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भंडारागार (वेयरहाउसिंग)
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भंडारागार (वेयरहाउसिंग) भंडारित उत्‍पाद की गुणता तथा प्रमात्रा के संरक्षण के लिए निर्मित एक भंडारण संरचना है। भंडारागार की आवश्‍यकता उत्‍पादों के उत्‍पादन तथा खपत के बीच समयांतराल के कारण उत्‍पन्‍न होती है। भंडारागार या भंडारण का संबंध वस्‍तुओं को उपभोक्‍ताओं त‍क प्रेषित किए जाने तक उनको सुरक्षित रखने तथा उनका परिरक्षण किए जाने से है। इस अंतराल के सेतुकरण द्वारा भंडारण समय उपयोगिता का सृजन करता है। वस्‍तुओं के भंडारण की आवश्‍यकता इसलिए है ताकि उन्‍हें जब और जैसे आवश्‍यक हो, क्रेताओं को उपलब्‍ध कराया जा सके। भंडारण भावी मांग की प्रत्‍याशा में उत्‍पादन करने में फर्म को समर्थ बनाता है। भंडारण व्‍यावसायियों को संपूर्ण वर्ष उत्‍पादन जारी रखने तथा अपने उत्‍पाद बेचने में समर्थ बनाता है, जहां भी उनकी पर्याप्‍त मांग है। भंडारागार की आवश्‍यकता इसलिए भी होती है क्‍योंकि कुछ वस्‍तुओं का उत्‍पादन केवल एक विशिष्‍ट मौसम में ही किया जाता है किन्‍तु उनकी मांग सम्‍पूर्ण वर्ष रहती है। इसी प्रकार, कुछ उत्‍पाद सम्‍पूर्ण वर्ष उत्‍पादित किए जाते हैं किन्‍तु मांग केवल एक विशिष्‍ट मौसम में ही होती है।

भंडारागार (वेयरहाउस) के प्रकार

निजी भंडारागार

ये भांडागार बड़े विनिर्माताओं तथा व्‍यापारियों की स्‍वयं की भंडारण की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए उनके स्‍वामित्‍वाधीन होते हैं तथा उनके द्वारा प्रचालित किए जाते है। बड़ी व्‍यवसाय फर्में, जिन्‍हें नियमित आधार पर बृहत भंडारण क्षमता की आवश्‍यकता होती है तथा जो धन लगाने की क्षमता रखते है, अपने निजी भांडागारों का निर्माण एवं अनुरक्षण करते हैं। एक बड़े विनिर्माता या थोक विक्रेता के पास देश के विभिन्‍न भागों में अपने स्‍वयं के भांडागारों का नेटवर्क हो सकता है। निजी भांडागारों का लाइसेंस निजी व्‍यक्तियों को दिया जाता है तथा लाइसेंसधारक द्वारा या उसकी ओर से आयातित वस्‍तुओं को ही ऐसे भांडागार में भंडारित किया जाता है।

सार्वजनिक भंडारागार

ये भंडारागार विशेषीकृत व्‍यापार स्‍थापना (प्र‍तिष्‍ठान) है जो कुछ प्रभार के बदले आम जनता को भंडारण सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं। ये किसी व्‍यक्ति या सहकारी समिति के स्‍वामित्‍वाधीन तथा उनके द्वारा प्रचालित हो सकते हैं। ये सरकार में लाइसेंस के अंतर्गत कार्य करते है। ये समान्‍यत: रेलवे जंक्‍शनों, राजमार्गों तथा जलमार्गों के निकट अवस्थित होते हैं। अत: ये वस्‍तुओं की सहज प्राप्ति, प्रेषण, लदान एवं उतारने के लिए उत्‍कृष्‍ट सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं। कृषि उत्‍पादों के विपणन में ये अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। एक सार्वजनिक भंडारागार को 'शुल्‍क प्रदत्त भंडारागार' भी कहा जाता है।

सार्वजनिक भंडारागार व्‍यवसाय समुदाय के लिए अत्‍यंत उपयोगी है क्‍योंकि वे बिना भारी निवेश के सार्वजनिक भंडारागार का प्रयोग करके अपनी भंडारण आवश्‍यकताओं की सहजतापर्वूक तथा किफायती ढंग से पूर्ति कर सकते हैं। ऐसे भंडारागार निम्‍न लागत पर लघु विनिर्माताओं तथा व्‍यापारियों को भंडारण सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं। वे संभावी क्रेताओं द्वारा वस्‍तुओं के निरीक्षण की सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं। वे वस्‍तुओं की पैकेजिंग एवं ग्रेडिंग भी अनुमत करते हैं। सार्वजनिक भंडारागार प्राप्तियों (रसीदें) उधार लेने के लिए अच्‍छी सहपार्श्‍वी प्रतिभूतियां हैं।

बांडयुक्‍त भंडारागार

ये भंडारागार सीमाशुल्‍क के भुगतान किए जाने तक भंडारण के लिए आयातित वस्‍तुएं स्‍वीकार करने के लिए सरकार द्वारा लाइसेंसशुदा हैं। ये पत्तनों के निकट अवस्थित होते हैं। इनका प्रचालन या तो सरकार द्वारा किया जाता है अथवा वे सीमाशुल्‍क प्राधिकारियों के नियंत्रणाधीन कार्य करते हैं। भंडारागार द्वारा एक वचनपत्र या 'बांड' दिया जाना अपेक्षित है कि वह सीमाशुल्‍क प्राधिकारियों की सहमति के बिना वस्‍तुओं का हटाए जाने की अनुमति नहीं देगा। वस्‍तुएं बांड के अंतर्गत रखी जाती है तथा सीमाशुल्‍क का भुगतान किए बिना उन्‍हें हटाया नहीं जा सकता। ऐसे भंडारागार आयातकों एवं निर्यातकों के लिए अत्‍यधिक उपयोगी हैं। यदि कोई आयातक वस्‍तुओं के आगमन के तत्‍काल पश्‍चात सीमाशुल्‍क अदा करने में असमर्थ है तो बांडयुक्‍त भंडारागार में वस्‍तुओं को भंडारित कर सकता है। वह आनुपातिक रूप में सीमाशुल्‍क का भुगतान कर के किस्‍तों में वस्‍तुओं को हटा सकता है। बांडयुक्‍त भंडारागार में पड़ी वस्‍तुओं को बिक्री के प्रयोजनार्थ पैकेज, ग्रेडिड तथा ब्रांडिड किया जा सकता है। केन्‍द्रीय भंडारागार निगम लगभग 0.5 मिलियन मीटर की कुल प्रचालित क्षमता से 75 सीमाशुल्‍क बांडयुक्‍त भंडारागार का प्रचालन करता है।

भंडारागार के लाभ

  • भंडारागार वस्‍तुओं का भंडारण समर्थकारी बनाते है जब उनकी आपूर्ति मांग से अधिक हो जाती है तथा उन्‍हें निर्मुक्‍त कर देते हैं जब मांग तात्‍कालिक उत्‍पादनों से अधिक होती है। इसमें एक ओर बाजार में वस्‍तुओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होती है तथा दूसरी ओर यह आपूर्ति और मांग को सुमेल बनाकर कीमतों के स्थिरीकरण में सहायक होता है।
  • भंडारागार वस्‍तुओं की सुरक्षित अभिरक्षा की व्‍यवस्‍था करते हैं। इस प्रकार व्‍यापारी हानि, क्षति, अग्नि, चोरी इत्‍यादि में वस्‍तुओं को जोखिम न्‍यूनतम करते हैं। नश्‍य उत्‍पादों का शीत भंडारण में परिरक्षित किया जा सकता है। सा‍थ ही, भंडारागार में रखी वस्‍तुएं सामान्‍यतया बीमित होती हैं।
  • भंडारागार बिक्री के प्रयोजनार्थ वस्‍तुओं के प्रसंस्‍करण, ग्रेडिंग, पैकिंग, मिश्रण इत्‍यादि की व्‍यवस्‍था करता है। संभावी क्रेता भंडारागार में रखी वस्‍तुओं का निरीक्षण कर सकते हैं।
  • भंडारागार उसमें रखी वस्‍तुओं के मालिक को एक रसीद जारी करते हैं। मालिक भंडारागार रसीद पर पृष्‍ठांकन करके वस्‍तुओं की प्रतिभूति पर धन उधार ले सकता है। बांडयुक्‍त भंडारागार में आयाति‍त वस्‍तुओं को रखकर, व्‍यापारी किस्‍तों में सीमाशुल्‍क की अदायगी कर सकता है।

सरकार ने तीन अभिकरण स्‍थापित किए हैं जो बड़े पैमाने पर भंडारण/भंडारागार सुविधा के निर्माण में रत हैं :-

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई)

इसकी स्थापना खाद्यान्‍नों के उचित वितरण तथा देश में कीमतों में स्थिरता लाने के उद्देश्‍य से की गई थी। इसमें इसके द्वारा अधिप्राप्ति अनेक मिलियन टन के लिए वैज्ञानिक भंडारण की व्‍यवस्‍था है। सुदूरवर्ती तथा अगम्‍य क्षेत्रों में सहज भौतिक गम्‍यता उपलब्‍ध कराने के‍ उद्देश्‍य से, एफसीआई का सम्‍पूर्ण भारत में अनुकूल सामरिक डिपो में सिलो, गोदाम तथा एफसीआई द्वारा विकसित एक स्‍वदेशी विधि शामिल है जिसे कवर एण्‍ड प्लिंथ (सीएपी) कहा जाता है। सीएपी भंडारण खुले स्‍थान में खाद्यान्‍नों के भंडारण के लिए निर्धारित एक पद है जहां पर्याप्‍त सुरक्षोपाय विद्यमान हैं जैसे चूहा एवं नमीरोधी प्लिंथ, डनेज का प्रयोग तथा ढेरों को विशेष प्रकार से संरचित पो‍लीथीन आवरणों से ढकना, इत्‍यादि। इस प्रकार, एफसीआई अपने उत्‍कृष्‍ट भंडारण प्रबंधन के माध्‍यम से भंडारण में रखे कई टन खाद्यान्‍नों के विशाल स्‍टॉक की सुस्‍वस्‍थता की अनुरक्षण करता है।

केन्‍द्रीय भांडागार निगम (सीडब्‍ल्‍यूसी)

यह भारत का एक अग्रणी भंडारण अभिकरण है तथा क्‍लांयटों के विविध समूहों को संभारतंत्र सेवाएं प्रदान करने वाले देश के सब से बड़े सार्वजनिक भंडारागार में से एक है। यह सम्‍पूर्ण देश में 9.8 मिलियन टन की भंडारण क्षमता वाले 490 भंडारागार का प्रचालन कर रहा है जो कृषि उत्‍पादन से ले कर परिष्‍कृत औद्योगिक उत्‍पादों तक उत्‍पादों की व्‍यापक श्रेणी के लिए भंडारागार सेवाएं उपलब्‍ध कराते हैं। सीडब्‍ल्‍यूसी की भंडारागार गतिविधियों में खाद्यान्‍न भंडारागार, औद्योगिक भंडारागार, सीमाशुल्‍क बंधुआ भंडारागार, कंटेनर माल भाड़ा केन्‍द्र, अंतर्देशीय समाशोधन डिपो तथा हवाई कार्गों परिसर शामिल हैं। भंडारण तथा प्रहस्‍तन, के अलावा, सीडब्‍ल्‍यूसी समाशोधन तथा अग्रेषण, प्रहस्‍तन एवं संवहन, अधिप्राप्ति एवं वितरण, असंक्रमण सेवाओं, घूम्रन सेवाओं तथा अन्‍य अनुषंगी गतिविधियों के क्षेत्र में सेवाओं की पेशकश भी करता है। सीडब्‍ल्‍यूसी विभिन्‍न अभिकरणों को भंडारागार मूल संरचना के निर्माण हेतु परामर्शी सेवाएं/ प्रशिक्षण भी प्रदान करता है।

17 राज्यों के भंडारागार निगम (एसडब्‍ल्‍यूसी)

भंडारागार निगमों की स्‍थापना देश के विभिन्‍न भागों में की गई है, जैसे आंध्र प्रदेश राज्‍य भंडारागार निगम; हरियाणा भंडारागार निगम, केरल राज्‍य भंडारागार निगम, इत्‍यादि। राज्‍य भंडारागार केन्‍द्र का प्रचालन क्षेत्र जिले के लिए महत्‍व रखने वाले क्षेत्र में किया जाता है। राज्‍य भंडारागार निगमों की कुल अंशपूंजी में सं‍बंधित राज्‍य सरकारों तथा केन्‍द्रीय भंडारागार निगम द्वारा बराबर का अंशदान किया जाता है। एसडब्‍ल्‍यूसी राज्‍य सरकार तथा केन्‍द्रीय भंडारागार निगम के दोहरे नियंत्रणाधीन हैं।

^ऊपर

 
संबंधित लिंक्‍स :
उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई)
केन्‍द्रीय भंडारागार निगम (सीडब्‍ल्‍यूसी)
 
 
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