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मानव प्रबंधन संसाधन: कार्यस्‍थल से संबंधित मुद्दे :
कार्य की दशाएं
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कार्य के लिए वातावरण कार्यप्रणाली के लिए प्रेरक होना चाहिए। यह प्रवर्तक कार्य करने के लिए और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं की कार्य प्रणाली के लिए प्रेरक वातावरण प्रदान करनी चाहिए। कार्यप्रणाली की स्थितियां श्रमिकों के कार्य के वातावरण से संबंधित हैं, जैसे कि कार्य के घंटे, सुरक्षा, प्रदान किए छुट्टियों के दिन और अवकाश, आराम करने की अवधियां, कपड़े अथवा यूनिफार्म से स्‍वतंत्रता, अग्रिम धनराशि की संभावनाएं आदि। किसी संगठन की कार्य प्रणाली की स्थितियां ऐसी होंगी कि श्रमिक अथवा कर्मचारी अपने सर्वोत्तम प्रयासों से योगदान प्रदान करने और अच्‍छा उत्‍पादन करने में समर्थ होते हैं। श्रमिक को कार्य करते समय अपने आपको सुरक्षित और आरामदायक महसूस करना चाहिए। कार्य की स्थितियां ऐसी होनी चाहिए कि श्रमिक कार्य को बोझा नहीं समझे, इसके बजाय उन्‍हें खुशी से कार्य करने के लिए प्रोत्‍साहित और प्रेरित किया जाना चाहिए। दूसरे शब्‍दों में, उन्‍हें उसी ढंग से अपना कार्य करने चाहिए जिस ढंग से वे अपना व्‍यक्तिगत कार्य करते हैं। श्रमिकों को कार्य के साथ-साथ कार्यालय में पार्टी आयोजित करने, पिकनिक अथवा सप्‍ताहान्‍त सैर आदि जैसे कार्यालय के अंदर और बाहर के दोनों मनोरंजक कार्यकलापों में लगाया जाना चाहिए।

कई संगठनों में कर्मचारियों को प्रोत्‍साहन के क्षेत्र में समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रयोग और खोजबीन की जा रही हैं। उनकी सामाजिक आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए लघु ससंजक कार्य समूह और प्रबल एवं समझदार पर्यवेक्षक होने चाहिए। कार्य के दबाव को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए क्‍योंकि व्‍यावसायिक दबाव अथवा कार्य के दबाव से शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य को खतरा पैदा करता है जो अंतत: संगठन की स्थिति पर प्रभाव डालता है। बढ़ा हुआ कार्यभार बहुत लंबे कार्य के घंटे और उसी वेतन के हर समय उच्‍चतम स्‍तर पर कार्य निष्‍पादन के लिए दबाव और अवास्‍तविक प्रत्‍याशाएं विशेष तौर पर उस समय जब कॉर्पोरेट के पुनर्गठन ने कर्मचारियों पर दबाव डाला है। कर्मचारी विशेष तौर महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्‍थान पर उन्‍हें सुरक्षा के बारे में आश्‍वस्‍त किया जाना चाहिए।

श्रमिकों के बीच एक दल भावना बनाए रखने के लिए नियोक्‍ताओं और कर्मचारियों दोनों को अपने आप प्रयास करने चाहिए। श्रमिकों को साथ के कर्मचारियों के साथ सहयोग द्वारा उनके अपने-अपने लक्ष्‍यों के साथ-साथ संगठन के आम लक्ष्‍यों के लिए कार्य करने के‍ लिए प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए।

कार्य के लिए वातावरण साफ, स्‍वस्थ, खुला और स्‍वास्‍थ्‍यपरक होना चाहिए। यह अनावश्‍यक शोर और अशांति से मुक्‍त होना चाहिए। वातन, तापक्रम संतुलन, रोशनी व्‍यवस्‍था, शोर और संबद्ध अशांति, रंग, आसपास का वातावरण आदि जैसी संतोषजनक वास्‍तविक कार्य स्थितियों से श्रमिकों का कार्य स्‍थान पर क्षोम अथवा दबाव को हटाने में मदद मिलेगी। संगठन में समुचित आधारभूत ढांचा सुविधा होनी चाहिए।

कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर समुचित कार्य निष्‍पादन मूल्‍यांकन होना चाहिए। जो कर्मचारी अच्‍छा कार्य करता है उसे पुरस्‍कृत किया जाना चाहिए। कर्मचारियों को विभिन्‍न प्रोत्‍साहन और लाभ प्रदान किए जाने चाहिए। वेतन प्रोत्‍साहन प्रणाली कर्मचारियों को समुचित आय सुनिश्चित करेगी और उनको विश्‍वास दिलाएगा कि प्रबंधन उनके लिए बेहतर जीवन स्‍तर में ईमानदारी से रुचि ले रहा है न कि केवल अपने व्‍यापक लाभ में लगा हुआ है।

इससे संबंधित कुछ विधान निम्‍नानुसार हैं :-

  • भवन और अन्‍य निर्माण श्रमिक (रोजगार और कार्य स्थितियों का विनियमन) अधिनियम,1996 :- इस अधिनियम का उद्देश्‍य भवन और अन्‍य निर्माण श्रमिकों की रोजगार एवं सेवा की स्थितियों के विनियमन के लिए प्रावधान करना है। यह अधिनियम प्रत्‍येक संस्‍थापन जो गत वर्ष के दौरान दस अथवा अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है में सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कल्‍याणकारी उपायों की व्‍यवस्‍था भी करता है। केवल उन आवासीय गृहों के संबंध में ही अपवाद किया गया है जिसका निर्माण स्‍वयं के प्रयोजन के लिए किया गया है और अन्‍य ऐसे कार्यकलाप जिन पर कारखाना अधिनियम, 1948 और खान अधिनियम, 1952 लागू होता है।

  • बागान श्रमिक अधिनियम, 1951 :- यह अधिनियम बागान श्रमिक के कल्‍याण के लिए प्रावधान करता है और बागानों में कार्य की स्थितियों को विनियमित करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत शामिल किए गए प्रत्‍येक बागान में राज्‍य सरकार द्वारा यथा विहित श्रमिकों और उनके परिवार के लिए चिकित्‍सा सुविधा की व्‍यवस्‍था की गई है। यह अधिनियम बागान परिसंपदा में कार्य स्‍थान पर और उसके आसपास बागान श्रमिकों के लाभ के लिए कैन्‍टीनों, क्रैचों, मनोरंजन सुविधाओं, समुचित आवास और शिक्षा सुविधाएं स्‍थापित करने की व्‍यवस्‍था करता है। यह अधिनियम व्‍यवस्‍था करता है कि एक सप्‍ताह में किसी बुजुर्ग श्रमिक और बूढे अथवा बच्‍चे से क्रमश: 48 घंटे और 27 घंटे से अधिक काम में नहीं लगाया जाएगा और प्रत्‍येक श्रमिक 7 दिन की प्रत्‍येक अवधि में एक दिन के अवकाश का पात्र है।

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