्रमिक दर बढ़ती है। यहां पारिश्रमिक की गणना घण्‍टा, दैनिक, साप्‍ताहिक, मासिक या वार्षिक आधार पर किया जाता है और इनका निर्धारण साधारणत: पहले ही किया जाता है।

  • अदद दर प्रणाली :- इस प्रविधि में कामगार की दक्षता पर ध्‍यान दिया जाता है। इसके तहत कामगार द्वारा किए गए कार्य की मात्रा पर पारिश्रमिक आधारित होती है। कामगार के उत्‍पादन में वृद्धि या कमी होने के साथ-साथ पारिश्रमिक दर ऊपर नीचे होती है। यहां प्रति अदद पारिश्रमिक दर निर्धारित की जाती है।

  • प्रोत्‍साहन पारिश्रमिक योजना :- यह पारिश्रमिक भुगतान के लिए उपुर्यक्‍त दोनों प्रविधियों की समन्वित प्रविधि है। इसके अधीन कामगार न्‍यूनतम गारंटी पारिश्रमिक के अतिरिक्‍त अपनी दक्षता के अनुसार पारिश्रमिक प्राप्‍त करते हैं। उत्‍पादन की प्रमात्रा में घट – बढ़ के साथ-साथ प्रोत्‍साहन पारिश्रमिक दर घटती बढ़ती रहती है।

भारत में "उचित पारिश्रमिक संबंधी समिति" की स्‍थापना, पारिश्रमिक नीति तैयार करने के इतिहास में मुख्‍य घटना है। इसकी सिफारिशें जीविका पारिश्रमिक और न्‍यूनतम पारिश्रमिक और उचित पारिश्रमिक की मुख्‍य निर्धारित करने के अतिरिक्‍त है। न्‍यूनतम पारिश्रमिक वह पारिश्रमिक है जो सिर्फ जीने और कार्य दक्षता बनाए रखने के लिए है। (लिविंग वेज) जीवन मापन पारिश्रमिक है। उचित पारिश्रमिक वह पारिश्रमिक है जो न्‍यूनतम पारिश्रमिक से अधिक परन्‍तु जीवन मापन पारिश्रमिक से कम होती है। इसके अनुसार कर्मगारों को समुचित पारिश्रमिक प्राप्‍त होना चाहिए जो उनकी और उनके परिवार की आवश्‍यकता पूरी करने के लिए पर्याप्‍त हो।

परन्‍तु इसके बावजूद सभी क्षेत्रों की कम्‍पनियों के लिए एक समान और व्‍यापक पारिश्रमिक नीति नहीं है। संगठित क्षेत्रों में पारिश्रमिक नियोक्‍ता और कर्मचारियों के बीच बात-चीत और बन्‍दोबस्‍त द्वारा निर्धारित किया जाता है। परन्‍तु असंगठित क्षेत्र में न्‍यूनतम पारिश्रमिक दर का निर्धारण केन्‍द्र और राज्‍य सरकार दोनों द्वारा अपने संबंधित क्षेत्राधिकाराधीन अनुसूची में न्‍यूनतम पारिश्रमिक अधिनियम 1948 के उपबंधों के अधीन किया जाता है। केन्‍द्रीय क्षेत्र में न्‍यूनतम पारिश्रमिक न्‍यूनतम केन्‍द्रीय औद्योगिक संबंध मशीनरी के माध्‍यम से लागू किया जाता है। राज्‍य स्‍तर पर राज्‍य औद्योगिक सम्‍बंध मशीनरी न्‍यूनतम पारिश्रमिक सुनिश्चित करती है। अधिनियम नियोक्‍ताओं को समय-समय पर निर्धारित न्‍यूनतम पारिश्रमिक का भुगतान करने के लिए बाध्‍य करता है।

अन्‍य विधान पारिश्रमिक भुगतान अधिनिय, 1956 का अधिनियमन उद्योगों में नियुक्‍त कामगारों के पारिश्रमिक का भुगतान करने और उनको अवैध कटौती और/या अनुचित विलंब, जो उनेक विरुद्ध पारिश्रमिक भुगतान के सम्‍बद्ध में किया जाता है, उनका त्‍वरित और प्रभावी उपचार करने के लिए किया गया है। अधिनियम पारिश्रमिक अवधि के बारे निर्णय लेता है जिस अवधि तक पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना है। सभी पारिश्रमिकों का भुगतान वर्तमान कानूनी निविदा में किया जाता है। पारिश्रमिक का भुगतान चैक द्वारा किया जा सकता है या कर्मचारी के बैंक खाते में जमा किया जा सकता है। पारिश्रमिक भुगतान अधिनियम का अधिनियमन मुख्‍य रूप से राज्‍य सरकारों की जिम्‍मेदारी है। इस अधिनियम को पारिश्रमिक भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2005 द्वारा संशोधित किया गया।

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संबंधित लिंक्‍स :
श्रम मंत्रालय
पारिश्रमिक बोर्ड
पारिश्रमिक कक्ष
 
 
Government of India
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