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| थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता वितरण मार्गों में बिचौलियों के दो महत्वपूर्ण रूप हैं। वे उत्पादों के विनिर्माताओं और उपभोक्ताओं के बीच मध्यवर्ती कड़ी का काम करते हैं। उनकी उत्पादनकर्ताओं एवं उपभोक्ताओं दोनों को अनेक सेवाएं प्रदान करने में विशेषज्ञता होती है। वे विनिर्माता द्वारा अपने उत्पाद को अंतिम उपभोक्ता तक वितरण में किए जाने वाले प्रयासों को कम करते हैं तथा उसके उत्पादों को विस्तृत बाज़ार कवरेज मुहैया कराते हैं। वे विनिमय की कार्यकुशलता में अपार वृद्धि करते हैं और उत्पादों के वितरण की कुल लागत में कमी लाते हैं। वे उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक एवं उनकी पहुंच में आने वाले स्थानों पर उत्पादों की तत्काल सुपुर्दगी की व्यवस्था करते हैं। एक ओर तो वे उपभोक्ताओं को उत्पादों के बारे में जानकारी मुहैया कराकर तथा दूसरी ओर उत्पादनकर्ताओं को उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया मुहैया कराकर संप्रेषण के मार्ग के रूप में कार्य करते हैं।
थोक विक्रेता
थोक विक्रेताओं को ऐसे बिचौलियों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो उत्पादनकर्ताओं (जिनसे वे माल खरीदते हैं) और खुदरा विक्रेताओं (जिन्हें वे माल बेचते हैं) के बीच काम करते हैं। थोक विक्रेता ऐसे व्यक्ति या कारोबारी फर्म को कहते हैं जो वास्तविक उपभोक्ताओं को नहीं बल्कि खरीदारों (खुदरा विक्रेताओं) को अपेक्षाकृत बड़ी मात्रा में माल बेचते हैं। इस तरह ऐसे विनिर्माता जो अपने उत्पाद सीधे ही खुदरा विक्रेताओं को बेचते हैं, भी थोक विक्रेता कहे जा सकते हैं। थोक विक्रेताओं की विशेषज्ञता और कौशल वितरण नेटवर्क की कार्यकुशलता बढ़ाता है। विनिर्माता तथा खुदरा विक्रेता दोनों की समस्याओं को सुलझाते हैं।
थोक विक्रेताओं द्वारा विनिर्माताओं को दी जाने वाली सेवाएं :-
- वे उत्पाद की मांग से जुड़ी संभावनाओं के आधार पर अग्रिम में उत्पाद के लिए ऑर्डर प्रस्तुत करते हैं। इससे विनिर्माता को अपने उत्पादन की योजना बनाने तथा किफ़ायत इत्यादि करने में मदद मिलती है।
- वे विज्ञापन एवं बिक्री संवर्धन कार्य करते हैं तथा इस प्रयोजनार्थ विशेषज्ञ बिक्री प्रतिनिधि भी नियुक्त करते हैं।
- वे विनिर्माताओं को उनसे खरीदे गए माल के लिए नकद भुगतान के रूप में वित्तीय समायोजन प्रदान करते हैं तथा उन्हें ऋण भी प्रदान करते हैं।
- वे विनिर्माताओं को ग्राहकों की आदतों, अभिरुचि, पसंद और फैशन के बारे में ताज़ा जानकारी देते रहते हैं।
- वे माल की अंतिम कीमत नियत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
थोक विक्रेताओं द्वारा खुदरा विक्रेताओं को दी जाने वाली सेवाएं:-
- वे खुदरा विक्रेताओं के ''खरीद एजेंट'' के रूप में काम करते हैं और उन्हें विभिन्न विभिन्न विनिर्माताओं को खोजने एवं माल को जमा करने की परेशानी से मुक्ति देते हैं।
- वे खुदरा विक्रेताओं को नए उत्पादों, इसके प्रयोग तथा उनकी कीमतों में हुए परिवर्तन की जानकारी देते हैं। वे खुदरा विक्रेताओं की उत्पादों के विज्ञापन एवं बिक्री में मदद भी करते हैं।
- वे खुदरा विक्रेताओं को वित्तीय सहायता देते हैं, खुदरा विक्रेताओं को उधार पर माल देते है और इस तरह कम कार्यशील पूंजी के साथ उन्हें काम करने में मदद देते हैं।
- चूंकि थोक विक्रेता बाज़ार का भण्डागार होते हैं, वह खुदरा विक्रेता को उत्पाद के अधिक भण्डारण से होने वाले नुक्कसान से बचाता है।
- वे गुणवत्ता के अनुसार उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों का चयन करते हैं और खुदरा विक्रेताओं के लिए छोटी ढेरियों में माल को पैक करते हैं।
खुदरा विक्रेता
खुदरा व्यापार उन सभी लेन-देनों को कहते हैं जिनमें अंतिम उपभोक्ता तक माल या सेवाओं की बिक्री शामिल होती है। खुदरा विक्रेता ऐसा बिचौलिया होता है जो थोक – विक्रेता से माल खरीदता है तथा अंतिम उपभोक्ता को बेच देता है। वे उत्पादों के वितरण – मार्ग में महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं क्योंकि उनके बिना न तो उत्पाद दूरस्थ स्थानों पर विकेगा और न ही उपभोक्ताओं के लिए अपने निकट स्थित अपनी पसंद की दुकानों पर माल खरीदता संभव होगा। उनका उपभोक्ताओं के साथ कहीं मज़बूत व्यक्तिगत संबंध होता है और वे विभिन्न अभिरुचि तथा पसंद के लोगों से सीधे सम्पर्क में आते हैं। वे वितरण श्रृंखला की अंतिम कड़ी है और उत्पाद का अंतिम विक्रय मूल्य देते हैं। खुदरा विक्रेता महत्वपूर्ण सेवा प्रदान करते हैं तथा एक ओर तो विनिर्माताओं और दूसरी ओर उपभोक्ताओं का समस्याओं का निदान करते हैं।
खुदरा विक्रेताओं द्वारा थोक विक्रेताओं एवं विनिर्माताओं को दी जानी वाली सेवाएं :-
- वे थोक – विक्रेताओं एवं विनिर्माताओं को बिक्री – केन्द्र मुहैया कराते हैं।
- वे विनिर्माताओं को बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को छोटी मात्रा में माल की बिक्री करने की असुविधा से तथा व्यय करने से बचाते हैं।
- वे विनिर्माताओं को उपभोक्ताओं की ज़रूरतों और इच्छाओं की जानकारी देते हैं।
- वे थोक –विक्रेता के गोदाम से अंतिम उपभोक्ता तक माल के परिवहन की व्यवस्था भी करते हैं।
- वे माल का भण्डार रखकर भण्डारण का कार्य भी करते हैं।
खुदरा विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाएं :-
- वे उपभोक्ताओं की ज़रूरतों का पूर्वानुमान लगाते हैं और तदनुसार विभिन्न किस्मों का माल रखते हैं। इस तरह वे उनकी मांग को पूरा करते हैं और माल के विभिन्न विकल्प देते हैं।
- वे थोक विक्रेताओं द्वारा प्रदाय किए गए माल की छंटनी करते हैं और उपभोक्ताओं के लाभ के लिए उन्हें सुविधाजनक पैकों में रखते हैं।
- वे उपभोक्ताओं की जानकारी में नए उत्पाद लाकर तथा उनके विभिन्न प्रयोगों के बारे में सूचना देकर उनके लिए सलाहकार और मार्गदर्शक का कार्य भी करते है।
- वे उत्पादों की विभिन्न किस्मों को लेकर बाज़ार में बदलते रुख के बारे में उपभोक्ताओं को जानकारी देते हैं।
- वे उपभोक्ताओं को अन्य सेवाएं भी प्रदान करते हैं जैसे फ्री होम डिलीवरी, बिक्री के बाद की सेवाएं, उधार सुविधा इत्यादि।
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खुदरा – विक्रेता अपने प्रचालन और स्थान पर निर्भर करते हुए विभिन्न प्रकार के होते हैं। वे मोटे तौर पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किए गए हैं :-
- छोटे खुदरा विक्रेता :- वे खुदरा विक्रेता होते हैं जिनका प्रचालन क्षेत्र बाज़ार के एक छोटे खण्ड और कुछ ही उत्पादों तक सीमित होता है। वे आमतौर पर नियमित इस्तेमाल के उत्पादों का थोड़ा भण्डार रखते हैं। ऐसे खुदरा विक्रेताओं की संख्या बहुत कड़ी हैं लेकिन उनका कुल खुदरा व्यापार में बहुत छोटा हिस्सा है। लेकिन छोटा खुदरा-व्यापार अंतिम उपभोक्ताओं तक उत्पादों को पहुंचाने के लिए बहुत आम, सरल और लचीला तरीका है। इसमें प्रचालन लागत कम होती है और आम तौर पर यह मालिक के स्वामित्वाधीन एवं उसके द्वारा चलाया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि खुदरा विक्रेताओं का अपने ग्राहकों के साथ सीधा और व्यक्तिगत सम्पर्क होता है। इस प्रकार के खुदरा व्यापार में कम पूंजी, व्यावसायिकता की भावना का अभाव और कम क्रय शक्ति की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
भारत में छोटे खुदरा व्यापार के दो प्रचलित रूप हैं :-
- चलते-फिरते या मोबाइल खुदरा विक्रेता :- वे खुदरा विक्रेता होते हैं जो अपना व्यापार उत्पादों की बिक्री के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर चलाते है, और उनका कोई नियत कारोबारी परिसर नहीं होता। वे अपनी सुविधा और बिक्री की संभावनाओं के अनुसार अपने व्यापार का स्थान बदलते हैं। वे या तो उपभोक्ता के द्वार पर जाकर अथवा ऐसे स्थानों पर जहां उपभोक्ताओं बार-बार आते हैं, अपना व्यापार करते हैं। उनके व्यापार का कोई एक विशिष्ट रूप नहीं होता और वे उस माल का बहुत कम भण्डार लेकर चलते हैं। वे साधारण उपयोग की चीज़े खरीदने में उपभोक्ताओं के समय और प्रयासों की बचत करते हैं। इस श्रेणी में फेरी वाले और पैडलर; सस्ते टहलुए; बाज़ार व्यापारी और सड़कों पर दुकान सजाने वाले आते हैं।
- अचल दुकान खुदरा विक्रेता :- वे खुदरा विक्रेता होते है जिनका अचल कारोबारी परिसर होता है और वे रिहायशी इलाकों या बाज़ारों में स्थिता यूनिट स्टोर या छोटी दुकानों के ज़रिए काम करते हैं। इनमें ये शामिल होते हैं :- (i) सड़कों पर लगे स्टॉल:- वे छोटे दुकानें होती है जो सड़क के किनारे, सड़क की क्रॉसिंग, बस-स्टॉप इत्यादि पर स्थित होती है। वे लेखन-सामग्री, किराना इत्यादि जैसे नियमित प्रयोग के उत्पादों की बहुत सीमित किस्मों की बिक्री करती है; (ii) पुराने माल के डीलर:- इस्तेमाल लाई जा चुकी चीज़ों जैसे किताबें, कपड़े इत्यादि की खरीद और बिक्री में लगे लोग; (iii) जनरल स्टोर या वैरायटी स्टोर :- वे दुकानें हैं जो डबलरोटी, मक्खन, कागज़ और पेंसिल इत्यादि जैसी नियमित इस्तेमाल की आम उपभोक्ता वस्तुओं की सभी किस्मों की बिक्री करते हैं। वे रिहायशी इलाकों या व्यस्त बाज़ारों में स्थित होते हैं। वे अपने उपभोक्ताओं को उधार पर तथा 'होम डिलीवरी' जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं; (iv) विशिष्ट दुकानें :- एक या दो किस्म की विशिष्ट वस्तुओं का काम करती है। वे आम तौर पर शॉपिंग सेंटर में स्थित होती है। उदाहरणार्थ केमिस्ट की दुकान, किराने की दुकान, सिले-सिलाए वस्त्रों की दुकान, मिठाई की दुकान इत्यादि।
- बड़े खुदरा विक्रेता :- ऐसे खुदरा विक्रेता जिनका प्रचालन क्षेत्र बाज़ार के बड़े खण्ड तथा अनेक उत्पाद श्रृंखलाओं तक विस्तृत होता है। उनके व्यापार का निश्चित रूप होता है जिसमें उन्होंने बड़ी पूंजी का निवेश किया होता है। ऐसे खुदरा विक्रेताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं होती। इस प्रकार के खुदरा व्यापार में प्रचालन लागत बहुत अधिक होती है और ग्राहकों के साथ व्यक्तिगत सम्पर्क का अभाव होता है। लेकिन इसमें विज्ञापन, प्रचार, बिक्री संवर्धन इत्यादि जैसी विभिन्न संवर्धनात्मक तकनीकों के प्रयोग से उत्पादों की बिक्री में व्यावसायिकता की भावना अधिक होता है। बड़े खुदरा-विक्रेताओं के विभिन्न रूप इस प्रकार हैं:-
- डिपार्टमेंटल स्टोर :- बड़ी खुदरा स्थान होती है जहां एक ही इमारत में अनेक डिपार्टमेंट होते हैं। इसके सभी डिपार्टमेंट केन्द्रीय रूप से नियंत्रित होते हैं लेकिन प्रत्येक डिपार्टमेंट अपने-आप में एक पूर्ण बिक्री इकाई होता है और विशिष्ट प्रकार के उत्पाद से जुड़ा होता है। वे एक ही छत के नीचे ग्राहकों को उत्पादों के अनेक विकल्प पेश करते हैं। वे ग्राहकों की सुविधा के लिए अनेक सुखसाधन भी मुहैया कराते हैं जैसे रेस्तरां, कार, पार्किंग, मनोरंजन कक्ष, डाक व तारघर इत्यादि। ऐसे स्टोर आमतौर पर बड़े शहरों के केन्द्र में स्थित होते हैं ताकि ग्राहाकें को पहुंचने में आसानी हो।
- सुपर मार्किट :- अपेक्षाकृत कम लागत पर कार्य कर रही बड़ी खुदरा दुकानें होती हैं। वे एक ही स्थान पर खाद्य वस्तुओं, किराना इत्यादि जैसी नियमित इस्तेमाल की उपभोक्ता वस्तुओं की विस्तृत किस्में बेचती हैं। वे डिपार्टमेंटल स्टोर की तुलना में कम कीमत पर माल बेचती है। ग्राहक दुकानदार की मदद के बिना स्वयं माल का चयन करता है। इन्हें स्व-सेवा (सेल्फ सर्विस) स्टोर भी कहा जाता है। लेकिन ये अपने ग्राहकों को अतिरिक्त सुविधाएं नहीं देते।
- अनेकानेक (मल्टिपल) दुकानें या श्रृंखला स्टोर :- एक ही प्रकार के खुदरा स्टोरों का समूह होता है जिसका एक ही स्वामित्व और केन्द्रीकृत प्रबंधन तंत्र होता है लेकिन जो अलग-अलग स्थानों पर स्थित होते हैं। वे सब एक प्रकार के उत्पादों से संबंधित कार्य करते हैं और समान शर्तों पर वही मानक उत्पाद बेचते हैं। आमतौर पर ये माल रोज़मर्रा इस्तेमाल के लिए होता है और सभी प्रकार के ग्राहकों के लिए तत्काल स्वीकार्य होता है। वे कम कीमतों पर माल बेचते हैं क्योंकि वे बड़ी मात्रा में की गई खरीद बेचते हैं क्योंकि वे बड़ी मात्रा में की गई खरीद से हुई किफ़ायत का लाभ उठाते हैं।
- मेल ऑर्डर हाउस :- वे खुदरा – कारोबारी स्थापनाएं हैं जो डाक से अपना ऑर्डर प्राप्त करते हैं और पार्सल या डाक एक्सप्रेस से अपने माल की सुपुर्दगी भी करते हैं। डाकघर उनके वितरण का मुख्य मार्ग हैं। ग्राहकों से आदेश समाचारपत्रों में या पत्रिकाओं में विज्ञापन देकर अथवा टेलीफोन से सम्पर्क करके प्राप्त किए जा सकते हैं। लेकिन इस प्रकार का खुदरा-व्यापार अवैयक्तिक होता है तथा इसमें खरीददार और विक्रेता का आमना-सामना नहीं होता। तथापि, इसमें उपभोक्ताओं को अपने घर पर अपनी ज़रूरत का सामान मिल जाता है और इस तरह उनके समय और पैसे की बचत होती है।
- उपभोक्ता सहकारी भण्डार :- ऐसे सहकारी भण्डार होते हैं जिनका स्वामित्व और प्रचालन कार्य स्वयं उपभोक्ताओं के हाथ में होता हैं। वे सहकारी संस्था अधिनियम के तहत एसोसिएशन के रूप में निगमित किए जाते हैं। ऐसे भण्डारों की सदस्यता स्वैच्छिक होती है और छोटी राशि के शेयरों की खरीद करके सदस्यों द्वारा स्वयं की पूंजी अभिदत्त की जाती है। वे अपनी ज़रूरत की वस्तुओं को विनिर्मातओं और थोक-विक्रेताओं से बड़ी मात्रा में खरीदते हैं तथा अपने सदायों को कम कीमत पर बेचते हैं। ऐसे सहकारी भण्डारों का उद्देश्य अपने सदस्यों को सेवा प्रदान करना है न कि मुनाफ़ा कमाना।
- किराया खरीद विक्रेता :- ऐसा खुदरा व्यापार है जिसमें माल के ग्रहणधिकार की ज़मानत पर ग्राहकों को उधार दिया जाता है। वे ऐसे ग्राहकों को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं जो नियमित अन्तराल पर किश्तों में (जिन्हें किराया प्रभार भी कहा जाता है) भुगतान करने पर सहमत हो जाते हैं। इस प्रकार के खुदरा व्यापार में उपभोक्ताओं को आस्थगित भुगतान का लाभ मिलता है क्योंकि वे उधार पर उत्पाद को खरीद सकते हैं और उत्पाद को इस्तेमाल में करने के साथ-साथ आसान किश्तों में अदायगी कर सकते है। खरीददार को माल का स्वामित्व पूरी कीमत चुका देने के बाद ही प्राप्त होता है। यदि किश्त की अदायगी में चूक होती है तो विक्रेता को माल वापस लेने या खरीददार पर अदालती कार्रवाई करने का अधिकार होता है।
- सुपर बाज़ार :- सहकारी समितियों द्वारा चलाए गए विशाल खुदरा भण्डार हैं। वे एक ही छत के नीचे अनेक प्रकार के उत्पाद बेचते है। वे विनिर्माताओं और थोक विक्रेताओं से थोक दरों पर माला खरीदते हैं और उचित दाम पर उपभोक्ताओं को बेचते हैं। ये स्व-सेवा भण्डारों या दुकानदार द्वारा सेवित अलग काउंटरों के रूप में कार्य कर सकते हैं।
- स्वचालित वेडिंग मशीनें :- खरीदारों द्वारा मशीन में सिक्के या टोकन डालकर चलाया जाने वाला खुदरा-व्यापार का यह नया रूप है। बदले में, खरीददार को मशीन से उत्पाद की निश्चित मात्रा प्राप्त हो जाती है। इनका प्रयोग आम खपत की पहले से पैक की गई और कम कीमत की वस्तुओं की बिक्री के लिए किया जाता है जैसे पेय पदार्थ, टिकट इत्यादि। इस प्रकार के खुदरा-व्यापार से ऐसे स्थानों और ऐसे समय पर माल बेचा जा सकता है। जहां दूसरे प्रकार के खुदरा व्यापार सुविधाजनक या किफायती न हों। उदाहरणार्थ, मदर डेयरी ऐसी वेडिंग मशीनों के ज़रिए दूध बेचती है।
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